साइबर कैफे से शुरू हुई जांच
कांग्रेस के निवर्तमान महासचिव कुमुद गंगवार के मुताबिक, मामले का खुलासा 13 अक्टूबर को पीलीभीत के एक साइबर कैफे में हुआ. एक व्यक्ति अपना वोटर आईडी कार्ड निकलवाने पहुंचा, लेकिन EPIC नंबर सही होने के बावजूद कार्ड पर उसका और उसके पिता का नाम गलत दिखाई दिया.
गंगवार के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उसी EPIC नंबर पर नाम सही दर्ज था. इसके बाद कांग्रेस से जुड़े लोगों ने दूसरे मतदाताओं के रिकॉर्ड जांचे और ऐसी ही विसंगतियां मिलने का दावा किया.
55 लोगों ने 96 घंटे में जांचे 3.48 लाख रिकॉर्ड
कुमुद गंगवार के मुताबिक, 55 लोगों की टीम ने लगातार 96 घंटे काम कर पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के सभी 419 बूथों पर दर्ज 3,48,937 मतदाताओं के EPIC नंबर जांचे.
कांग्रेस का दावा है कि जांच में कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी विसंगतियां मिलीं. इनमें:
- 13,150 मतदाताओं के नाम और पिता के नाम में बदलाव का आरोप.
- 804 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का दावा.
- करीब 2,600 नए नाम जोड़े जाने की बात.
पार्टी का कहना है कि कुछ रिकॉर्ड में 2 सितंबर 2026 को रात 9:26 बजे बदलाव दर्ज होने का विवरण मिला. गंगवार ने सवाल उठाया कि मतदाताओं की जानकारी और सहमति के बिना ये बदलाव कैसे हुए.
कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश (प्रेस विज्ञप्ति) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 127-पीलीभीत की मतदाता सूची में पाई गयी त्रुटियों पर कड़ा रूख त्रुटियों के लिए जिम्मेवार अधिकारी एवं कर्मचारी के विरूद्ध विधिक कार्रवाई के निर्देश संबंधित को तत्काल मतदाता सूची के कार्य से हटाये जाने के निर्देश लखनऊ, 21 अक्टूबर, 2026। 127-पीलीभीत विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं के नाम के इपिक नम्बर पर किसी अन्य मतदाता का विवरण प्रदर्शित होने संबंधी शिकायत का त्वरित संज्ञान लेते हुए आज प्रकरण की जांच जिला निर्वाचन अधिकारी, पीलीभीत से करायी गयी। जिला निर्वाचन अधिकारी से प्राप्त आख्या के अनुसार विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 127-पीलीभीत की मतदाता सूची में जांचोंपरांत कतिपय मतदाताओं के इपिक नम्बर को ऑनलाइन सर्च करने पर किसी अन्य मतदाता का विवरण प्रदर्शित होता पाया गया। इस प्रकार की त्रुटियों को तत्काल ठीक करने एवं विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 127-पीलीभीत के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची के कार्य से तत्काल हटाये जाने तथा उनके विरूद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत विधिक कार्रवाई किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। इसके साथ ही इस विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के उत्तरदायित्व के संबंध में स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये गये हैं। जनपद पीलीभीत के समस्त विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की इस बिन्दु पर गहनता से जांच कर विस्तृत आख्या दो दिवस में प्रस्तुत करने के निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारी, पीलीभीत को दिये गये हैं। उत्तर प्रदेश के समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों को इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए अपने जनपद के समस्त विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की इस बिन्दु पर गहनता से जांच कर दो दिवस में आख्या उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दे दिये गये हैं। @ECISVEEP @PTI_News @ANI @ians_india @DDNewslive @aajtak @bharat_samachar @abplive @ndtvindia @news24tvchannel @CNNnews18 @republic
— CEO Uttar Pradesh (@ceoup) October 21, 2026
मोबाइल नंबर और OTP पर भी सवाल
गंगवार ने दावा किया कि कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड से जुड़े मोबाइल नंबरों के अंतिम चार अंक भी बदल गए. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विवरण बदलने के लिए OTP जरूरी था, तो संबंधित मतदाताओं को संदेश क्यों नहीं मिला.
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि रिकॉर्ड में बदलाव किस खाते, लॉगिन या प्रक्रिया के जरिए किए गए. इस मामले में चुनाव आयोग का आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं है.
भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की कथित प्रक्रिया से भाजपा को चुनावी लाभ पहुंच सकता है. गंगवार ने दावा किया कि हटाए गए 804 मतदाता एक खास समुदाय से हैं, जबकि जोड़े गए नाम भाजपा समर्थकों के हैं.
उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 2,600 नए नामों में से 500 की जांच करने पर संबंधित लोग बताए गए गांवों में नहीं मिले. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती. भाजपा या संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है.
खबर आई कि उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से 2 करोड़ 4 लाख वोटर काट दिए गए। एक डेटा देखिए 👇 ⦿ 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में 15 करोड़ 41 लाख वोटर थे ⦿ यूपी में हर साल करीब 42 लाख वोटरों का नेट एडीशन होता है ⦿ ऐसे में 2024-26 के बीच 1 करोड़ 26 लाख वोटर जुड़ने चाहिए थे, लेकिन 2 करोड़ 4 लाख वोटर डिलीट कर दिए गए मतलब साफ है कि यूपी में 3 करोड़ 30 लाख वोटर डिलीट हुए हैं। चुनाव आयोग को जवाब देना होगा कि ये किसके इशारे पर किया जा रहा है, क्यों किया जा रहा है। : AICC सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन @SupriyaShrinate जी 📍उत्तर प्रदेश
— Congress (@INCIndia) October 21, 2026
चुनाव आयोग से रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
कुमुद गंगवार ने चुनाव आयोग से उन आवेदनों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की, जिनके आधार पर कथित तौर पर नाम बदले गए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में शिकायत दर्ज कराएगी और जरूरत पड़ने पर सत्र न्यायालय तथा हाईकोर्ट का रुख करेगी.
कांग्रेस के मुताबिक, पार्टी अन्य विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी जांच कर रही है.
उत्तर प्रदेश – चुनाव आयोग को पालीभीत जिले की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी मिली है !! पीलीभीत जिले के 2 कर्मचारी हटाए गए, मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है। UP के सभी जिलों में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच करने का आदेश दिया गया। 2 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। कांग्रेस और सपा का आरोप था कि पीलीभीत सदर विधानसभा सीट पर 13150 मतदाताओं का एपिक और सीरियल नंबर एक जैसा है, जो संभव नहीं है। शिकायत पर प्राथमिक जांच के बाद चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई की है। इसी पीलीभीत से BJP प्रत्याशी सिर्फ 6 हजार वोटों से जीता है।
— Sachin Gupta (@Sachingupta) October 21, 2026
दो कर्मचारियों को हटाया गया, जांच के आदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 21 अक्टूबर की देर रात बताया कि पीलीभीत विधानसभा की मतदाता सूची में गड़बड़ी मिली है. इसके बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची से जुड़े काम से हटा दिया गया. दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की बात भी कही गई है.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, प्रदेश के सभी जिलों में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट मांगी गई है.
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अब सबसे अहम सवाल यह है कि मतदाता सूची में कथित बदलाव कैसे हुए, किसकी जिम्मेदारी थी और जांच में क्या सामने आता है. कांग्रेस के आरोपों और प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई के बाद निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड की पारदर्शिता इस पूरे मामले के केंद्र में हैं.
Last Updated on October 22, 2026 8:38 am
