Khajuraho: सरकारी दस्तावेज हाथ में, उजड़ती रही गरीब की रोजी-रोटी

Khajuraho Land Acquisition: बमीठा में मोहनलाल रजक की जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत अधिग्रहण कर ली गई थी. पीड़ित ने अधिग्रहण के दस्तावेज़ दिखाते हुए न्याय की गुहार लगाई है.

Khajuraho: सरकारी दस्तावेज हाथ में, उजड़ती रही गरीब की रोजी-रोटी
Khajuraho: सरकारी दस्तावेज हाथ में, उजड़ती रही गरीब की रोजी-रोटी

Khajuraho Land Acquisition: खजुराहो में हाईवे किनारे बना एक छोटा-सा टपरा…उसमें रखी वर्षों पुरानी कोयले की इस्त्री…जलते कोयलों से उठता धुआं…और उसी धुएं के बीच अपने परिवार की दो वक्त की रोटी जुटाने की कोशिश करता एक गरीब। यह सिर्फ एक व्यक्ति की तस्वीर नहीं, बल्कि उस दर्द की कहानी है जो व्यवस्था के सामने खुद को बेबस महसूस कर रहा है।

अधिग्रहित कर ली गई थी जमीन

बमीठा निवासी मोहनलाल रजक का कहना है कि वर्षों पहले उसकी कुल 11 आरे भूमि में से 7 आरे भूमि झांसी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित कर ली गई थी। पीड़ित के अनुसार बाद में शेष 4 आरे भूमि का भी अधिग्रहण किया गया। मोहनलाल का दावा है कि इन दोनों अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज़ उसके पास सुरक्षित हैं।

Khajuraho: सरकारी दस्तावेज हाथ में, उजड़ती रही गरीब की रोजी-रोटी
जमीन से जुड़े कागजात

अधिग्रहण के बावजूद नहीं मिला पूरा मुआवजा

मोहनलाल का आरोप है कि पूरी भूमि के अधिग्रहण के बावजूद उसे आज तक पूरा मुआवजा नहीं मिला। इसी बीच राजस्व अमले की कार्रवाई के बाद उसकी दुकान हटाने का आदेश जारी हो गया। पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद कुछ लोगों ने मौके पर तार फेंसिंग भी कर दी, जिससे उसकी रोज़ी-रोटी पर संकट गहरा गया।

भूमि अधिग्रहण का दस्तावेज.

कैसे चलता है परिवार का गुजारा? 

जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो वहां का दृश्य भावुक कर देने वाला था। टीन और लकड़ियों से बना छोटा-सा टपरा, कोयले से चलने वाली पुरानी इस्त्री और उसी के सहारे पूरे परिवार का जीवन चलाने की कोशिश। आधुनिक मशीनों के दौर में आज भी मोहनलाल हाथ से कोयले की राख साफ कर कपड़ों पर इस्त्री करता है। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन उम्मीद अभी भी बाकी थी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पीड़ित के पास भूमि अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज़ मौजूद हैं तो उनकी जांच किस स्तर पर हुई? यदि भूमि अधिग्रहित हो चुकी थी तो फिर उसे निजी भूमि मानकर कार्रवाई कैसे हुई? यदि दुकान हटाई गई तो उसी स्थान पर तार फेंसिंग किसके आदेश से की गई? क्या राजस्व अभिलेख और एनएचएआई के रिकॉर्ड का मिलान किया गया? या फिर एक गरीब की आवाज फाइलों में दबकर रह गई?

भू-अधिग्रहण से जुड़ा अन्य कागजात.

अधिकारियों से गुहार के बावजूद भी नहीं मिली राहत

मोहनलाल रजक का कहना है कि उसने कई बार संबंधित अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक उसे राहत नहीं मिली। उसका कहना है कि वह किसी से लड़ाई नहीं चाहता, बल्कि केवल अपनी मेहनत की कमाई और अपने परिवार का भविष्य बचाना चाहता है।

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हाइवे किनारे है छोटा सा दुकान

आज हाईवे किनारे खड़ा वह छोटा-सा टपरा सिर्फ एक दुकान नहीं है, बल्कि व्यवस्था से जवाब मांगता एक मौन सवाल है। यह सवाल सिर्फ मोहनलाल का नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों का भी है जो अपने अधिकारों के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं।

Last Updated on August 3, 2026 10:36 am

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