नई दिल्ली- Bihar के Siwan में Student Protest के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में पुलिस पर लगे ‘अनुपातहीन बल’ के आरोपों से इनकार किया है. सरकार का कहना है कि हिंसा और पथराव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने जरूरी कदम उठाए.
सीवान में AK-47 से फायरिंग के मामले में सरकार ने बताया कि भीड़ में फंसने के बाद एक कांस्टेबल ने हवा में चार राउंड फायर किए थे. सरकार के मुताबिक, इस फायरिंग में किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी.
सीवान में AK-47 से क्यों चली गोलियां?
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा कि 25 जुलाई 2026 को सीवान के गांधी मैदान में AISA और RYA के प्रदर्शनकारी जुटे थे. AISA और RYA, CPI(ML) की छात्र और युवा इकाइयां हैं.
प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से JP चौक की तरफ मार्च कर रहे थे. सरकार के मुताबिक, करीब दोपहर 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया.
इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की तरफ से भी कुछ लोग पथराव में शामिल हो गए. इस दौरान पुलिसकर्मियों पर भी पत्थर फेंके गए.
सरकार के मुताबिक, पथराव में 20 पुलिसकर्मी घायल हुए. इनमें सीवान के पुलिस अधीक्षक, दो SDPO, दो इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल शामिल थे.
हिंसा के दौरान दो पुलिस वाहनों और बड़ी संख्या में ट्रैफिक ट्रॉलियों को नुकसान पहुंचा. हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए.
कांस्टेबल ने हवा में 4 राउंड फायर किए
इसी दौरान जिला खुफिया इकाई यानी DIU में काम करने वाले एक कांस्टेबल के AK-47 से फायरिंग का मामला सामने आया.
राज्य सरकार के मुताबिक, कांस्टेबल अभिषेक कुमार भीड़ में फंस गया था. इसके बाद उसने अपनी AK-47 से हवा में चार गोलियां चलाईं.
सरकार का कहना है कि इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी.
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए. हलफनामे में AK-47 को ‘प्लाटून स्तर का हथियार’ बताया गया है, जिसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए किया जाता है.
राज्य के DGP ने AK-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं.
फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है. 
9 MM पिस्टल से भी चली गोलियां
सीवान में सिर्फ AK-47 फायरिंग का मामला नहीं है.
सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 MM पिस्टल से दो राउंड फायर किए.
इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली लगने की चोटें आईं.
हालांकि, सरकार का कहना है कि इन तीनों को AK-47 से गोली नहीं लगी थी और वे उस जगह भी मौजूद नहीं थे, जहां AK-47 से फायरिंग हुई थी.
फायरिंग की बैलिस्टिक जांच जारी है. जांच में हथियार का प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं.
22 से 25 जुलाई के बीच 69 FIR, करीब 500 गिरफ्तारियां
राज्य सरकार के हलफनामे के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया.
इसके अलावा 75 किशोरों को जेजेबी के जरिए छोड़ा गया. सरकार ने कहा कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी बच्चों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड पर रिहा किया गया.
पुलिस का दावा है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है.
कई जिलों में हिंसा का दावा
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई जगहों पर हालात हिंसक हुए.
छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने के बाद भीड़ में असामाजिक तत्वों के शामिल होने और तोड़फोड़ तथा पथराव शुरू करने का आरोप लगाया गया.
सरकार के मुताबिक, इस दौरान 2 BDO, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए.
सरकार ने बताया कि एक BDO की आंख चली गई, जबकि दूसरे BDO के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी हालत गंभीर बताई गई है.
157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल
राज्य सरकार ने दावा किया है कि पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए.
सरकार ने पुलिस की ओर से आंसू गैस और वॉटर कैनन के इस्तेमाल की बात भी स्वीकार की है और माना है कि इनके इस्तेमाल से प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं.
सरकार ने हिंसा के लिए AISA और RYA की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का भी उल्लेख किया है. वहीं, 24 जुलाई को CJP के प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं होने का दावा किया गया है.
वीडियो और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने के निर्देश
राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक सभी वीडियो फुटेज और दूसरे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त DGP को दिए गए हैं.
प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है.
सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान से जुड़ी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है.
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
बिहार सरकार ने पुलिस पर ‘अनुपातहीन बल’ इस्तेमाल करने के आरोपों को खारिज किया है. उसका कहना है कि पुलिस ने हिंसक होते हालात को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए.
लेकिन दूसरी तरफ, AK-47 से चार राउंड फायरिंग, 9 MM पिस्टल से गोली चलने और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की घटनाएं भी इसी जवाब का हिस्सा हैं.
तो सवाल सिर्फ ये नहीं है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा किसने शुरू की?
सवाल ये भी है कि कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस को बल प्रयोग की सीमा कौन तय करता है?
अगर AK-47 कानून-व्यवस्था की स्थिति में इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए, तो फिर भीड़ में फंसे एक कांस्टेबल तक यह हथियार कैसे पहुंचा और उससे चार राउंड फायरिंग क्यों हुई?
और अगर प्रदर्शनकारी हिंसा के दोषी पाए जाते हैं, तो पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही और उसकी स्वतंत्र जांच का पैमाना क्या होना चाहिए?
लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार जरूरी है, लेकिन हिंसा पर कार्रवाई और पुलिस की कार्रवाई—दोनों की जवाबदेही क्या एक ही कसौटी पर नहीं होनी चाहिए?
Last Updated on August 18, 2026 8:05 am
