‘राजनीतिक फायदे के लिए फ्रांस का इस्तेमाल’
कतर की राजधानी दोहा के दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मैक्रों ने कहा कि शनिवार को हुए दंगों के बाद कई विदेशी नेताओं की टिप्पणियां अस्वीकार्य और बेवकूफी भरी थीं. हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया. जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा ट्रंप की ओर है, तो मैक्रों ने जवाब दिया, “दूसरों के साथ-साथ उनकी ओर भी.”
मैक्रों के मुताबिक, कुछ नेता चुनावी अभियानों के बीच फ्रांस की स्थिति को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है और उसे दूसरे देशों के नेताओं की ऐसी टिप्पणियों की जरूरत नहीं है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में हिंसा के लिए प्रवासियों, जिहादियों और कम्युनिस्टों को जिम्मेदार ठहराया है. वह अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले अपनी रिपब्लिकन पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं.
AI से बनी तस्वीरों पर भी उठाए सवाल
मैक्रों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई ऐसी तस्वीरें भी प्रसारित की जा रही हैं, जिनमें फ्रांस में हुई ऐसी घटनाएं दिखाई गई हैं, जो वास्तव में हुई ही नहीं.
उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया कि फ्रांस पर प्रवासियों और इस्लामवादियों की बड़ी संख्या ने हमला कर दिया है. मैक्रों ने इन्हें पूरी तरह झूठा बताया.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी फ्रांस में “चरमपंथी इस्लाम के आक्रमण” की बात कही है. वहीं, विश्लेषकों ने उन दावों को खारिज किया है कि फ्रांस के प्रदर्शनों के पीछे प्रवासी ही मुख्य कारण हैं.
महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन कैसे हिंसा में बदले?
फ्रांस में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन तेजी से हिंसक हो गए. शनिवार को पेरिस, मार्सेई, लियोन और लिमोज जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और लूटपाट हुई. लिमोज में टाउन हॉल में आग लगा दी गई, जिससे इमारत का एक हिस्सा नष्ट हो गया.
फ्रांस सरकार ने स्वीकार किया है कि शनिवार को बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के दौरान उसने हालात पर नियंत्रण खो दिया था. यह संकट ऐसे समय में गहरा रहा है, जब राष्ट्रपति चुनाव में मैक्रों के उत्तराधिकारी का चुनाव होने में करीब छह महीने बाकी हैं.
पेरिस में प्रदर्शन पर पाबंदी, सुरक्षा बढ़ाई गई
आगे होने वाले प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए पेरिस के कुछ प्रमुख इलाकों में गुरुवार सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक रैलियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई. इसमें राष्ट्रपति भवन, संसद के दोनों सदन, लौवर संग्रहालय और शॉम्प्स-एलिजे जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं.
इसके अलावा बैस्टिल और रिपब्लिक स्क्वायर तथा शातले-ले-आल शॉपिंग क्षेत्र में भी प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी. सप्ताहांत में इन इलाकों को लूटपाट के दौरान निशाना बनाया गया था.
फ्रांस में जारी अशांति के कारण कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियां जारी की हैं. इसका असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है. बुधवार को फ्रांस के 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर 5% के पार पहुंच गई, जो 2002 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है.
शनिवार को फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी
मैक्रों ने पिछले सप्ताहांत जैसी हिंसा दोबारा न होने देने का संकल्प लिया है. लेकिन सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो रही है.
‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पेरिस के मध्य हिस्से में मार्च निकालने की योजना दर्ज कराई है. यह आंदोलन 2018 में बढ़ती जीवनयापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ देशव्यापी विरोध के लिए चर्चा में आया था.
छात्र संगठनों ने भी उसी दिन प्रदर्शन का आह्वान किया है. उनकी मांग है कि शिक्षा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाए.
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अब सवाल यह है कि क्या फ्रांस सरकार महंगाई, बेरोजगारी और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान कर पाएगी, या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सड़कों पर बढ़ता तनाव संकट को और गहरा देंगे.
Last Updated on October 22, 2026 8:59 am
