राजस्थान में सरकारी स्कूलों की हालत पर सवाल उठाने वाली एक टीम के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है. Cockroach Janta Party यानी CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में टीम शुक्रवार को जयपुर के पास बगरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने जा रही थी. आरोप है कि रास्ते में टीम पर हमला किया गया.
मामला सिर्फ कथित हमले तक सीमित नहीं है. जिस स्कूल का निरीक्षण करने टीम जा रही थी, वहां बच्चों को कथित तौर पर एक अस्थायी ढांचे में पढ़ाया जा रहा है, जिसे लेकर आरोप है कि वहां भैंसें भी रखी जाती हैं.
स्कूल की बिल्डिंग असुरक्षित हुई तो बच्चों को कहां भेजा गया?
मामला उस सरकारी स्कूल से जुड़ा है जिसकी मूल इमारत को पिछले साल असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था.
इसके बाद छात्रों को पास के एक अस्थायी परिसर में शिफ्ट किया गया. आरोप है कि इसी जगह पर बच्चों की पढ़ाई के साथ भैंसें भी रखी जाती हैं.
इसी स्थिति की पड़ताल के लिए CJP की टीम स्कूल पहुंच रही थी.
सवाल सीधा है – जिस जगह बच्चों का भविष्य बनना चाहिए, वहां अगर पढ़ाई के लिए भी पक्की छत न हो तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था का दावा कितना मजबूत है?
निरीक्षण से पहले टीम पर हमला
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, आशुतोष रांका के नेतृत्व वाली CJP टीम पर शुक्रवार को कथित तौर पर हमला किया गया.
घटना ऐसे समय सामने आई है जब राजस्थान के सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर सरकार के अपने आंकड़े भी कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल बिना अपनी बिल्डिंग के
राजस्थान सरकार की ओर से विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, UDISE 2025-26 के तहत राज्य के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपनी बिल्डिंग नहीं है.
इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं.
सबसे ज्यादा ऐसे स्कूल झालावाड़ के अकलेरा ब्लॉक में हैं, जहां 23 स्कूल बिना अपनी इमारत के चल रहे हैं. इसके बाद झालावाड़ के ही खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 स्कूल हैं.
फलोदी के बाप में 11 और बांसवाड़ा के छोटीसरवन में 10 स्कूल ऐसे हैं.
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी 38 सरकारी स्कूल बिना अपनी बिल्डिंग के चल रहे हैं.
सिर्फ छत नहीं, टॉयलेट और पानी की भी कमी
मामला सिर्फ स्कूल की इमारत का नहीं है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में अपनी बिल्डिंग वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 स्कूलों में टॉयलेट की सुविधा नहीं है.
वहीं 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है.
टॉयलेट की कमी के मामले में बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर सबसे ऊपर हैं. वहीं पीने के पानी की सुविधा नहीं होने वाले स्कूलों में दौसा, उदयपुर और अलवर प्रमुख जिलों में हैं.
विपक्ष ने सरकार पर उठाए सवाल
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने सरकार पर सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर सवाल उठाए.
जूली ने पिछले साल हुए एक ऑडिट का हवाला देते हुए दावा किया कि 3,768 सरकारी स्कूलों की इमारतें पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित घोषित की गई थीं.
उन्होंने यह भी दावा किया कि 83,783 क्लासरूम इस्तेमाल के लिए असुरक्षित पाए गए.
विपक्ष का आरोप है कि स्कूलों को बंद करने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की वजह से सरकारी स्कूलों में नामांकन भी प्रभावित हुआ है.
सरकार का जवाब: मरम्मत और निर्माण के लिए करोड़ों रुपये
राज्य सरकार ने हालांकि कहा है कि स्कूलों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है.
सरकार के मुताबिक, स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 550 करोड़ रुपये और बिना बिल्डिंग वाले या जर्जर इमारतों में चल रहे स्कूलों के लिए नई बिल्डिंग बनाने पर 450 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं.
इसके अलावा सरकार का कहना है कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट, समग्र शिक्षा, राज्य निधि, SDRF, CSR और स्थानीय क्षेत्र विकास निधि समेत कई स्रोतों से स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल 2,500 करोड़ रुपये, यानी पांच साल में 12,500 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे.
असली सवाल बच्चों की पढ़ाई का है
सरकार बजट का हवाला दे रही है. विपक्ष स्कूलों की हालत पर सवाल उठा रहा है. आंकड़े बता रहे हैं कि सैकड़ों स्कूलों के पास अपनी बिल्डिंग तक नहीं है.
और दूसरी तरफ बगरू से सामने आई तस्वीरों और आरोपों में बच्चों के लिए अस्थायी परिसर में पढ़ाई की बात सामने आ रही है.
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तो सवाल सिर्फ यह नहीं कि राजस्थान में कितने स्कूलों की बिल्डिंग नहीं है. सवाल यह है कि जिन बच्चों के लिए स्कूल बनाए गए हैं, उन्हें पढ़ने के लिए सुरक्षित कमरा, साफ पानी और जरूरी सुविधाएं कब मिलेंगी?
क्योंकि शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा अपनी जगह है. लेकिन अगर बच्चा स्कूल की जगह अस्थायी ढांचे में पढ़ने को मजबूर है, तो फिर असली परीक्षा बजट की नहीं, उस पैसे से जमीन पर बदली हुई तस्वीर की है.
Last Updated on August 22, 2026 9:26 am
