Noida Farmers Protest: गिरफ्तारी के बाद पुलिस कमिश्नर से वार्ता, 10% प्लॉट समेत सभी मुद्दों पर बनी सहमति

Noida Farmer Protest

किसानों की गिरफ्तारी के बाद बदला आंदोलन का रुख
किसानों की गिरफ्तारी के बाद बदला आंदोलन का रुख

Noida Farmer Protest: किसानों की गिरफ्तारी और भारी पुलिस तैनाती के बीच चल रहा किसान संघर्ष मोर्चा का आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. पुलिस कमिश्नर के ठोस आश्वासन के बाद किसान नेताओं ने वार्ता पूरी होने तक आंदोलन रोकने का फैसला लिया है. हालांकि, किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है.

गिरफ्तारी के बाद जेल से ही हुई बातचीत

किसान संघर्ष मोर्चा के मुताबिक, किसानों की गिरफ्तारी के बाद मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-108 स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय में वार्ता की. इस दौरान किसानों के प्रमुख मुद्दों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई.

पुलिस कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों यानी CEO और जिलाधिकारी की मौजूदगी में किसानों के लंबित मुद्दों पर गंभीर और विस्तृत वार्ता कराई जाएगी.

इनमें 10 प्रतिशत विकसित आबादी के प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून, आबादी और किसानों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दे शामिल हैं.

हर मुद्दे के समाधान की समय-सीमा तय होगी

किसान संघर्ष मोर्चा के अनुसार, पुलिस कमिश्नर ने प्राधिकरण स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और उसकी जवाबदेही तय करने का भी भरोसा दिया है.

इसके साथ ही किसानों के प्रत्येक मुद्दे के समाधान के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है.

यानी किसानों की मांग सिर्फ बैठक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मुद्दों के समाधान के लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा तय करने का आश्वासन दिया गया है.

डॉ. रुपेश वर्मा बोले- वार्ता सार्थक रही

किसान संघर्ष मोर्चा के प्रमुख नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि पुलिस कमिश्नर के साथ हुई वार्ता सार्थक और ठोस रही.

उन्होंने कहा कि किसानों की मुख्य मांग थी कि तीनों प्राधिकरणों के अधिकारी अलग-अलग बयान देकर किसानों को गुमराह करने के बजाय तीनों प्राधिकरणों के CEO और जिलाधिकारी एक ही टेबल पर बैठें और सभी मुद्दों पर गंभीर एवं निर्णायक बातचीत करें.

किसान मोर्चा के मुताबिक, इस मांग पर सहमति बन गई है.

डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि पुलिस कमिश्नर के ठोस आश्वासन को देखते हुए वार्ता पूरी होने तक आंदोलन स्थगित किया जा रहा है. अगर बातचीत का परिणाम किसानों के पक्ष में नहीं रहा, तो जरूरत पड़ने पर आंदोलन को फिर से और ज्यादा मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा.

17 जुलाई की वार्ता का भी दिया हवाला

किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसानों की एकता मजबूत है और वे लंबे समय से अपने मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि तीनों प्राधिकरणों के CEO के साथ प्राधिकरण स्तर के लंबित मुद्दों और शासन स्तर के मुद्दों के समाधान को लेकर पहले भी आंदोलन किया जा चुका है.

खलीफा के मुताबिक, 17 जुलाई को भी वार्ता का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी. अब पुलिस कमिश्नर ने वार्ता कराने का ठोस आश्वासन दिया है और आंदोलन को बातचीत पूरी होने तक स्थगित करने का आग्रह किया. इसी के बाद मोर्चा ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया.

सरन प्रधान बोले- आंदोलन खत्म नहीं हुआ

किसान संघर्ष मोर्चा के प्रमुख नेता सरन प्रधान ने कहा कि आंदोलन शुरू हो चुका है और किसानों के मुद्दों का समाधान होने के बाद ही इसे समाप्त माना जाएगा.

उन्होंने कहा कि आज के आंदोलन की प्रमुख मांग तीनों प्राधिकरणों के CEO और जिलाधिकारी के साथ सामूहिक वार्ता थी. अब इस वार्ता के बाद उसके परिणाम की समीक्षा की जाएगी और जरूरत के मुताबिक आगे की रणनीति तय होगी.

करीब 150 किसानों की गिरफ्तारी का दावा

इससे पहले किसान संघर्ष मोर्चा ने प्रशासन की पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी. मोर्चा का दावा था कि डॉ. रुपेश वर्मा, इंद्र प्रधान और सरन प्रधान के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे करीब 150 किसानों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 32 महिलाएं भी शामिल थीं.

मोर्चा ने आरोप लगाया था कि धरना स्थल को पुलिस छावनी में बदल दिया गया और पूरे जनपद की पुलिस तैनात की गई.

समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष इंद्र प्रधान की गिरफ्तारी का भी मोर्चा ने दावा किया था. वहीं, डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा था कि गिरफ्तारियां किसानों का हौसला नहीं तोड़ सकतीं.

आंदोलन स्थगित, संघर्ष खत्म नहीं

किसान संघर्ष मोर्चा ने अब साफ कर दिया है कि फिलहाल आंदोलन स्थगित है, लेकिन इसे खत्म नहीं किया गया है.

किसानों का कहना है कि 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून, आबादी और अन्य लंबित मुद्दों पर समयबद्ध और ठोस कार्रवाई जरूरी है.

अब असली परीक्षा सरकार और प्राधिकरणों की है. क्या इस बार CEO और जिलाधिकारी की मौजूदगी में होने वाली वार्ता सिर्फ एक और आश्वासन साबित होगी, या किसानों की वर्षों पुरानी मांगों पर वास्तव में कोई समयबद्ध फैसला होगा?

क्योंकि आंदोलन स्थगित जरूर हुआ है, लेकिन किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर आश्वासन जमीन पर नहीं उतरा, तो आंदोलन फिर लौट सकता है.

Last Updated on August 18, 2026 10:02 am

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