– विश्व दीपक
Narwane Book Controversy: राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की स्पीच पर मचा हंगामा मुद्दा नहीं है.मुद्दा पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल नरवणे (General Naravane) की अप्रकाशित किताब भी नहीं है. मुद्दा है भारत की पॉलिटिकल लीडरशिप यानी मोदी सरकार की कायरता. उस स्थिति के बारे में सोचिए. जब चीनी सेना के टैंक आगे बढ़ रहे हों, भारतीय सैनिक उन्हें देख रहे हों लेकिन कुछ नहीं कर नहीं पा रहे हैं क्योंकि ऊपर से आदेश नहीं मिला है. एक-एक मिनट अहम है लेकिन आदेश का इंतज़ार हो रहा है.
31 अगस्त 2020 की रात लद्दाख में यही हुआ.
8.15 बजे जब हमारी सेना ने पहली बार चीनी सेना का मूवमेंट देखा तब से लेकर 10.30 बजे के बीच सेना ने कई बार कोशिश की लेकिन पॉलिटिकल लीडरशिप कोई फैसला नहीं कर सकी.
कड़ी निंदा करने के लिए मशहूर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब जवाब दिया रात 10.30 बजे तब तक 2 घंटे 15 मिनट बीत चुके थे.
अगर इस दौरान स्थिति बेकाबू हो जाती तब? जिम्मेदारी किसकी होती? जाहिर है पॉलिटिकल लीडरशिप, सेना के ऊपर ठीकरा फोड़ने का मन बना चुकी थी.
पीएम मोदी जी का यह कहना कि जो उचित लगे कीजिए उनकी महा कायरता का महा प्रमाण है. उन्होंने ऐसा क्यों कहा? उन्हें देश से ज्यादा चिंता अपनी कुर्सी की थी. उन्हें लगा कि एक मिस कैलकुलेशन उनकी कुर्सी छीन लेगा.
अगर गलती होती तो मोदी जी, राजनाथ सिंह की बलि लेते. अगर सेना अपनी मर्ज़ी से कोई फैसला करती तो राजनाथ सिंह, सेना प्रमुख या किसी अन्य अधिकारी की बलि लेते.
अगर यह देरी नहीं होती तो मेरा मानना है कि लद्दाख की स्थिति इतनी जटिल नहीं हुई होती.
चीन इतना अंदर तक नहीं घुस पाता. जटिलता का अंदाज़ा ऐसे लगा सकते हैं कि बातचीत अभी भी चल रही है. ट्रंप से दुलत्ती खाने के बाद भारत अब 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल करने की मांग भी नहीं करता.
कई बार दुश्मन आपके साहस और आपके जवाब की तीव्रता को परखता है. अगर उसे लग गया कि आप डर रहे हैं तो उसकी हिमाकत बढ़ जाती है.
अगर भारत की पॉलिटिकल लीडरशिप ने चीन को दो टूक कहा होता कि अगर युद्ध होना है तो हो जाए परमाणु बम हमारे पास भी है तो शायद चीन आगे बढ़ने से पहले सोचता. चीन को उल्टा मोदी जी में क्लीन चिट दे दी. कहा – कोई अंदर नहीं घुसा है.
2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक किया तब उसका श्रेय पीएम ने खुद लिया था. उन्होंने सीना ठोककर कहा था कि स्ट्राइक का फ़ैसला मेरा था.
सवाल है कि चीन के मामले में मोदी जी फैसला क्यों नहीं कर सके? उनकी हिम्मत क्यों जवाब दे गई? इसका एक ही जवाब है – कुर्सी जाने का भय. मिस कैलकुलेशन का डर.
11 जनवरी की पोस्ट में मैंने लिखा था कि भारत ने बिना स्वीकार किए लद्दाख पर चीन का कब्जा स्वीकार कर लिया है. तब भक्तों ने ट्रॉल किया था. आज वह प्रमाणित हो चुका है.
मोदी सरकार लद्दाख का सच छिपाना चाह रही थी. इसलिए जनरल नरवणे की किताब को प्रकाशित भी नहीं होने दिया गया. लेकिन अब वह सच बाहर आ चुका है. लद्दाख में भारत ने बिना स्वीकार किए, चीन का कब्जा स्वीकार कर लिया है.
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(लेखक लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे हैं. पूर्व में Aajtak, BBC, Zee जैसे कई बड़े संस्थानों में काम कर चुके हैं. उनके फेसबुक वॉल से.)
Last Updated on February 4, 2026 8:39 pm
