Mumbai Rainwater Wastage: मानसून के दौरान 30 जून से 7 जुलाई के बीच मुंबई में 898 मिमी बारिश हुई, जो कि जुलाई महीने की औसत बारिश से भी अधिक है. मुंबई में हर दिन करीब 400 मिलियन लीटर पानी की कमी रहती है. इसके बावजूद मॉनसून में होने वाली भारी बारिश के पानी को जमा ना करके समुद्र में बहा दिया गया. लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर मुंबई में 10 दिनों के पीने का पानी समुद्र में क्यों बहा दिया गया? BMC ने इसको लेकर क्या कहा और आगे का प्लान क्या है?
4,290.5 करोड़ लीटर समुद्र में क्यों छोड़ा गया?
Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जून से 7 जुलाई के बीच मुंबई में जलभराव रोकने के लिए BMC के 19 पंपिंग स्टेशनों ने करीब 4,290.5 करोड़ लीटर बारिश का पानी समुद्र और आसपास की खाड़ियों में छोड़ दिया. यह पानी 8 पवई झीलों की कुल क्षमता के बराबर है.
इससे मुंबई की करीब 10 दिनों की पानी की जरूरत पूरी हो सकती थी. हालांकि, यह पानी समुद्र में छोड़ना जरूरी था. ऐसा इसलिए क्योंकि इन पंपों का काम भारी बारिश के दौरान शहर को डूबने से बचाना है. वहीं इस मामले पर BMC का कहना है कि इतना अधिक पानी रोकने के लिए बड़े बांध बनाने पड़ेंगे, जो कि आर्थिक रूप से संभव नहीं है.
किन 7 जलाशयों से पूरी होती है शहर में पानी की जरूरत?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई का अपना कोई बड़ा मीठे पानी का स्रोत नहीं है. शहर में पानी की जरूरत विहार, तुलसी, भातसा, तानसा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा और मोदक सागर समेत 7 जलाशयों से पूरी होती है. 31 जुलाई तक ये सभी जलाशय 88.58 फीसदी भर चुके थे.
इन जलासयों से रोजाना करीब 4,100 मिलियन लीटर पीने का पानी प्राप्त होता है. इसके बावजूद भी शहर में करीब 400 मिलियन लीटर पानी की कमी रहती है. बीएमसी का कहना है कि मुंबई को प्रतिदिन 4,664 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता रहती है.
जल संकट को दूर करने के लिए BMC का प्लान क्या है?
जल संकट के बीच मुंबई में पीने के पानी की कमी दूर करने के लिए अब बीएमसी (BMC) नए विकल्पों पर काम कर रही है. इसके तहत महाराष्ट्र का पहला डिसैलिनेशन प्लांट मनोरी में बनाया जाएगा. इस प्लांट में समुद्र के खारे पानी को साफ करके पीने लायक बनाया जाएगा. इस परियोजना का लक्ष्य हर दिन 400 मिलियन लीटर (MLD) पीने का पानी तैयार करना है. मुंबई में इस तरह का यह पहला बड़ा प्रोजेक्ट होगा.
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कब तक पूरा होगा डिसैलिनेशन प्लांट?
BMC के एडिशनल नगर आयुक्त (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बांगर के मुताबिक, पहले चरण पर करीब 3,900 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इससे 2029 तक हर दिन 200 मिलियन लीटर पानी मिलने लगेगा. उन्होंने बताया कि अगर अगले छह महीनों में दूसरे चरण के लिए मंजूरी और वर्क ऑर्डर मिल जाता है, तो पूरा प्रोजेक्ट 2029 के अंत या 2030 के बीच तक तैयार हो सकता है. करीब 12 एकड़ में बनने वाला यह प्लांट इजरायल के आधुनिक डिसैलिनेशन प्लांट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा.
Last Updated on August 3, 2026 12:54 pm
