पेरिस समेत कई शहरों में आंशिक कर्फ्यू
फ्रांस सरकार ने सोमवार और मंगलवार की रात उत्तरी फ्रांस के चार शहरों में रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक आंशिक कर्फ्यू लगाने की घोषणा की. इनमें लिले भी शामिल है. पेरिस में पुलिस ने सोमवार रात 11 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे तक दो इलाकों – प्लास द ला रिपब्लिक और लेस आल के आसपास कर्फ्यू लागू किया.
प्लास द ला रिपब्लिक में शनिवार को हिंसा हुई थी, जबकि लेस आल इलाके में दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं. पुलिस के आदेश के मुताबिक, इन क्षेत्रों में लोगों के इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गई. निर्धारित इलाकों में प्रवेश करने या वहां मौजूद रहने की भी अनुमति नहीं थी.
फ्रांस के दूसरे सबसे बड़े शहर मार्सेई ने भी सोमवार को सभी सभाओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया. इस बीच, फ्रांसीसी ट्रेड यूनियनों ने 5 नवंबर को हड़ताल और रैलियों के एक नए दौर का आह्वान किया है.
प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने कहा कि जरूरत पड़ने पर देश में आपातकाल भी घोषित किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल स्थानीय और आंशिक कर्फ्यू अधिक उपयुक्त कदम हैं. उन्होंने कहा कि पूरे शहरों में पूर्ण कर्फ्यू लगाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है.
Protests in France have turned completely violent over the cost of living 🤯 https://t.co/V7tbV2vQTU
— Daily Loud (@DailyLoud) October 17, 2026
पुलिस ने क्यों माना कि हालात नियंत्रण से बाहर हुए?
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने सोमवार को स्वीकार किया कि शनिवार के प्रदर्शनों की तैयारी में पर्याप्त अनुमान और योजना की कमी रही. उन्होंने माना कि कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों, उपद्रवियों और लुटेरों से निपटने के लिए पुलिस बल पर्याप्त नहीं था.
नुनेज के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों के अनुमान में देशभर में करीब 2 लाख प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी. लेकिन वास्तविक संख्या 5 लाख से अधिक रही. कई जगह शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा में बदल गए और हाल के वर्षों में फ्रांस में अशांति के सबसे गंभीर दिनों में से एक देखने को मिला.
गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंप दिया था, क्योंकि उन्हें लगा कि जो कुछ हुआ, उसकी जिम्मेदारी उनकी है. हालांकि, मैक्रों ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. इसके बजाय उन्होंने नुनेज को सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया आकलन में हुई चूकों की पारदर्शी समीक्षा करने और नए तरीकों से हालात संभालने के निर्देश दिए.
मैक्रों के कार्यालय ने कहा कि गृह मंत्री को सुरक्षा बलों के लिए नए परिचालन तरीकों को जल्द लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है, ताकि भविष्य में हिंसक भीड़ और लूटपाट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके.
2,000 दुकानों में लूटपाट, सार्वजनिक इमारतों पर हमले
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, हिंसा के दौरान एक टाउन हॉल समेत कई सार्वजनिक इमारतों पर हमले किए गए और उनमें आग लगाई गई. अनुमान है कि करीब 2,000 दुकानों को निशाना बनाया गया, जहां तोड़फोड़ और लूटपाट हुई.
गृह मंत्री ने बताया कि देशभर में 60,000 पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था. इसके बावजूद पेरिस, मार्सेई और लियोन जैसे बड़े शहरों में संगठित हिंसक समूहों को नियंत्रित करना मुश्किल रहा.
उन्होंने फ्रांसीसी रेडियो से बातचीत में कहा कि सैकड़ों दुकानों में लूटपाट के बाद यह कहना संभव नहीं था कि पुलिस ने हालात पर नियंत्रण बनाए रखा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा के लिए उपद्रवियों, लुटेरों और अति-वामपंथी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
न्याय मंत्री जेराल्ड दारमानिन ने भी खुफिया तंत्र की विफलताओं पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि प्रभावी पुलिस व्यवस्था के लिए मजबूत खुफिया जानकारी जरूरी है. उनके मुताबिक, गिरफ्तार किए गए कई लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था और करीब 80 प्रतिशत गिरफ्तार लोगों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की जा रही थी.
दारमानिन ने बताया कि सप्ताहांत में हिंसा शुरू होने के बाद से 2,513 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 67 लोगों को जेल भेजा गया. गिरफ्तार लोगों में करीब 70 प्रतिशत वयस्क थे. अब तक ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है, जिससे पता चले कि गिरफ्तार किए गए लोग किसी राजनीतिक आंदोलन से जुड़े थे.
Diese Studenten der Pariser Elite-Ingenieurhochschule École Polytechnique protestieren friedlich gegen Lehrermangel und marode Schulen. Die affenartigen Laute, die sie zu affenartigen Bewegungen ausstoßen, sollen auf die Missstände im französischen Bildungssystem hinweisen. 🤡 https://t.co/66Pa7mq9EZ
— ColdJack (@TheColdJack) October 17, 2026
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चोरी के सामान की बिक्री रोकने की मांग
फ्रांस की डिजिटल मामलों की मंत्री ऐन ले हेनान्फ ने ऑनलाइन रीसेल प्लेटफॉर्म से चोरी के सामान की बिक्री से जुड़ी लिस्टिंग हटाने की अपील की है. उन्होंने Vinted और eBay जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया.
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, Amazon, Leboncoin, Meta और TikTok के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया. सरकार का उद्देश्य हिंसा के दौरान लूटे गए सामान की ऑनलाइन बिक्री को रोकना है.
लूव्र संग्रहालय के बाहर भी प्रदर्शन
रविवार को हिंसा और लूटपाट की घटनाएं जारी रहीं. पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने सोमवार को कहा कि रविवार को राजधानी में करीब 30 दुकानों को निशाना बनाया गया और रातभर में 350 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया.
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इस सप्ताहांत राज्य अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा. उनके मुताबिक, सामाजिक आंदोलन लगातार फैल रहा है और फिलहाल उससे निकलने का कोई रचनात्मक राजनीतिक रास्ता नजर नहीं आ रहा, इसलिए विरोध प्रदर्शन जारी रह सकते हैं.
मार्सेई के मेयर बेनोआ पायन ने स्थिति को लगभग विद्रोह जैसी बताते हुए कहा कि हिंसा ने न केवल लोकतंत्र, बल्कि फ्रांसीसी गणराज्य की बुनियाद को भी कमजोर किया है. उन्होंने सरकार की ओर से अति-वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश को राजनीतिक चालबाजी बताया.
सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने पेरिस के लूव्र संग्रहालय के प्रवेश द्वारों को रोक दिया. वे देशव्यापी हाई स्कूल छात्र आंदोलन के समर्थन और पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. इसके कारण संग्रहालय निर्धारित समय पर नहीं खुल सका.
संग्रहालय के बाहर लगाए गए एक पर्चे पर लिखा था, “हमें गर्व है कि हम दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालय को बंद कर रहे हैं.”
महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत भी विरोध की वजह
रविवार को टेलीविजन पर दिए गए संबोधन में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की आलोचना की. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्थानीय प्रशासन कुछ प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा सकता है. हालांकि, उन्होंने आपातकाल या व्यापक कर्फ्यू जैसे कठोर कदमों की घोषणा नहीं की.
शनिवार के प्रदर्शनों में छात्र, शिक्षक, अभिभावक, ट्रेड यूनियन और कर्मचारी शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख चिंताओं में जीवनयापन की बढ़ती लागत और महंगाई शामिल हैं. इसी मुद्दे पर सप्ताहांत में इटली, बेल्जियम और अल्बानिया समेत कई यूरोपीय देशों में भी प्रदर्शन हुए.
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फ्रांस में जारी हिंसा ने सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है – एक ओर सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करना और दूसरी ओर उन सामाजिक-आर्थिक शिकायतों का समाधान करना, जिनके कारण लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. सवाल यह है कि क्या कर्फ्यू और पुलिस कार्रवाई से हालात शांत होंगे, या महंगाई और जीवनयापन की लागत से जुड़ी नाराजगी आंदोलन को और व्यापक बनाएगी.
Last Updated on October 21, 2026 8:41 am
