महंगे शेयर और LTCG टैक्स, क्या निवेशकों की मुश्किलें दूर करेंगी Nirmala Sitharaman?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार के रिटेल निवेशकों की चिंता स्वीकार करते हुए LTCG टैक्स की समीक्षा की मांगों पर विचार करने का संकेत दिया है. बजट 2027 से पहले विदेशी निवेशकों की बिकवाली, भारतीय शेयरों की ऊंची कीमतों और इक्विटी बाजार को समर्थन देने की जरूरत पर उन्होंने अहम बातें कहीं. रोजगार और निजी निवेश भी सरकार की प्राथमिकता रहेंगे.

टाटा विवाद पर सरकार की चुप्पी, निर्मला सीतारमण ने क्या संकेत दिया?
टाटा विवाद पर सरकार की चुप्पी, निर्मला सीतारमण ने क्या संकेत दिया?
LTCG Tax: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को माना कि भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों (Retail Investors) और बाजार से जुड़े लोगों के बीच शेयरों की ऊंची कीमतों (Stretched Valuations) और कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि सरकार इन चिंताओं पर विचार करेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शेयर बाजार के प्रदर्शन का मुख्य आधार केवल टैक्स में छूट को नहीं माना जाना चाहिए.

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और भारतीय शेयरों के दूसरे बाजारों की तुलना में कम आकर्षक होने की चिंताओं के बीच इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की समीक्षा की मांग तेज हो रही है.

मुंबई में आयोजित फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवॉर्ड्स के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचीं सीतारमण ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस के संपादक श्यामल मजूमदार के साथ बातचीत में ये बातें कहीं.

अपने लगातार 10वें केंद्रीय बजट की तैयारी कर रहीं सीतारमण ने कहा कि सरकार किसी भी संभावित फैसले से पहले सभी संबंधित पक्षों की बात सुनेगी. इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों की मांगों को सरकार गंभीरता से ले सकती है.

सीतारमण ने कहा, “मैं समझती हूं कि रिटेल निवेशकों, खासकर इक्विटी बाजार में निवेश करने वालों के बीच संवेदनशीलता और चिंता का माहौल है. मैं किसी भी पक्ष के प्रति पूर्वाग्रह रखे बिना उनकी बात समझ रही हूं.”

उन्होंने याद दिलाया कि 2023-24 में भी इसी कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था के बावजूद भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का मजबूत प्रवाह देखने को मिला था. उनके मुताबिक, शेयर बाजार की मजबूती का आधार अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी कारक होते हैं, न कि केवल टैक्स में मिलने वाली रियायतें.

हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि तब से परिस्थितियां बदली हैं और चुनौतियां बढ़ी हैं. पिछले कुछ तिमाहियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से शुद्ध निकासी हुई है, भले ही हाल के दिनों में निवेश का रुख कुछ बदला हो.

उन्होंने कहा, “सभी संबंधित पक्ष अपनी चिंताएं पहले से ज्यादा जोरदार तरीके से उठा रहे हैं. मैं इन सभी बातों पर विचार करूंगी.”

वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था की विकास दर को 7 फीसदी या उससे ऊपर बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है. इसके लिए पूंजी की जरूरत होगी.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार का ध्यान भारत के अपेक्षाकृत अविकसित कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करने पर रहा है, लेकिन अब इक्विटी बाजार से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान देना जरूरी है.

सीतारमण ने दोहराया, “इक्विटी बाजार को भी समर्थन की जरूरत है. मैं इस आवाज को समझती हूं.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उन्हें विशेष रियायतें देने की जरूरत है, तो उन्होंने ऐसी नीति के खिलाफ सावधान किया जो किसी एक वर्ग के निवेशकों को दूसरे वर्ग से ज्यादा महत्व देती दिखाई दे.

उन्होंने सवाल किया, “अगर आप डॉलर वाले निवेशकों की बात करते हैं, तो रुपये वाले यानी घरेलू निवेशकों का क्या होगा?”

उन्होंने कहा, “सभी संबंधित पक्षों की बात सुनिए. सरकार वास्तव में क्या कर सकती है, यह समझिए और फिर हम उस पर काम करेंगे. पहले उनकी बात सुनेंगे और उसके बाद देखेंगे कि क्या कदम उठाए जा सकते हैं.”

विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे भारतीय शेयरों का महंगा होना और कंपनियों की कमजोर होती कमाई भी प्रमुख कारण हैं. कुछ विश्लेषक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को भी निवेशकों की धारणा प्रभावित करने वाला कारक मानते हैं.

दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों के लिए दूसरे निवेश विकल्प भी आकर्षक बने हुए हैं. उदाहरण के तौर पर, अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर मिलने वाला यील्ड हाल के हफ्तों में करीब 5 फीसदी के आसपास रहा है.

टाटा ग्रुप विवाद पर क्या बोलीं निर्मला सीतारमण?

टाटा ग्रुप के भीतर चल रहे मतभेदों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे एक “संवेदनशील मामला” बताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार के हस्तक्षेप के बिना ही इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल आएगा.

उन्होंने टाटा ग्रुप को एक वैश्विक ब्रांड बनाने में पारसी समुदाय की भूमिका की तारीफ की. साथ ही समूह के व्यापक कारोबारी हितों और बड़े निवेश का भी जिक्र किया.

सीतारमण ने टाटा ग्रुप को भारतीय अर्थव्यवस्था का एक “महत्वपूर्ण हिस्सा” बताते हुए उम्मीद जताई कि विवाद जल्द खत्म होगा और इसे सार्वजनिक विवाद का रूप नहीं लेने दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस मामले के समाधान में कारोबारी समझदारी और व्यावसायिक अनुभव की भूमिका अहम होनी चाहिए.

वित्त मंत्री ने कहा, “मैं इस समय इस बारे में तुरंत कुछ नहीं कहना चाहूंगी.”

दरअसल, टाटा संस और उसकी नियंत्रक हिस्सेदार कंपनी टाटा ट्रस्ट्स के बीच एन चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने और होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने के मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं.

17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया था. इस फैसले पर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने आपत्ति जताई थी. इसके बाद समूह के भीतर कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर विवाद गहरा गया.

हालांकि, विवाद सुलझाने के लिए बातचीत की कोशिशें जारी बताई जा रही हैं. अब 26 नवंबर को होने वाली टाटा संस बोर्ड की अगली बैठक को इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है.

विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर सीतारमण ने उठाए सवाल

वित्त मंत्री ने रविवार को सरकार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और आरोपों की भी आलोचना की. उन्होंने विपक्ष पर संसदीय प्रक्रियाओं को कमजोर करने और देश में अस्थिरता का माहौल दिखाने का आरोप लगाया.

सीतारमण ने कहा कि विपक्ष को सरकार से जवाब मांगने के लिए संसद में बहस और चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि सड़कों पर प्रदर्शन और मॉक पार्लियामेंट का सहारा लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, “विपक्ष में रहकर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करना और उससे सवाल पूछना बिल्कुल सही है. मैं इसके खिलाफ नहीं हूं. लेकिन मैं चाहूंगी कि ऐसा ज्यादा से ज्यादा संसद के भीतर हो, न कि मॉक पार्लियामेंट में.”

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “आप विपक्ष में हैं. भारत की जनता ने आपके 100 सांसदों को संसद में काम करने के लिए चुना है, लेकिन आप मॉक पार्लियामेंट का आयोजन कर रहे हैं.”

बजट 2027 में रोजगार, निवेश और MSME पर रहेगा जोर

आगामी केंद्रीय बजट को लेकर सीतारमण ने कहा कि ऐसा बजट पेश करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, जो आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सके.

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं के कौशल और रोजगार के बीच की खाई को कम करना, निजी निवेश को गति देना और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) की भूमिका मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा.

लगातार 10वां बजट पेश करने की तैयारी पर उन्होंने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा जिम्मेदारी का विषय है.

सीतारमण ने कहा, “यह हमेशा एक बड़ी जिम्मेदारी का एहसास कराता है कि ऐसा बजट पेश किया जाए, जो लोगों के लिए मायने रखता हो, आर्थिक विकास में मदद करे और देश के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना कर सके.”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिली नीतिगत स्थिरता और लगातार पेश किए गए बजटों की दिशा को अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया.

उनके मुताबिक, हर बजट को पिछले फैसलों के क्रियान्वयन से मिले अनुभव, जनता की प्रतिक्रिया और सरकार के अलग-अलग स्तरों पर हुए विचार-विमर्श से फायदा मिला है.

उन्होंने कहा, “ऐसा कुछ करने की जिम्मेदारी, जिससे लोगों के जीवन में बदलाव आए, इस समय मेरे दिमाग में सबसे ऊपर है.”

युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता

रोजगार के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को जरूरी कौशल प्रदान करने पर अपना ध्यान बनाए रखेगी, ताकि कंपनियों की जरूरतों और नौकरी तलाश रहे युवाओं की क्षमताओं के बीच की दूरी कम की जा सके.

उन्होंने कहा, “युवाओं को ट्रेनिंग देना और उन्हें ऐसे कौशल प्रदान करना, जिससे वे नौकरी के लिए तैयार हो सकें, हमारी प्राथमिकता है.”

उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले दो केंद्रीय बजटों में भी इस दिशा में काम शुरू किया है.

निजी निवेश में बढ़ोतरी के संकेत, GST सुधारों का दिया हवाला

निजी निवेश को लेकर सीतारमण ने कहा कि अब उद्योग जगत नई परियोजनाओं और निवेश के साथ आगे आता दिखाई दे रहा है.

उन्होंने कहा कि पहले उनकी चिंता यह थी कि कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत होने के बावजूद वे निवेश करने से बच रही थीं. लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव दिख रहा है.

वित्त मंत्री ने इस बदलाव का एक कारण अगली पीढ़ी के GST सुधारों को बताया. उनके मुताबिक, इन सुधारों से घरेलू खपत मजबूत हुई है और बाजार में मांग पहले से ज्यादा स्पष्ट दिखाई देने लगी है.

उन्होंने कहा, “आज उद्योग जगत को भरोसा है कि बाजार में मांग मौजूद है. वह निवेश कर सकता है, उत्पादन कर सकता है और अपने कारोबार को उस स्तर तक ले जा सकता है, जहां वह पहुंचना चाहता है.”

अक्टूबर के GST कलेक्शन का जिक्र करते हुए, जिसे उन्होंने अब तक का सबसे अधिक संग्रह बताया, सीतारमण ने कहा कि घरेलू खपत अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है.

उन्होंने कहा, “खपत में आई तेजी से बाजार में मांग की स्पष्ट तस्वीर सामने आई है. इसी वजह से मैं निजी क्षेत्र में निवेश होते हुए देख रही हूं.”

क्या कुछ बड़े कारोबारी घरानों के हाथ में सिमट रही है भारतीय अर्थव्यवस्था?

जब वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था पर कुछ बड़े कारोबारी समूहों का दबदबा बढ़ता जा रहा है, तो उन्होंने MSME और स्टार्टअप क्षेत्र के विस्तार का हवाला दिया.

उनके मुताबिक, छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ स्टार्टअप का विकास इस बात का संकेत है कि देश के उद्योग जगत में अलग-अलग स्तरों पर विस्तार हो रहा है.

उन्होंने उद्योग जगत से यह भी अपील की कि वह सिर्फ बजट से पहले होने वाली सालाना बैठकों तक सरकार के साथ संवाद सीमित न रखे.

सीतारमण ने कहा, “वे सरकार से अपनी जरूरतों के मुताबिक कुछ भी मांगने के लिए स्वागत योग्य हैं. लेकिन इसके बाद भी मैं चाहूंगी कि वे हमारे साथ लगातार संपर्क में रहें और बताएं कि वे आगे बढ़ रहे हैं या नहीं. क्या उन्हें और परेशानियां आ रही हैं? क्या नई चुनौतियां सामने हैं? यह बातचीत सक्रिय और लगातार होनी चाहिए.”

कारोबार को आसान बनाने के लिए नियमों की समीक्षा

नियामकीय सुधारों पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार आर्थिक सर्वेक्षण में सामने आए सुझावों को गंभीरता से ले रही है और उद्योग जगत की समस्याओं को दूर करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है.

उन्होंने बताया कि सरकारी खरीद के नियमों, टेंडर की शर्तों और परियोजनाओं को पूरा करने से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है.

इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कारोबार करने में आसानी यानी Ease of Doing Business को मजबूत करना है.

अंत में सीतारमण ने सरकार की नीतिगत सोच को स्पष्ट करते हुए कहा कि कारोबारियों, उद्योग जगत और करदाताओं के प्रति भरोसा बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होगी.

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उन्होंने कहा, “हम जो भी नीति बनाएंगे, उसमें कारोबार पर भरोसा करेंगे, उद्योग पर भरोसा करेंगे और करदाता पर भरोसा करेंगे. यही हमारा संकल्प होगा.”

Last Updated on November 3, 2026 8:36 am

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