विदेशों में भारतीय परिवार कहां बस रहे हैं और कहां भारतीय समुदाय बूढ़ा हो रहा है?

अगर आपसे पूछा जाए कि विदेशों में रहने वाले भारतीय सबसे ज़्यादा किस देश में अपना परिवार बसा रहे हैं, तो शायद आपका जवाब अमेरिका, कनाडा या ब्रिटेन होगा। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं।

दुनिया के एक हिस्से में भारतीय परिवार तेजी से बढ़ रहे हैं। दूसरे हिस्से में भारतीय समुदाय उम्रदराज़ होता जा रहा है। कहीं हजारों भारतीय बच्चों का जन्म दर्ज हो रहा है, तो कहीं जन्म से कई गुना ज्यादा भारतीयों की मौतें रिकॉर्ड की जा रही हैं।

ये सिर्फ जन्म और मृत्यु के आंकड़े नहीं हैं। ये बताते हैं कि भारतीय किस दिशा में पलायन कर रहे हैं, कहां स्थायी रूप से बस रहे हैं और दुनिया के किन देशों में भारत की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।

The Indian Express की एक रिपोर्ट में भारत के Civil Registration System (CRS) के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर यह समझने की कोशिश की गई है कि विदेशों में भारतीय समुदाय का स्वरूप किस तरह बदल रहा है।

लेकिन कहानी शुरू होती है एक बेहद दिलचस्प सवाल से…

क्या अमेरिका अब भारतीय परिवारों की पहली पसंद नहीं रहा?

साल 2024 में दुनिया के 140 देशों में मौजूद 182 भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों ने कुल 66,413 भारतीय नागरिकों के जन्म और 11,383 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज की।

इन आंकड़ों को देखते हुए सबसे पहले सवाल उठता है कि आखिर इन जन्मों का सबसे बड़ा केंद्र कौन-सा देश है?

अगर आपने अमेरिका सोचा है, तो जवाब गलत है।

UAE बना भारतीय परिवारों का सबसे बड़ा केंद्र

विदेशों में भारतीय परिवारों का सबसे बड़ा केंद्र आज भी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है।

दुबई और अबूधाबी स्थित भारतीय मिशनों ने वर्ष 2024 में 19,317 जन्म दर्ज किए। यह संख्या दुनिया के किसी भी दूसरे देश से कहीं ज्यादा है।

साथ ही यहां 2,571 भारतीय नागरिकों की मौत भी दर्ज हुई।

इन आंकड़ों से साफ है कि खाड़ी देश अब सिर्फ रोजगार का केंद्र नहीं रहे। बड़ी संख्या में युवा भारतीय यहीं नौकरी कर रहे हैं, यहीं परिवार शुरू कर रहे हैं और लंबे समय तक यहीं रहने की योजना बना रहे हैं।

लेकिन अगर UAE पहले नंबर पर है, तो दूसरे नंबर पर कौन है?

ब्रिटेन में आखिर क्या बदल रहा है?

ब्रिटेन लंबे समय से भारतीय छात्रों और पेशेवरों की पसंद रहा है। लेकिन अब इसके असर आंकड़ों में भी दिखने लगे हैं।

लंदन, बर्मिंघम और एडिनबर्ग स्थित भारतीय मिशनों में 12,896 जन्म दर्ज किए गए।

इसके मुकाबले केवल 329 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज हुई।

जन्म और मृत्यु के बीच का इतना बड़ा अंतर बताता है कि ब्रिटेन में बड़ी संख्या में युवा भारतीय बस रहे हैं।

डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल, फाइनेंस विशेषज्ञ और छात्र अब केवल पढ़ाई या नौकरी के लिए नहीं जा रहे, बल्कि वहां स्थायी जीवन बनाने की दिशा में भी बढ़ रहे हैं।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

क्योंकि इसके बाद जो आंकड़े सामने आते हैं, वे सबसे ज्यादा हैरान करते हैं।

अमेरिका में सिर्फ 31 जन्म और 648 मौतें!

अमेरिका को दुनिया में भारतीय प्रवासियों का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।

लेकिन भारतीय मिशनों के आंकड़े कुछ अजीब तस्वीर पेश करते हैं।

न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, अटलांटा और वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय मिशनों में पूरे साल सिर्फ 31 जन्म दर्ज हुए।

वहीं 648 भारतीय नागरिकों की मौतें रिकॉर्ड की गईं।

सैन फ्रांसिस्को मिशन में अकेले 304 मौतें और केवल 13 जन्म दर्ज हुए।

पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि अमेरिका में भारतीय परिवार कम हो रहे हैं।

लेकिन असल वजह कुछ और है।

अमेरिका और कनाडा की नागरिकता नीति का असर

अमेरिका और कनाडा में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के साथ ही उस देश की नागरिकता मिल जाती है।

इसलिए अधिकांश भारतीय परिवार अपने नवजात बच्चों को भारतीय नागरिक के रूप में भारतीय मिशनों में पंजीकृत नहीं कराते।

यही वजह है कि जन्म के आंकड़े बेहद कम दिखाई देते हैं।

दूसरी ओर, वहां रहने वाले बुजुर्ग भारतीयों, शुरुआती दौर के प्रवासियों और परिवारों के साथ रहने पहुंचे माता-पिता की मौत का रिकॉर्ड भारतीय मिशनों में दर्ज कराया जाता है।

इसी कारण मौतों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देती है।

कनाडा में भी दिखी यही तस्वीर

अमेरिका की तरह कनाडा में भी जन्म से ज्यादा मौतें दर्ज हुईं।

ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर स्थित भारतीय मिशनों में केवल 15 जन्म और 388 मौतें दर्ज की गईं।

यह भी उसी नागरिकता नीति और उम्रदराज़ भारतीय समुदाय का संकेत माना जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया और यूरोप क्यों बन रहे हैं नई पसंद?

कुछ साल पहले तक भारतीयों की पहली पसंद अमेरिका और कनाडा माने जाते थे।

लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।

ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा, मेलबर्न और पर्थ स्थित भारतीय मिशनों में 3,093 जन्म और 118 मौतें दर्ज हुईं।

यह दर्शाता है कि युवा भारतीय बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलिया की ओर भी रुख कर रहे हैं।

यूरोप में भी भारतीय समुदाय तेजी से फैल रहा है।

जर्मनी

  • जन्म: 2,558
  • मौतें: 137

इटली

  • जन्म: 2,455
  • मौतें: 374

ये आंकड़े बताते हैं कि यूरोप अब केवल पर्यटन या शिक्षा का केंद्र नहीं रह गया, बल्कि भारतीय प्रवासियों का नया घर बनता जा रहा है।

सऊदी अरब की तस्वीर सबसे अलग क्यों है?

अगर मौतों के आंकड़ों की बात करें, तो सबसे ऊपर सऊदी अरब का नाम आता है।

रियाद और जेद्दा स्थित भारतीय मिशनों में:

  • जन्म: 4,200
  • मौतें: 2,629

यह किसी भी देश में भारतीय नागरिकों की सबसे अधिक दर्ज मौतों का आंकड़ा है।

इसकी एक बड़ी वजह वहां मौजूद विशाल भारतीय श्रमिक समुदाय माना जाता है।

निर्माण, ऊर्जा, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में लाखों भारतीय काम करते हैं। बड़ी आबादी होने के कारण मृत्यु के आंकड़े भी स्वाभाविक रूप से अधिक दिखाई देते हैं।

कुवैत भी पीछे नहीं

पड़ोसी कुवैत में:

  • जन्म: 2,797
  • मौतें: 733

यह दिखाता है कि खाड़ी देशों में भारतीय समुदाय अब भी तेजी से बढ़ रहा है।

पुरुषों की मौतें महिलाओं से कई गुना ज्यादा क्यों?

रिपोर्ट का एक और दिलचस्प पहलू सामने आता है।

विदेशों में दर्ज भारतीय नागरिकों की मौतों में:

  • पुरुष: 8,845
  • महिलाएं: 1,854

यानी पुरुषों की मौतों की संख्या महिलाओं से कई गुना ज्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वजह विदेशों में काम करने वाले पुरुष प्रवासी श्रमिकों की बड़ी संख्या हो सकती है।

वहीं जन्म के आंकड़ों में अपेक्षाकृत संतुलन दिखाई देता है।

  • लड़के: 21,190
  • लड़कियां: 20,024

मलेशिया में भी जन्म से ज्यादा मौतें

मलेशिया उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां जन्म की तुलना में मौतें ज्यादा दर्ज हुईं।

  • मौतें: 526
  • जन्म: 423

यह वहां बसे पुराने भारतीय समुदाय और कुछ क्षेत्रों में उच्च मृत्यु दर की ओर संकेत करता है।

पांच साल में कितना बदल गया भारतीय प्रवासी समुदाय?

अब सबसे बड़ा सवाल।

क्या विदेशों में भारतीय परिवारों की संख्या सचमुच तेजी से बढ़ रही है?

आंकड़े कहते हैं—हां।

साल 2019 में दुनिया के 161 भारतीय मिशनों ने कुल 46,475 जन्म दर्ज किए थे।

साल 2024 तक यह संख्या बढ़कर 66,413 हो गई।

यानी सिर्फ पांच साल में लगभग 42.9 प्रतिशत की वृद्धि

यह संकेत देता है कि बड़ी संख्या में भारतीय युवा विदेशों में बस रहे हैं और वहीं परिवार शुरू कर रहे हैं।

लेकिन दूसरी तरफ मौतों के आंकड़े भी तेजी से बढ़े हैं।

2019 में:

  • मौतें: 7,428

2024 में:

  • मौतें: 11,383

यानी पांच वर्षों में 53 प्रतिशत से अधिक वृद्धि

आखिर ये आंकड़े हमें क्या बताते हैं?

ये रिपोर्ट केवल जन्म और मृत्यु का सरकारी रिकॉर्ड नहीं है।

यह बताती है कि भारतीय समुदाय अब दुनिया के हर हिस्से में फैल चुका है।

खाड़ी देशों में युवा भारतीय परिवार तेजी से बढ़ रहे हैं।

ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप नई पसंद बनकर उभर रहे हैं।

अमेरिका और कनाडा में भारतीय समुदाय अधिक परिपक्व और उम्रदराज़ होता दिखाई देता है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि भारत की कहानी अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। लाखों भारतीय दुनिया के अलग-अलग देशों में अपना भविष्य लिख रहे हैं, और ये आंकड़े उसी बदलती हुई वैश्विक भारतीय कहानी की एक झलक पेश करते हैं।

Last Updated on July 2, 2026 6:30 pm

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