जबलपुर, मध्य प्रदेश: गाय के गोबर की बनी टिक्की खाते हुए और मूत्र पीते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर देखे होंगे. लेकिन हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है. जिसमें दावा किया गया है कि पंचगव्य यानी के गाय के गोबर, गोमूत्र और दूध के मिश्रण से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज़ के नाम पर सरकार से ₹3.50 करोड़ का अनुदान लिया. लेकिन 23-24 बार गोवा जाने के बाद भी कुछ ठोस निकल नहीं सका. तो क्या गोबर और गोमूत्र के नाम पर सरकार को ही बेवकूफ़ बना दिया गया?
यह मामला हाल ही में प्रशासनिक जांच में सामने आया है। जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय को मिले ₹3.50 करोड़ सरकारी अनुदान के दुरुपयोग की जांच की जा रही है। 2011 में पंचगव्य योजना के तहत विश्वविद्यालय ने करीब ₹8.74 करोड़ की मांग की थी, जिसे सरकार ने ₹3.50 करोड़ तक सीमित किया।
इस राशि का उद्देश्य शोध, प्रशिक्षण और पंचगव्य के प्रचार-प्रसार जैसे कार्य थे, लेकिन अब यह परियोजना वित्तीय अनियमितताओं के चलते विवादों में घिर चुकी है।
₹3.5 crores was allotted by the govt to find cure to cancer using cow dung and urine at Nanaji Deshmukh Veterinary Science University. The officials spent ₹1.92 crores on cow dung, urine and other raw material. Rest was used for 23-24 Goa trips. pic.twitter.com/r0p12PbbK2
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) January 9, 2026
जांच में क्या सामने आया?
जबलपुर कलेक्टर को मिली शिकायत के बाद शुरू की गई जांच में यह तथ्य उजागर हुए हैं:
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₹1.92 करोड़ का खर्च गोबर, गौमूत्र, कच्चा मटेरियल, स्टोरेज बर्तन और मशीनरी जैसी वस्तुओं पर दिखाया गया, जबकि बाजार में इनका मूल्य लगभग ₹15-20 लाख ही होने का अनुमान है।
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विश्वविद्यालय कर्मचारियों द्वारा 23–24 हवाई यात्राएं की गईं, जिनका अनुसंधान के लिए औचित्य स्पष्ट नहीं पाया गया।
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लगभग ₹7.5 लाख की कार भी प्रोजेक्ट के नाम पर खरीदी गई, जबकि प्रोजेक्ट में इसका कोई प्रावधान नहीं था।
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वाहन के ईंधन एवं रखरखाव पर भी साढ़े ₹7 लाख से अधिक खर्च दर्ज किया गया।
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लगभग ₹3.5 लाख मजदूरी पर, और ₹15 लाख के फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान पर खर्च दिखाया गया, जिनका शोध के मूल उद्देश्यों से कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं है।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई आवश्यक दस्तावेज या तो नष्ट कर दिए गए या जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए।
शोध का कोई वैज्ञानिक परिणाम नहीं
इस प्रोजेक्ट के तहत भी गोबर-गौमूत्र से कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज को लेकर कोई भी वैज्ञानिक रूप से मान्य परिणाम सामने नहीं आया है, और न ही किसान प्रशिक्षण जैसे किसी उल्लेखनीय कार्यक्रम का कोई ठोस प्रमाण मिला है।
विश्वविद्यालय का दावा
जांच पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी खर्च सरकारी नियमों के तहत ऑडिट और प्रक्रिया का पालन करते हुए किए गए हैं और आवश्यक दस्तावेज भी जांच टीम को उपलब्ध कराए गए हैं।
अब विस्तृत जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
Last Updated on January 16, 2026 8:54 am
