आरोपी की पहचान 25 वर्षीय दीपक के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, उसने अपनी बेटी का गला दबाकर हत्या की और शव को घर के सेप्टिक टैंक में छिपा दिया। इसके बाद उसने ऐसा माहौल बनाया मानो बच्ची का अपहरण हो गया हो।
मामले की शुरुआत तब हुई जब दीपक ने पुलिस को सूचना दी कि उसकी 10 महीने की बेटी अचानक गायब हो गई है। उसने दावा किया कि वह दूध और बिस्कुट लेने घर से बाहर गया था और जब वापस लौटा तो बच्ची घर में नहीं थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और इलाके में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया गया।
CCTV जांच में खुली कहानी की परतें
पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान अधिकारियों को दीपक के बयान में कई विरोधाभास मिले। जिस समय और जिस तरीके से उसने कथित अपहरण की कहानी बताई थी, वैसा कोई दृश्य कैमरों में दिखाई नहीं दिया।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस का शक गहराता गया। लगातार पूछताछ और सख्ती के बाद आरोपी कथित तौर पर टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दीपक ने स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी और दूसरी बेटी की जिम्मेदारी ने उसे मानसिक दबाव में डाल दिया था। इसी कारण उसने बच्ची की हत्या कर दी।![]()
पत्नी और बड़ी बेटी को भी किया था अचेत
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपी ने अपनी पत्नी और बड़ी बेटी को नशीला पदार्थ देकर अचेत कर दिया था ताकि हत्या के दौरान कोई विरोध न हो सके।
इसके बाद उसने बच्ची का गला दबाया और शव को घर के सेप्टिक टैंक में छिपा दिया। बाद में वह सामान्य व्यवहार करता रहा और खुद ही बच्ची के लापता होने की सूचना पुलिस को दी।
फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में पुलिस ने सेप्टिक टैंक से बच्ची का शव बरामद किया। शव मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।![]()
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हत्या के आरोप में गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने आरोपी दीपक को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या परिवार का कोई अन्य सदस्य इस घटना के बारे में जानता था या फिर सबूत छिपाने में किसी ने मदद की थी।
फिलहाल आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है और पुलिस मामले से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है।
बेटियों के प्रति भेदभाव पर फिर उठे सवाल
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज में मौजूद गहरी पितृसत्तात्मक सोच और बेटियों के प्रति भेदभाव को भी उजागर करती है। आर्थिक तंगी और लड़की होने को “बोझ” मानने वाली मानसिकता ने एक मासूम की जान ले ली।
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला। कई लोगों ने इसे समाज में बेटियों के खिलाफ मौजूद मानसिकता की भयावह तस्वीर बताया। लोगों का कहना है कि आज भी देश के कई हिस्सों में बेटियों को बराबरी का दर्जा नहीं मिल पा रहा है और आर्थिक दबाव का सबसे बड़ा असर अक्सर लड़कियों पर ही पड़ता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बेटियों को बोझ समझने वाली सोच कब बदलेगी।
Last Updated on May 26, 2026 3:26 pm
