Mohammad Deepak Case: ‘आप मीडिया में छाने की कोशिश कर रहे हैं’—HC ने क्यों लगाई फटकार?

Mohammad Deepak Case: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को वायरल जिम मालिक ‘मोहम्मद’ दीपक उर्फ दीपक कुमार द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग पर सख्त सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी एफआईआर में आरोपी है, तो वह पुलिस सुरक्षा या अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकता।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दीपक कुमार ने गणतंत्र दिवस के मौके पर एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति को उसकी दुकान के नाम ‘बाबा’ को लेकर परेशान कर रहे दक्षिणपंथी समूहों का विरोध किया था। इस दौरान दीपक ने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था।

इसके बाद 31 जनवरी को कथित तौर पर 150-200 लोगों की भीड़ उनके जिम के बाहर जुटी, जहां भड़काऊ भाषण दिए गए और उन्हें व उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। घटना के बाद उनके जिम में ग्राहकों का आना बंद हो गया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ वकीलों और बॉलीवुड कलाकारों ने उन्हें आर्थिक मदद भी भेजी।

दीपक ने बाद में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने और जान का खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया।

अदालत की सख्त टिप्पणी

जस्टिस राकेश थपलियाल ने सुनवाई के दौरान कहा, “जो व्यक्ति खुद आरोपी है, वह अपनी जान की सुरक्षा कैसे मांग सकता है?” अदालत ने इसे “प्रेशर टैक्टिक्स” करार देते हुए चेतावनी दी कि याचिका खारिज कर भारी लागत लगाई जा सकती है। अदालत ने दीपक को प्रशासनिक प्रक्रिया पर भरोसा रखने की सलाह दी।

दीपक के वकील नवनीश नेगी ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल और उनके परिवार को लगातार जान का खतरा बना हुआ है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मामला जांच के अधीन है और उन्हें इंतजार करना चाहिए।

‘फर्जी एफआईआर’ का आरोप

कोटद्वार निवासी दीपक कुमार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज मामला “झूठा और दुर्भावनापूर्ण” है। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय प्रशासन ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जिन्होंने उन्हें धमकाया।

याचिका में कहा गया कि 75 वर्षीय वकील अहमद की दुकान ‘बाबा कटपीस एंड मैचिंग सेंटर’ को लेकर विवाद हुआ था, जिसके समर्थन में आने के बाद दीपक को निशाना बनाया गया। दीपक का आरोप है कि वीडियो को गलत तरीके से पेश कर उन्हें गैर-हिंदू बताकर सांप्रदायिक माहौल भड़काया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने उनके द्वारा नामित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की और “अज्ञात व्यक्तियों” के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया, जबकि उनके और विजय रावत के खिलाफ दंगा और आपराधिक धमकी का केस दर्ज कर लिया गया।

दीपक ने अदालत से मांग की कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए, आरोपियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की जाए और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने अपने परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा और पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच की भी मांग की।

‘पुलिस पर भरोसा रखें’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है और उस पर भरोसा किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि “आप इस मामले को संवेदनशील बनाने की कोशिश कर रहे हैं”, और इसे जांच एजेंसियों को हतोत्साहित करने की कोशिश बताया।

मंगलवार को इसी पीठ ने कोटद्वार पुलिस से मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी और दीपक को मिली आर्थिक मदद का ब्योरा भी तलब किया था। गुरुवार को उनके वकील ने बताया कि कुल 80,000 रुपये की मदद मिली थी, जिसे बाद में रोक दिया गया और सोशल मीडिया पर लोगों से पैसे न भेजने की अपील भी की गई।

कोर्ट का रुख

हाई कोर्ट ने कहा कि प्रशासन अपना काम करने में सक्षम है और एफआईआर के अनुसार दीपक एक “संदिग्ध आरोपी” हैं। जस्टिस राकेश थपलियाल ने कहा, “जो व्यक्ति खुद आरोपी है, वह अपनी जान की सुरक्षा कैसे मांग सकता है?”

उन्होंने दीपक को प्रशासनिक प्रक्रिया पर भरोसा रखने की सलाह दी और कहा, “यह दबाव बनाने की रणनीति है—मैं इसे भारी लागत के साथ खारिज कर सकता हूं। याचिका दाखिल करते समय यह ध्यान रखें कि आप कौन हैं और क्या मांग कर रहे हैं। एक संदिग्ध आरोपी पुलिस के खिलाफ विभागीय जांच या सुरक्षा नहीं मांग सकता।”

दीपक के वकील नवनीश नेगी ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल और उनके परिवार को लगातार जान का खतरा बना हुआ है। हालांकि, अदालत ने कहा कि मामला जांच के अधीन है और उन्हें इंतजार करना चाहिए।

जस्टिस थपलियाल ने कहा, “कुछ मामले ऐसे होते हैं जो समाज को प्रभावित करते हैं… पुलिस के पास सिर्फ एक ही एफआईआर नहीं है, वे बहुत व्यस्त हैं और कई मामलों की जांच कर रहे हैं,” यह बताते हुए कि पुलिस पहले से ही कई मामलों की जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दबाव में है।

अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग वाली याचिका, जांच को प्रभावित करने का एक तरीका है। “आप तो मीडिया में छाने की कोशिश कर रहे हैं। आपको तो डोनेशन भी मिल रहे हैं।”

Last Updated on March 20, 2026 9:54 am

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