Tea Biscuits Case: कहा जाता है कि इंसान स्वभाव से दयालु होता है. वेद-पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों में मानवता और सहिष्णुता के पाठ पढ़ाए गए हैं. धरती पर शायद ही कोई इंसान होगा, जिसमें मानवता ना हो. मानवता ही इंसान को इंसान की श्रेणी में रखता है. इस वजह से ही हर धर्म में परिवार में माता-पिता अपने बच्चों को दूसरों के प्रति दयालु रहने की बात सिखाते हैं. लेकिन जब बड़े अधिकारी दयालुता, मानवता और संवेदनशीलता को ताक पर रख कर व्यवहार करते हैं, तो आम लोग भी सोचने पर मजबूर हो जाते. ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. आइए, अब विस्तार से जानते हैं कि मानवता को शर्मशार करने वाली यह घटना कौन-सी है और इसको लेकर कोर्ट ने क्या आदेश दिया है.
कहां का है मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला झारखंड के बोकारो (स्टील सिटी) का है. जहां, डीआरडीए (जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण) के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी रंजीत कुमार हिमांसु तकरीबन 17 साल से नौकरी कर रहे थे. चार साल पहले उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने मीटिंग से बचे हुए बिल्कुट और चायपत्ती को अपने घर ले गए. आरोप के आधार पर साल 2022 में उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया.
कर्मचारी पर क्या लगा था आरोप
कर्मचारी ने इस कार्रवाई को झारखंड हाइकोर्ट में चुनौती दी. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह तर्क दिया दया कि अधिकारियों की मीटिंग के बिस्कुट और चायपती बची हुई थी, जिसे बाद में वापस कर दिया गया. कोर्ट ने कर्मचारी को दिए गया कारण बताओ नोटिस को अस्पष्ट पाया. इसके अलावा नोटिस में यह स्पष्ट नहीं था कि कौन-कौन सी सामग्री कितनी मात्रा में ले जाने का आरोप लगाया गया है.
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कर्मचारी की 17 वर्षों की नौकरी में किसी प्रकार का दाग नहीं है. ऐसे में अगर वह मीटिंग से बचा हुआ बिल्कुट और चायपत्ती अपने घर ले गया, तो उसे बर्खास्त करना “अत्यंत कठोर, कानून के खिलाफ और अंतरात्मा को झकझोर देने वाली सजा” है. हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि कर्मचारी को 1 जुलाई 2026 से फिर से नौकरी पर बहाल किया जाए और उसे 50 फीसदी बकाया वेतन भी दिया जाए.
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कोर्ट ने दिया 50 फीसदी बकाया वेतन देने का आदेश
हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि कर्मचारी को 1 जुलाई 2026 से फिर से नौकरी पर बहाल किया जाए और 31 जुलाई 2026 तक उसे 50 फीसदी बकाया वेतन भी दिया जाए.
कर्मचारी के वेतन का 50 फीसदी कहां गया
कोर्ट ने रणजीत को बकाये वेतन का 50 फीसदी हिस्सा लौटाने का आदेश विभाग को नहीं दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि कोर्ट का मानना था कि यही राशि कथित गलती के लिए पर्याप्त सजा है.
कैसा है रणजीत का परिवार?
जानकारी के मुताबिक, जब रणजीत की नौकरी छूटी थी, तब उसे वेतन के तौर पर मजह 9, 950 रुपये मिलते थे. नौकरी चली जाने के बाद रणजीत का पूरा परिवार आर्थिक संकटों से गुजर रहा था. परिवार में पत्नी, 3 बेटियां और एक छोटी बहन है.
Last Updated on July 2, 2026 10:57 pm
