Pilibhit Voter List में 13,150 नाम बदले? चुनाव आयोग पर उठे सवाल

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. पार्टी का दावा है कि 13,150 वोटरों के EPIC नंबर समान हैं, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल गया. यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गड़बड़ी मिलने की बात कही है. दो कर्मचारियों को हटाकर जांच के आदेश दिए गए हैं.

EPIC नंबर वही, पिता का नाम बदला? पीलीभीत वोटर लिस्ट की जांच शुरू
EPIC नंबर वही, पिता का नाम बदला? पीलीभीत वोटर लिस्ट की जांच शुरू
Pilibhit Voter List Controversy: पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पार्टी का दावा है कि 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर समान हैं, लेकिन उनके नाम और पिता के नाम बदल गए हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी गड़बड़ी मिलने की बात कही है और दो कर्मचारियों को हटाकर जांच के आदेश दिए हैं.

साइबर कैफे से शुरू हुई जांच

कांग्रेस के निवर्तमान महासचिव कुमुद गंगवार के मुताबिक, मामले का खुलासा 13 अक्टूबर को पीलीभीत के एक साइबर कैफे में हुआ. एक व्यक्ति अपना वोटर आईडी कार्ड निकलवाने पहुंचा, लेकिन EPIC नंबर सही होने के बावजूद कार्ड पर उसका और उसके पिता का नाम गलत दिखाई दिया.

गंगवार के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उसी EPIC नंबर पर नाम सही दर्ज था. इसके बाद कांग्रेस से जुड़े लोगों ने दूसरे मतदाताओं के रिकॉर्ड जांचे और ऐसी ही विसंगतियां मिलने का दावा किया.

55 लोगों ने 96 घंटे में जांचे 3.48 लाख रिकॉर्ड

कुमुद गंगवार के मुताबिक, 55 लोगों की टीम ने लगातार 96 घंटे काम कर पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के सभी 419 बूथों पर दर्ज 3,48,937 मतदाताओं के EPIC नंबर जांचे.

कांग्रेस का दावा है कि जांच में कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी विसंगतियां मिलीं. इनमें:

  • 13,150 मतदाताओं के नाम और पिता के नाम में बदलाव का आरोप.
  • 804 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का दावा.
  • करीब 2,600 नए नाम जोड़े जाने की बात.

पार्टी का कहना है कि कुछ रिकॉर्ड में 2 सितंबर 2026 को रात 9:26 बजे बदलाव दर्ज होने का विवरण मिला. गंगवार ने सवाल उठाया कि मतदाताओं की जानकारी और सहमति के बिना ये बदलाव कैसे हुए.

मोबाइल नंबर और OTP पर भी सवाल

गंगवार ने दावा किया कि कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड से जुड़े मोबाइल नंबरों के अंतिम चार अंक भी बदल गए. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विवरण बदलने के लिए OTP जरूरी था, तो संबंधित मतदाताओं को संदेश क्यों नहीं मिला.

हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि रिकॉर्ड में बदलाव किस खाते, लॉगिन या प्रक्रिया के जरिए किए गए. इस मामले में चुनाव आयोग का आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं है.

भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की कथित प्रक्रिया से भाजपा को चुनावी लाभ पहुंच सकता है. गंगवार ने दावा किया कि हटाए गए 804 मतदाता एक खास समुदाय से हैं, जबकि जोड़े गए नाम भाजपा समर्थकों के हैं.

उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 2,600 नए नामों में से 500 की जांच करने पर संबंधित लोग बताए गए गांवों में नहीं मिले. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती. भाजपा या संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है.

चुनाव आयोग से रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

कुमुद गंगवार ने चुनाव आयोग से उन आवेदनों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की, जिनके आधार पर कथित तौर पर नाम बदले गए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में शिकायत दर्ज कराएगी और जरूरत पड़ने पर सत्र न्यायालय तथा हाईकोर्ट का रुख करेगी.

कांग्रेस के मुताबिक, पार्टी अन्य विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी जांच कर रही है.

दो कर्मचारियों को हटाया गया, जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 21 अक्टूबर की देर रात बताया कि पीलीभीत विधानसभा की मतदाता सूची में गड़बड़ी मिली है. इसके बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची से जुड़े काम से हटा दिया गया. दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की बात भी कही गई है.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, प्रदेश के सभी जिलों में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट मांगी गई है.

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अब सबसे अहम सवाल यह है कि मतदाता सूची में कथित बदलाव कैसे हुए, किसकी जिम्मेदारी थी और जांच में क्या सामने आता है. कांग्रेस के आरोपों और प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई के बाद निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड की पारदर्शिता इस पूरे मामले के केंद्र में हैं.

Last Updated on October 22, 2026 8:38 am

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