इमरान खान को Leave India Notice, क्या विरोध करना भारत छोड़ने की वजह?

बॉम्बे हाई कोर्ट में अभिनेता इमरान खान की याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होगी. अमेरिकी नागरिक और OCI कार्डधारक इमरान खान को मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद Leave India Notice जारी किया गया था. उन्होंने इसे चुनौती देते हुए सुनवाई का अवसर न मिलने और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस क्यों मिला, हाई कोर्ट में चुनौती क्यों?
इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस क्यों मिला, हाई कोर्ट में चुनौती क्यों?
Imran Khan Leave India Notice: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म निर्माता इमरान खान की याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध की. अमेरिकी नागरिक इमरान खान पिछले 42 वर्षों से भारत में रह रहे हैं. उन्होंने मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए एक प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिए जाने के बाद विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) की ओर से जारी Leave India Notice (LIN) को चुनौती दी है. इस नोटिस में 44 वर्षीय अभिनेता को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया था.

अपनी याचिका में इमरान खान ने दलील दी है कि यह नोटिस अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी किया गया और असंवैधानिक है, क्योंकि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया.

ThePrint की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में इमरान खान ने किन कानूनों को चुनौती दी है, सरकार ने किन प्रावधानों का इस्तेमाल किया और अभिनेता ने अदालत में क्या दलीलें दी हैं, आइए समझते हैं.

इमरान खान के खिलाफ क्या हुआ और किन धाराओं में कार्रवाई हुई?

इमरान खान की याचिका के मुताबिक, 10 अक्टूबर को शाम करीब 5 बजे वह नाना चौक के पास मौजूद थे. वहां बैरिकेडिंग देखकर उन्होंने पुलिस के निर्देश पर वापस लौटने का फैसला किया.

रिपोर्टरों से बातचीत में उन्होंने कहा, “मेरी कोई मांग नहीं है. मैं यहां एक नागरिक के तौर पर आया हूं, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इस शहर में रहता है. मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही की स्वतंत्रता क्यों सीमित की जा रही है और लोगों की आवाज क्यों दबाई जा रही है. मैं यहां यह समझने आया हूं कि ऐसा क्यों हो रहा है.”

उन्होंने आगे कहा, “मेरी कोई औकात नहीं है कि मैं लोगों से कुछ मांग करूं और न ही मैं किसी संगठन का हिस्सा हूं.”

याचिका के अनुसार, मुंबई पुलिस ने उन्हें शाम करीब 5:20 बजे हिरासत में लिया और रात 7 बजे रिहा कर दिया. हालांकि, उसी शाम गामदेवी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई. इन आरोपों में सरकारी कर्मचारी के आदेश की अवज्ञा, गलत तरीके से रोकना, गैरकानूनी जमावड़ा और दंगा करने से संबंधित प्रावधान शामिल थे.

FIR के मुताबिक, इमरान खान दोपहर करीब 3:30 बजे अगस्त क्रांति मैदान पहुंचे थे और उन्होंने कथित तौर पर पुलिस के आदेश का उल्लंघन करते हुए 350 से 400 लोगों की भीड़ को उकसाया.

हालांकि, इमरान खान ने अपनी याचिका में इस आरोप को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है. उनका कहना है कि CCTV फुटेज से पता चलता है कि वह शाम 5 बजे के बाद वहां पहुंचे, पुलिस की बैरिकेडिंग के बारे में पूछा और पुलिस के कहने पर तुरंत वहां से चले गए. याचिका के मुताबिक, मीडिया से बातचीत के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया.

याचिका में यह भी कहा गया है कि BNS के तहत लगाए गए ये अपराध जमानती हैं और इनमें अधिकतम सजा दो साल से कम है. मामले में अभी जांच चल रही है और आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल नहीं हुआ है.

Leave India Notice किस कानून के तहत जारी हुआ?

14 अक्टूबर को मुंबई के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) ने इमरान खान को Leave India Notice जारी किया. इसके लिए Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 7(2)(c) और धारा 29 का हवाला दिया गया.

नोटिस में कहा गया कि इमरान खान ने Immigration and Foreigners Act, 2025 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों और आदेशों का उल्लंघन किया है. हालांकि, अभिनेता का कहना है कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्होंने आखिर किस विशिष्ट प्रावधान का उल्लंघन किया.

धारा 7(2)(c) केंद्र सरकार को किसी विदेशी नागरिक को भारत छोड़ने का निर्देश देने का अधिकार देती है.

वहीं, धारा 29 के तहत किसी विदेशी नागरिक को भारत से बाहर भेजने का निर्देश तीन परिस्थितियों में दिया जा सकता है:

  • कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन होने पर.

  • कानून के तहत बनाए गए किसी नियम, निर्देश या आदेश का उल्लंघन होने पर.

  • प्रतिकूल सुरक्षा रिपोर्ट (Adverse Security Report) के आधार पर.

इमरान खान की याचिका में कहा गया है कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी आधार उनके मामले में स्पष्ट नहीं किए गए हैं.

OCI कार्ड और भारत में रहने के अधिकार पर क्या दलील है?

इमरान खान ने अदालत को बताया है कि वह 15 दिसंबर 2006 से Overseas Citizen of India (OCI) के रूप में पंजीकृत हैं. उन्होंने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7A(1) के तहत मिले अपने दर्जे का हवाला दिया है.

उनकी याचिका के अनुसार, नागरिकता अधिनियम की धारा 7A से 7D तक OCI से जुड़े अधिकारों और प्रक्रियाओं के लिए एक अलग कानूनी व्यवस्था निर्धारित करती हैं.

याचिका में कहा गया है कि धारा 7B(1) OCI कार्डधारकों को भारत में आजीवन निवास का अधिकार देती है, जबकि धारा 7D में OCI दर्जा रद्द करने के आधार स्पष्ट रूप से बताए गए हैं. इस प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना जरूरी है.

इमरान खान की दलील है कि OCI दर्जा रद्द करने से जुड़ी विशेष प्रक्रिया अपनाने के बजाय सामान्य विदेशी नागरिक कानून के तहत उन्हें देश छोड़ने का नोटिस जारी करना अधिकार क्षेत्र से बाहर और शुरुआत से ही अमान्य है.

उनकी याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर सरकार धारा 11 के तहत किसी प्रतिबंधित स्थान पर जाने का आरोप लगाती है, तो नाना चौक को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने वाली कोई राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) मौजूद नहीं है.

इसके अलावा, खान ने दावा किया है कि गृह मंत्रालय की हालिया अधिसूचना में OCI कार्डधारकों के लिए विशेष अनुमति की जरूरत कुछ गतिविधियों, जैसे शोध और पत्रकारिता, के लिए बताई गई है, न कि सार्वजनिक स्थान पर मौजूद रहने के लिए.

संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होने का दावा

इमरान खान ने अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का हवाला दिया है.

अनुच्छेद 14 भारत में प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है.

खान का कहना है कि Leave India Notice एक सामान्य, तय प्रारूप में जारी किया गया आदेश है, जिसमें उनके मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार नहीं किया गया. उनके मुताबिक, यह आदेश मनमाना है और आनुपातिकता के सिद्धांत (Principle of Proportionality) की कसौटी पर खरा नहीं उतरता.

उन्होंने E.P. Royappa बनाम तमिलनाडु राज्य (1974) और Ajay Hasia बनाम Khalid Mujib Sehravardi (1981) जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा है कि राज्य की मनमानी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है.

इमरान खान ने Mohinder Singh Gill बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त (1978) के फैसले का भी उल्लेख किया है. उनकी दलील है कि किसी प्रशासनिक आदेश की वैधता उसमें दर्ज कारणों के आधार पर तय होनी चाहिए. बाद में नए कारण जोड़कर उस आदेश को सही नहीं ठहराया जा सकता.

याचिका के अनुसार, Leave India Notice में कानून का गलत उल्लेख किया गया है और उनके OCI दर्जे पर भी विचार नहीं किया गया.

राजनीतिक दबाव में जल्दबाजी का आरोप

इमरान खान ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एक राजनीतिक नेता की ओर से मांग उठाए जाने के बाद महज 4-5 दिनों के भीतर यह नोटिस जारी कर दिया गया.

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित राजनीतिक नेता ने नोटिस और पासपोर्ट से जुड़ी बिना छिपाई गई निजी जानकारियां सार्वजनिक कर दीं. खान ने इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए अदालत से नोटिस रद्द करने और भारत से बाहर भेजे जाने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है.

उन्होंने इसके लिए Writ of Certiorari का सहारा लिया है. यह एक कानूनी उपाय है, जिसके जरिए उच्च न्यायालय किसी प्रशासनिक निकाय या निचली अदालत के फैसले की समीक्षा कर सकता है.

हालांकि, ये सभी दलीलें इमरान खान की याचिका का हिस्सा हैं. इन पर अंतिम न्यायिक फैसला अभी आना बाकी है.

पहले भी ऐसे मामलों में अदालतों ने क्या कहा?

भारत में विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों से जुड़े कुछ मामलों में अदालतें पहले भी हस्तक्षेप कर चुकी हैं.

पोलिश छात्र कामिल सिडचिंस्की का मामला: वर्ष 2020 में जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता में पढ़ रहे पोलिश छात्र कामिल सिडचिंस्की को FRRO ने Leave India Notice जारी किया था. सरकार ने आरोप लगाया था कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में आयोजित राजनीतिक रैली में शामिल होकर सरकार विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया.

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नोटिस रद्द करते हुए कहा था कि किसी शांतिपूर्ण राजनीतिक रैली में केवल मौजूद रहने या निष्क्रिय रूप से हिस्सा लेने को किसी विदेशी नागरिक को देश से बाहर भेजने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता. अदालत ने यह भी कहा था कि यदि सरकार के पास प्रतिकूल सुरक्षा रिपोर्ट नहीं है, तो केवल ऐसे आधार पर देश छोड़ने का आदेश मनमाना हो सकता है.

अशोक स्वैन का मामला: मार्च 2025 में स्वीडन में रहने वाले शिक्षाविद अशोक स्वैन का OCI कार्ड कथित तौर पर सरकार की नीतियों की ऑनलाइन आलोचना करने और कथित राष्ट्रविरोधी टिप्पणियों के आधार पर रद्द कर दिया गया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए रद्दीकरण आदेश निरस्त कर दिया कि सरकार पर्याप्त और विशिष्ट कारण या ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी.

अमेरिकी पत्रकार राफेल सैटर का मामला: अमेरिकी साइबर सुरक्षा पत्रकार राफेल सैटर ने भी अपना OCI कार्ड रद्द किए जाने को चुनौती दी थी. सरकार ने उन पर भारतीय संस्थानों के खिलाफ नकारात्मक राय बनाने का आरोप लगाया था. इस मामले में हाई कोर्ट ने उन्हें राहत नहीं दी. हालांकि, बाद की सुनवाई में अदालत ने सरकार की ओर से पेश दस्तावेजों और पत्रकारिता गतिविधियों से जुड़े आरोपों की अस्पष्टता पर सवाल उठाए. मामला अभी न्यायिक विचाराधीन है.

अब हाई कोर्ट के सामने क्या सवाल हैं?

इमरान खान की याचिका में मुख्य सवाल यह है कि क्या किसी विदेशी नागरिक, विशेषकर OCI कार्डधारक, को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद बिना स्पष्ट कारण और सुनवाई का अवसर दिए भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया जा सकता है.

बॉम्बे हाई कोर्ट में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में नोटिस जारी करने की कानूनी प्रक्रिया, OCI दर्जे से जुड़े अधिकार और सरकार की कार्रवाई के आधारों पर बहस होने की उम्मीद है.

ये भी पढ़ें- आमिर खान के भांजे को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस….

मामले का बड़ा सवाल यही है: क्या प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते समय सरकार को भी निष्पक्ष प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं करना चाहिए?

Last Updated on October 20, 2026 9:58 am

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *