Delhi Pollution News: दशहरा समारोह के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ गया और बुधवार को राजधानी का AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 244 पर पहुंच गया. यह पिछले 100 दिनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले 13 जुलाई को AQI 246 दर्ज किया गया था.
आधिकारिक आंकड़ों और विशेषज्ञों के मुताबिक, दशहरा समारोह के दौरान आतिशबाजी से निकला धुआं, मानसून के बाद मौसम में बदलाव, वाहनों से होने वाला प्रदूषण और खेतों में पराली जलाने की घटनाएं दिल्ली की हवा को और खराब कर रही हैं.
PM2.5 और PM10 का स्तर चिंताजनक
बुधवार को AQI में बढ़ोतरी के साथ रात के दौरान हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों यानी पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) का स्तर भी काफी बढ़ा. आनंद विहार में PM10 का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया. वहीं, पश्चिमी दिल्ली के पंजाबी बाग में PM2.5 का स्तर 305 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया.
20 और 21 अक्टूबर की दरमियानी रात तथा बुधवार सुबह दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषणकारी कणों की अधिक मात्रा दर्ज की गई.
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ओखला फेज-2: मंगलवार रात 10 बजे PM10 का स्तर 469 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा.
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आनंद विहार: रात 8 बजे PM10 का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंचा और पूरी रात 450 से ऊपर बना रहा.
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मंदिर मार्ग: बुधवार रात 2 बजे PM10 का स्तर 410 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया.
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पंजाबी बाग: मंगलवार रात 11 बजे PM2.5 का स्तर 305 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा.
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ओखला फेज-2: रात 10 बजे PM2.5 का स्तर 269 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया.
PM2.5 के लिए निर्धारित मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM10 के लिए 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. ये कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
दिल्ली का AQI मंगलवार को 179 था, जो बुधवार को बढ़कर 244 हो गया. वहीं, नोएडा में AQI 281 और गुरुग्राम में 220 दर्ज किया गया.
आतिशबाजी से कितना बढ़ता है प्रदूषण?
दिल्ली में किए गए अध्ययनों में त्योहारों के दौरान आतिशबाजी के बाद हवा में प्रदूषणकारी कणों की मात्रा में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं के 2024 के एक अध्ययन के मुताबिक, 2019 से 2021 के बीच दिवाली के दौरान PM2.5 में मापे गए तत्वों के कुल द्रव्यमान में आतिशबाजी की हिस्सेदारी 85 फीसदी से अधिक रही. इस आकलन में वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव से जुड़े अंतर को भी ध्यान में रखा गया था.
सर्दियां करीब आने के साथ दिल्ली की हवा मौसम संबंधी परिस्थितियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है. इस दौरान हवा की गति कम होने और वातावरण की निचली परत में बदलाव के कारण प्रदूषकों का फैलाव सीमित हो सकता है.
वायुमंडल की निचली परत, जिसे Atmospheric Boundary Layer कहा जाता है, सर्दियों में उथली हो जाती है. रात के समय तापमान में उलटाव यानी Temperature Inversion भी प्रदूषित हवा को ऊपर उठने और फैलने से रोक सकता है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, हवा की औसत गति 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम होना प्रदूषकों के फैलाव के लिए प्रतिकूल है.
Atmospheric Environment जर्नल में प्रकाशित 2026 के एक अध्ययन में दिल्ली की अक्टूबर 2023 से फरवरी 2024 तक की स्थिति का विश्लेषण किया गया. इसमें Physical Research Laboratory, Space Applications Centre और National Centre for Medium Range Weather Forecasting से जुड़े शोधकर्ता शामिल थे. अध्ययन के अनुसार, नवंबर से जनवरी के बीच वायुमंडल की निचली परत की ऊंचाई एक किलोमीटर से कम रही. इस दौरान PM2.5 का अधिक स्तर कम ऊंचाई वाली वायुमंडलीय परत से जुड़ा पाया गया.
पराली जलाने से भी बढ़ सकता है प्रदूषण
धान की कटाई के मौसम में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं. इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आग कितनी जगह लगी है और हवा धुएं को किस दिशा में ले जा रही है.
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के Decision Support System के विश्लेषण के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी लगभग 4 फीसदी थी. इसके मुकाबले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी करीब 21 फीसदी रही, जो प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत था.
अनुमान है कि शुक्रवार तक पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी बढ़कर 15 फीसदी हो सकती है.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के सैटेलाइट निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, 21 अक्टूबर को सात राज्यों और क्षेत्रों में पराली जलाने की 85 घटनाएं दर्ज की गईं.
15 सितंबर से 21 अक्टूबर के बीच उत्तरी क्षेत्र में सैटेलाइट के जरिए आग लगने की कुल 1,350 घटनाओं का पता चला. इनमें पंजाब में 454, मध्य प्रदेश में 393, राजस्थान में 229, उत्तर प्रदेश में 190, उत्तराखंड में 72, हरियाणा में 11 और दिल्ली में एक घटना दर्ज की गई.
थिंक टैंक Envirocatalysts के प्रमुख प्रदूषण विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा कि उत्तर-पश्चिम दिशा से हवा की गति 4 से 5 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम है. ऐसे में पराली का धुआं दिल्ली तक पहुंच सकता है.
दहिया के मुताबिक, मंगलवार रात से आतिशबाजी के समय के साथ हवा में धुएं की मात्रा बढ़ने के स्पष्ट संकेत मिले हैं. इन दोनों कारणों ने दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान दिया है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण का यह शुरुआती दौर है. आतिशबाजी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले धुएं के अलावा परिवहन, बिजली उत्पादन, उद्योगों और दिल्ली के भीतर प्रदूषण फैलाने वाले अन्य स्रोतों का संयुक्त असर भी हवा की गुणवत्ता खराब कर रहा है.
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सवाल यह है कि जब सर्दियों का प्रदूषण सीजन अभी शुरू ही हुआ है, तो दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन कितनी जल्दी और प्रभावी कदम उठाएगा.
Last Updated on October 22, 2026 8:13 am
