-कृष्णा राव
Why Is Colonel Ajay Kothiyal Silent on Ankita Bhandari Case?
यह रिटायर्ड कर्नल कोठियाल (Colonel Ajay Kothiyal) हैं, जिन्हें आलोचक दुर्भाग्य से एक कायर बता रहे हैं।
उन्हें उत्तराखंड की राजनीति बदलने का जीवन में एक बार मिलने वाला मौका दिया गया था।
लेकिन जिस व्यक्ति ने कभी भारतीय सेना की प्रतिष्ठित वर्दी पहनी थी, वह सत्ता की लालच में खुद को कथित रूप से संघी विचारधारा तक सीमित कर बैठा।
आरोप यह भी है कि आज उनकी स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि उन्होंने न तो अंकिता भंडारी के लिए एक शब्द बोला है और न ही उसके न्याय के समर्थन में कोई सार्वजनिक बयान दिया है।
यह आलोचना रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल को लेकर की जा रही है, जो एक सम्मानित भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी रहे हैं और 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी थे। चुनाव के बाद उन्होंने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था।
अंकिता भंडारी मामला और ताज़ा विवाद
अंकिता भंडारी, 19 वर्षीय रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट, की 2022 में हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के आरोप बीजेपी से जुड़े एक रिसॉर्ट मालिक के बेटे और उसके साथियों पर लगे थे। मई 2025 में इस मामले में दोषियों को सज़ा सुनाई गई थी।
हालांकि, यह मामला पिछले सप्ताह एक बार फिर चर्चा में आया, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने आरोप लगाया कि इस केस में सच्चाई दबाने की कोशिश की गई। इसके बाद 2026 में कथित लीक रिकॉर्डिंग सामने आईं, जिनमें न्याय की मांग की जा रही है।
इन घटनाओं के बाद बीजेपी में कुछ इस्तीफे हुए और #AnkitaBhandariKoNyayDo हैशटैग के तहत विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले।
कर्नल कोठियाल की भूमिका पर सवाल
कर्नल कोठियाल की 2022 के चुनाव में हार और उसके बाद बीजेपी में शामिल होने को कई लोगों ने अवसरवाद से जोड़ा। यह आलोचना उनके सैन्य जीवन की छवि से उलट मानी जा रही है।
उन्होंने सेना में रहते हुए कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए थे, लेकिन अब उत्तराखंड की ध्रुवीकृत राजनीति में उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर और चुप रहने वाला बताया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति और ताज़ा अपडेट
कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल इस समय उत्तराखंड की राजनीति में बीजेपी नेता के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने मई 2022 में आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी जॉइन की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में वे गंगोत्री सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे और उनकी जमानत ज़ब्त हो गई थी।
जनवरी 2026 तक, वे उत्तराखंड एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर एडवाइजरी कमेटी के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।
उनकी हालिया गतिविधियों में शामिल हैं:
-दिव्यांग कल्याण से जुड़े मुद्दों पर प्रतिनिधियों के साथ बैठकें (8 जनवरी 2026 को देहरादून स्थित RSS कार्यालय में बैठक सहित)
-लच्छीवाला जैसे क्षेत्रों में सामुदायिक संवाद
वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भी सक्रिय हैं, जहां उनका अकाउंट @ColAjayKothiyal है। वहां वे सामाजिक सेवा, ज़मीनी स्तर की गतिविधियों और उत्तराखंड के विकास से जुड़े विषयों पर पोस्ट करते रहते हैं।
अंकिता भंडारी केस पर चुप्पी
हालांकि, अंकिता भंडारी हत्याकांड के फिर से उभरने और कथित VIP लिंक को लेकर CBI जांच की मांग के बीच—जनवरी 2026 की शुरुआत तक—कर्नल कोठियाल की ओर से कोई भी सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
इसी चुप्पी को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हो रही है। कई यूज़र्स का कहना है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका रुख नरम और डरपोक हो गया है, जो उनके सैन्य पृष्ठभूमि से मेल नहीं खाता।
फिलहाल, इस आलोचना के अलावा उनसे जुड़ा कोई नया बड़ा राजनीतिक पद, चुनाव या अन्य विवाद सामने नहीं आया है। वे सार्वजनिक रूप से अब भी सामाजिक कार्यों और पूर्व सैनिकों के कल्याण को अपनी प्राथमिकता बताते हैं।
(उपरोक्त विचार लेखक के निजी हैं, जो BSF के पूर्व अधिकारी रहे हैं और जिन्होंने ऑपरेशनल यूनिट्स का नेतृत्व किया है। उन्हें सीमा प्रबंधन, CI/CT/LWE अभियानों और खुफिया कार्यों का अनुभव है।)
Last Updated on January 9, 2026 11:41 am
