AQI 400 पार, Delhi में Air Polution का अलर्ट, ग्रीन पटाखों पर क्या नियम?

दिवाली से पहले दिल्ली-NCR की हवा फिर जहरीली हो गई है. मंगलवार सुबह दिल्ली का AQI 331 दर्ज किया गया, जबकि आठ मॉनिटरिंग स्टेशन 400 के पार पहुंच गए. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को सीमित समय के लिए अनुमति दी है. जानिए पटाखे जलाने का समय, प्रतिबंध और सुप्रीम कोर्ट की सभी शर्तें.

दिल्ली-NCR में AQI 331, सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन पटाखों वाले आदेश में क्या है?
दिल्ली-NCR में AQI 331, सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन पटाखों वाले आदेश में क्या है?
Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है. मंगलवार सुबह राजधानी घने स्मॉग की चादर में लिपटी नजर आई. दिवाली से कुछ दिन पहले दिल्ली की हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ गई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 331 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है. वहीं, दिल्ली के आठ निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है.

प्रदूषण का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा. नोएडा और गुरुग्राम में भी धुंध का असर दिखाई दिया. कई ऊंची इमारतें स्मॉग की मोटी परत के पीछे छिप गईं.

यह स्थिति सोमवार को हवा की गुणवत्ता में आई तेज गिरावट के बाद बनी है. सोमवार को दिल्ली में इस सीजन का पहली बार AQI ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंचा था. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के मुताबिक, सोमवार सुबह 9 बजे AQI 312 था, जो शाम 4 बजे बढ़कर 324 हो गया. मंगलवार सुबह तक यह 331 पर पहुंच गया.

दिल्ली के 8 इलाकों में AQI 400 के पार

दिल्ली के आठ निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई. इनमें बवाना, पंजाबी बाग, रोहिणी, विवेक विहार, नरेला, जहांगीरपुरी, अलीपुर और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) शामिल हैं.

दिवाली के दौरान पटाखे जलाने को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ किया है कि त्योहार का उत्सव लोगों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं मनाया जा सकता. हालांकि, अदालत ने दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय प्रमाणित ग्रीन पटाखों के सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया था, जिसे सोमवार दोपहर आधिकारिक तौर पर अपलोड किया गया. 23 पन्नों के इस आदेश में अदालत ने कहा कि धार्मिक परंपराएं सार्वजनिक स्वास्थ्य से ऊपर नहीं हो सकतीं.

दिवाली पर कब और कितनी देर जला सकेंगे ग्रीन पटाखे?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर को ही सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे.

  • सुबह 6 बजे से 7 बजे तक.

  • रात 8 बजे से 10 बजे तक.

9 नवंबर से पटाखों पर फिर पूरी तरह प्रतिबंध लागू हो जाएगा.

अदालत ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, अधिसूचित साइलेंस जोन और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है. इन क्षेत्रों को नो-क्रैकर जोन घोषित किया जाएगा.

2 से 6 नवंबर तक ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने उन निर्माताओं को 2 से 6 नवंबर के बीच प्रमाणित ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति दी है, जिनके पास CSIR-NEERI (वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान) और PESO (पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन) से वैध सत्यापन और मंजूरी है.

हालांकि, पटाखों की कुछ श्रेणियों पर प्रतिबंध जारी रहेगा. पटाखों की लड़ियां, जिन्हें आमतौर पर ‘लड़ियां’ या ‘मालाएं’ कहा जाता है, बेची नहीं जा सकेंगी. इसके अलावा बेरियम वाले पटाखों और CSIR-NEERI से ग्रीन पटाखों के रूप में मंजूर नहीं किए गए उत्पादों की बिक्री पर भी रोक रहेगी.

ग्रीन पटाखों के नाम पर सामान्य पटाखों की बिक्री रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हर डिब्बे पर उत्पाद से जुड़ा QR कोड अनिवार्य किया है. इस QR कोड में निर्माता का नाम, NEERI रजिस्ट्रेशन, PESO या जिला मजिस्ट्रेट का लाइसेंस, पटाखे की निर्माण प्रक्रिया और टेस्ट सर्टिफिकेट की जानकारी होनी चाहिए.

अवैध पटाखे बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और जिला प्रशासन को बाजारों में निरीक्षण करने, QR कोड की जांच करने और अवैध या सामान्य पटाखों को जब्त करने का निर्देश दिया है.

अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं और कारोबारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा.

ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए प्रशासन को अलग-अलग निर्धारित स्थान चिह्नित करने होंगे. इन स्थानों के अलावा कहीं और पटाखे नहीं बेचे जा सकेंगे. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी.

अदालत ने माना कि पहले भी पटाखों को लेकर जारी निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ है. इस बार राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि निर्माता और विक्रेता पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा राशि जमा करें. आदेश का उल्लंघन होने पर यह राशि जब्त कर ली जाएगी.

दिवाली से पहले और बाद की हवा की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली-NCR के अधिकार क्षेत्र में आने वाले राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को दिवाली से पहले और बाद में अलग-अलग एयर क्वालिटी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है.

इसके अलावा अधिकारियों को रेत और पानी के नमूने इकट्ठा करने होंगे, ताकि तुलनात्मक जांच की जा सके. अदालत ने अस्पतालों में मरीजों के भर्ती होने के आंकड़ों के आधार पर भी यह रिपोर्ट देने को कहा है कि पटाखों का प्रदूषण लोगों की सेहत पर कितना असर डाल रहा है.

सभी अनुपालन रिपोर्ट और हलफनामे दाखिल करने के लिए 14 दिसंबर की तारीख तय की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि तय समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.

अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अपने आदेशों के पालन की निगरानी जारी रखेगी. इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक परंपरा और पर्यावरण के अधिकार में क्या कहा?

अदालत ने अपने आदेश में धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया. कोर्ट ने बार और अन्य प्रमुख संस्थाओं के सदस्यों के साथ-साथ फिल्मी हस्तियों और खिलाड़ियों से भी पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने के लिए जागरूकता अभियान में हिस्सा लेने की अपील की है.

अदालत ने बच्चों को भी प्रदूषण के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने और स्कूलों में जानकारीपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत बताई.

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि दिवाली सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला उत्सव बन चुका है. यह त्योहार जाति, समुदाय और धर्म से ऊपर उठकर लोगों के बीच खुशी और समृद्धि का संदेश देता है.

आदेश में स्कंद पुराण और पद्म पुराण जैसे प्राचीन हिंदू ग्रंथों का भी उल्लेख किया गया. अदालत ने कहा कि परंपरागत रूप से दिवाली में दीप जलाना उत्सव का अभिन्न हिस्सा रहा है. लेकिन बारूद के इस्तेमाल के बाद त्योहार मनाने के तरीके में बदलाव आया और पटाखों का चलन बढ़ा.

अनुच्छेद 21 बनाम धार्मिक स्वतंत्रता: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25(1) के तहत पटाखे जलाना धार्मिक परंपरा का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य की शर्तों के अधीन है.

वहीं, संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीवन जीने का अधिकार देता है.

अदालत ने टिप्पणी की, “पर्यावरण को खराब होने देना, जिससे सभी जीवों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो, उत्सव के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देता है और उसका जश्न निरर्थक हो जाता है.”

कोर्ट ने पटाखों से निकलने वाले प्रदूषक कणों और उनके गंभीर पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चिंता जताई.

पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद प्रदूषण क्यों नहीं घटा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि पहले जारी निर्देशों का राज्यों और संबंधित अधिकारियों ने ठीक से पालन नहीं किया. अदालत ने यह भी कहा कि पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद प्रदूषण का स्तर बढ़ता रहा.

कोर्ट के मुताबिक, सामान्य पटाखे ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचे जाते रहे हैं. इससे एक तरफ अवैध पटाखों की बिक्री को बढ़ावा मिला, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ता वास्तविक और प्रमाणित ग्रीन पटाखे खरीदने से भी वंचित रह गए.

अदालत ने कहा कि ग्रीन पटाखों की अगली पीढ़ी के कुछ उत्पाद आवश्यक परीक्षणों के बाद मंजूर किए गए हैं. ऐसे में नियमों का सही तरीके से पालन कराना जरूरी है.

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मूल संदेश साफ है – दिवाली मनाने के अधिकार का मतलब दूसरों की सेहत और पर्यावरण को खतरे में डालना नहीं हो सकता. लेकिन दिल्ली-NCR में AQI का 331 तक पहुंचना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर हर साल दिवाली से पहले प्रदूषण रोकने की तैयारियां क्यों नाकाम हो जाती हैं?

Last Updated on November 3, 2026 9:08 am

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