मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) ज़िले में सामने आए पानी दूषित होने के संकट के पीछे नागरिक ढांचे में भारी चूक सामने आई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन के ठीक ऊपर बिना अनिवार्य सेफ्टी टैंक के शौचालय का निर्माण किया गया था, जिसके चलते सीवेज सीधे पीने के पानी में मिल गया। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सात मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक तौर पर तीन मौतों को ही दर्ज किया है। संकट की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि 149 से अधिक लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से 36 मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि 116 से ज़्यादा लोगों का इलाज जारी है।
“सेफ्टी टैंक नहीं था, यही सबसे बड़ी चूक”
इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जांच के निष्कर्षों की पुष्टि करते हुए कहा,
“शौचालय निर्माण के मामले में हमने पाया है कि उसके नीचे कोई सेफ्टी टैंक नहीं बनाया गया था। अन्य लापरवाहियों की भी जांच की जा रही है।”
जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज था और उसी स्थान पर बने अवैध ढांचे ने हालात को और भयावह बना दिया, जिससे सीवेज सीधे पीने के पानी में मिल गया।
अधिकारियों पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। जल आपूर्ति के सहायक अभियंता (AE) को निलंबित कर दिया गया है, सब-इंजीनियर को कार्यमुक्त किया गया है और ज़ोनल अधिकारी को भी निलंबित किया गया है।
आयुक्त दिलीप कुमार ने कहा,
“ज़ोनल अधिकारी को इसलिए निलंबित किया गया है क्योंकि उन्हें समग्र समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए था।”
उन्होंने बताया कि वितरण लाइन को काटने वाले कई चैंबर भी मिले हैं, जिन्हें डायवर्ट किया जा रहा है। पानी के सैंपल की रिपोर्ट शाम तक आने की उम्मीद है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
परिवारों में मातम, पानी से डर
इस हादसे ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। स्थानीय लोग अब पानी पीने से भी डर रहे हैं। मृतकों के परिजन सवाल कर रहे हैं कि एक बुनियादी ज़रूरत इतनी बड़ी त्रासदी कैसे बन गई।
जितेंद्र प्रजापत ने अपनी 50 वर्षीय बहन सीमा प्रजापत की मौत को याद करते हुए कहा,
“मेरी बहन को अचानक उल्टी-दस्त शुरू हुए। हमें संभलने का मौका भी नहीं मिला। अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। एक पल वो घर में थी, अगले ही पल चली गई।”
एक अन्य पीड़िता मंजुलता थीं, जो खाना बना रही थीं तभी उन्हें पेट दर्द हुआ। कुछ ही देर में उल्टी और दस्त शुरू हो गए। परिवार उन्हें अस्पताल लेकर भागा, लेकिन कुछ घंटों में ही उनकी मौत हो गई। उनके पीछे पांच बेटियां और बुज़ुर्ग पति दिगंबर रह गए हैं।
दिगंबर आज भी सदमे में हैं।
उन्होंने कहा,
“कई दिनों से पानी गंदा आ रहा था। हमने शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर समय पर कार्रवाई होती, तो शायद आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।”
इंदौर में फैली यह त्रासदी सिर्फ़ एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है—जहां लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
Last Updated on January 1, 2026 9:08 am
