NEET Protest: क्या नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस को नहीं था भीड़ का अंदाजा?

NEET Paper Leak Protest: इस रिपोर्ट में समझने की कोशिश करते हैं कि आंदोलन कैसे बढ़ा, प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल था, पुलिस की तैयारी कैसी थी, पत्थरों से भार ट्रक कहां से आया?

NEET Protest: क्या नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस को नहीं था भीड़ का अंदाजा?
NEET Protest: क्या नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस को नहीं था भीड़ का अंदाजा?

NEET Paper Leak Protest: बीचे 15 वर्षों में देश की राजधानी दिल्ली में कई बड़े आंदोलन हुए हैं. जैसे- 2012 का निर्भया आंदोलन, 2021 की किसान ट्रैक्टर रैली. अब 20 जुलाई को हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के ‘संसद चलो’ मार्च ने भी सरकार और पुलिस की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कॉकरोच जनता पार्टी ने करीब तीन हफ्ते पहले ही संसद मार्च का ऐलान कर दिया था. पुलिस को उम्मीद थी कि 7 से 8 हजार लोग आएंगे. India Today की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को करीब एक लाख प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर कूच करने लगे. भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच झड़प में करीब 200 लोग घायल हुए, जिनमें प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों शामिल थे. आइए, इस रिपोर्ट में समझने की कोशिश करते हैं कि आंदोलन कैसे बढ़ा, प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल थे, पुलिस की तैयारी कैसी थी और प्रदर्शन स्थल पर पत्थरों से भरा ट्रक कहां से आया?

आंदोलन कैसे बढ़ा?

आंदोलन NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुआ था. बीते 28 जून से सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे गए. 18 जुलाई को पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, लेकिन इससे आंदोलन शांत नहीं हुआ, बल्कि और तेज हो गया. जंतर-मंतर पर लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई.

प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल थे?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन में छात्र, अभिभावक और नौकरीपेशा नौजवान शामिल हुए. इसके अलावा 12-18 वर्ष के युवा भी शामिल थे, जिन्होंने परिवार से बिना बताए प्रदर्शन में हिस्सा लिया. कई लोग दूसरे राज्यों से भी दिल्ली पहुंचे.

क्या सरकार और पुलिस की तैयारी कम पड़ गई?

मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र किया गया कि कॉकरोच पार्टी के ‘चलो संसद’ मार्च के मद्देनजर शुरुआत में तरकीबन 2,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. इंटरनेट बंद करने का आदेश भी पहले सिर्फ दोपहर तक था, लेकिन हालात बिगड़ने पर इसे शाम तक बढ़ाना पड़ा. भीड़ बढ़ने पर पांच मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हुई.

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पत्थरों से भरे ट्रक पर विवाद

प्रदर्शन स्थल (जंतर-मंतर) के पास पत्थरों से भरा एक ट्रक मिलने पर विवाद खड़ा हो गया. CJP ने आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को फंसाने के लिए किया जा सकता था. हालांकि, पुलिस ने इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया.

सरकार ने बातचीत शुरू की

हालात बिगड़ने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने CJP नेताओं से मुलाकात की. प्रदर्शनकारियों ने तीन मांगें रखीं.

1. सोनम वांगचुक की रिहाई

2. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

3. आत्महत्या करने वाले NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा

हालांकि, सरकार की ओर से इन मांगों को मानने का कोई आश्वासन नहीं दिया गया.

क्या प्रदर्शन में बाहरी लोग भी थे?

पुलिस का कहना है कि हिंसा में शामिल कुछ लोग छात्र नहीं थे. इस मामले में बाहरी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस CCTV, मोबाइल वीडियो और ड्रोन फुटेज की मदद से जांच कर रही है.

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पूरा मामला क्या बताता है?

पूरे घटनाक्रम से यही लगता है कि सरकार और दिल्ली पुलिस प्रदर्शन की गंभीरता और भीड़ का सही अनुमान नहीं लगा सकीं. समय रहते बातचीत ना होने और कमजोर तैयारियों की वजह से हालात बिगड़ गए और मामला हिंसक हो गया.

Last Updated on July 21, 2026 7:57 pm

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