1 मार्च 2024 तक केंद्र सरकार के सिविल विभागों में 39,23,212 मंजूर पद थे, लेकिन इनमें सिर्फ 30,99,556 कर्मचारी काम कर रहे थे. यानी 8,23,656 पद खाली पड़े थे.
आसान भाषा में समझें तो सरकार के मंजूर सिविल पदों में करीब 21 फीसदी पद खाली थे. यानी हर पांच मंजूर पदों में से एक से ज्यादा पद पर कोई कर्मचारी नहीं था.
यह जानकारी मध्य प्रदेश के नीमच के RTI एक्टिविस्ट चंद्र शेखर गौर की ओर से दायर RTI के जवाब में सामने आई है.
राष्ट्रपति सचिवालय से PMO तक खाली पद
कर्मचारियों की कमी सिर्फ बड़े मंत्रालयों तक सीमित नहीं है. सरकार के बेहद अहम दफ्तरों में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं.
राष्ट्रपति सचिवालय में 803 पद मंजूर थे, लेकिन 516 कर्मचारी ही काम कर रहे थे. यानी 287 पद खाली, जो कुल मंजूर पदों का 35.74 फीसदी है.
वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO में 441 मंजूर पदों के मुकाबले सिर्फ 315 कर्मचारी थे. यहां 126 पद खाली थे. यानी करीब 28.57 फीसदी पद खाली.
ये आंकड़े 19 अगस्त 2026 को Department of Expenditure की Pay Research Unit की ओर से दिए गए जवाब में सामने आए हैं. आंकड़े 1 मार्च 2024 की स्थिति बताते हैं.
सबसे ज्यादा कमी डिफेंस के सिविलियन सेटअप में
सबसे बड़ा आंकड़ा रक्षा मंत्रालय के सिविलियन सेटअप का है.
यहां 5,56,248 पद मंजूर थे, लेकिन सिर्फ 3,14,005 कर्मचारी काम कर रहे थे.
यानी 2,42,243 पद खाली थे. यह कुल मंजूर सिविलियन पदों का करीब 43.5 फीसदी है.
यहां यह साफ करना जरूरी है कि ये आंकड़े रक्षा मंत्रालय के सिविलियन कर्मचारियों के हैं. इन्हें सेना, नौसेना या वायुसेना में सैनिकों की कमी के आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
रेलवे में 2.40 लाख पद खाली
इसके बाद सबसे बड़ा आंकड़ा रेलवे का है.
रेलवे में 14,79,701 पद मंजूर थे, लेकिन सिर्फ 12,39,576 कर्मचारी काम कर रहे थे.
यानी 2,40,125 पद खाली थे.
RTI में सामने आई कुल 8.23 लाख से ज्यादा रिक्तियों में अकेले रेलवे की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी बैठती है.
डिफेंस के सिविलियन सेटअप और रेलवे को मिला दें तो दोनों जगह 4.82 लाख से ज्यादा पद खाली हैं.
गृह मंत्रालय में भी एक लाख से ज्यादा पद खाली
देश की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े गृह मंत्रालय में भी कर्मचारियों की कमी कम नहीं है.
यहां 11,18,233 पद मंजूर थे, जबकि 10,07,348 कर्मचारी काम कर रहे थे.
यानी 1,10,885 पद खाली थे.
डिफेंस के सिविलियन सेटअप, रेलवे और गृह मंत्रालय को जोड़ें तो इन तीनों जगहों पर करीब 5.93 लाख पद खाली थे.
यानी केंद्र सरकार के सिविल विभागों में बताई गई कुल रिक्तियों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा इन्हीं तीन बड़े विभागों में था.
डाक और राजस्व विभाग में भी बड़ी कमी
डाक विभाग में 2,53,124 पद मंजूर थे, लेकिन 1,91,578 कर्मचारी काम कर रहे थे. यहां 61,546 पद खाली थे.
वहीं राजस्व विभाग में 1,79,374 मंजूर पदों के मुकाबले 1,09,712 कर्मचारी थे. यानी 69,662 पद खाली थे.
यह कुल मंजूर पदों का करीब 39 फीसदी है.
कृषि से लेकर पर्यावरण तक
कर्मचारियों की कमी उन विभागों में भी दिखती है जिनका सीधा संबंध खेती, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है.
कृषि और किसान कल्याण विभाग में 5,420 पद मंजूर थे, लेकिन 3,565 कर्मचारी काम कर रहे थे. यानी 1,855 पद खाली थे.
पशुपालन और डेयरी विभाग में 2,393 पद मंजूर थे और सिर्फ 1,015 कर्मचारी थे. यहां 1,378 पद खाली थे.
मत्स्य पालन विभाग में 664 पदों के मुकाबले 464 कर्मचारी थे. यानी 200 पद खाली थे.
वहीं पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में 5,127 मंजूर पदों के मुकाबले 3,170 कर्मचारी थे. यानी 1,957 पद खाली, करीब 38 फीसदी.
शिक्षा और स्वास्थ्य में भी सवाल
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सीधे तौर पर जनता से जुड़े क्षेत्रों में भी रिक्तियां सामने आई हैं.
उच्च शिक्षा विभाग में 1,414 पद मंजूर थे, लेकिन 892 कर्मचारी थे. यानी 522 पद खाली थे.
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग में 365 पदों के मुकाबले 278 कर्मचारी थे. यहां 87 पद खाली थे.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 27,427 पद मंजूर थे और 25,845 कर्मचारी काम कर रहे थे. यानी 1,582 पद खाली थे.
वहीं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग में 62 पदों के मुकाबले सिर्फ 28 कर्मचारी थे. यानी 34 पद खाली, यानी आधे से ज्यादा.
AYUSH विभाग में 432 मंजूर पदों के मुकाबले 199 कर्मचारी थे. यहां 233 पद खाली थे.
साइंस और टेक्नोलॉजी वाले विभाग भी अछूते नहीं
कर्मचारियों की कमी वैज्ञानिक और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़े विभागों में भी है.
परमाणु ऊर्जा विभाग में 37,250 पद मंजूर थे, लेकिन 27,016 कर्मचारी थे. यानी 10,234 पद खाली.
अंतरिक्ष विभाग में 19,200 मंजूर पदों के मुकाबले 15,074 कर्मचारी थे. यहां 4,126 पद खाली थे.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में 6,527 पद मंजूर थे और 4,846 कर्मचारी काम कर रहे थे. यानी 1,681 पद खाली थे.
शहरी विकास से कानून तक रिक्तियां
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में 19,151 पद मंजूर थे, जबकि 14,559 कर्मचारी थे. यानी 4,592 पद खाली.
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय में 11,433 मंजूर पदों के मुकाबले 8,242 कर्मचारी थे. यहां 3,191 पद खाली थे.
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग में 3,807 पद मंजूर थे, लेकिन 2,454 कर्मचारी थे. यानी 1,353 पद खाली.
सूचना और प्रसारण मंत्रालय में 4,940 पदों के मुकाबले 3,103 कर्मचारी थे. यहां 1,837 पद खाली थे.
वहीं कानून और न्याय मंत्रालय में 3,478 मंजूर पदों के मुकाबले 2,211 कर्मचारी काम कर रहे थे. यानी 1,267 पद खाली थे.
सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, सरकारी क्षमता का है
इस RTI से सामने आया आंकड़ा सिर्फ खाली सरकारी नौकरियों की संख्या नहीं बताता. यह एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है कि जिन पदों को सरकार ने खुद जरूरी मानकर मंजूरी दी, वे लंबे समय तक खाली क्यों पड़े हैं?
रेलवे में लाखों पद खाली हैं. रक्षा मंत्रालय के सिविलियन सेटअप में भी बड़ी कमी है. गृह मंत्रालय में एक लाख से ज्यादा पद रिक्त हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि और विज्ञान से जुड़े विभाग भी इससे अछूते नहीं हैं.
तो सवाल यह है कि जब सरकार खुद 39 लाख से ज्यादा सिविल पदों की जरूरत मानती है, तो उनमें से 8.23 लाख पद खाली क्यों हैं?
क्या यह सिर्फ भर्ती प्रक्रिया की धीमी रफ्तार है, या सरकारी तंत्र की प्राथमिकताओं का सवाल?
क्योंकि खाली पद सिर्फ खाली कुर्सियां नहीं होते. उनके पीछे किसी दफ्तर की कम होती क्षमता, किसी सेवा में बढ़ता बोझ और किसी नागरिक का इंतजार छिपा होता है.