घर नहीं लौटे किसान, कलेक्ट्रेट को ही बना लिया ठिकाना… मुआवजे की लड़ाई में परिवार भी साथ

झाबुआ में बदनावर-टिमरवानी फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा. किसान कलेक्ट्रेट परिसर में ही रात गुजार रहे हैं और वहीं खाना बना रहे हैं. महिला किसान और बच्चे भी धरने में शामिल हैं. प्रशासन और NHAI अधिकारियों ने बातचीत की, लेकिन मुआवजे पर अभी सहमति नहीं बन सकी.

मुआवजे पर नहीं बनी बात, कलेक्ट्रेट में डटे किसान
मुआवजे पर नहीं बनी बात, कलेक्ट्रेट में डटे किसान

– धीरेंद्र गुप्ता

झाबुआ में बदनावर-टिमरवानी फोरलेन के मुआवजे को लेकर किसानों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी है. किसान गुरुवार दोपहर 12 बजे से कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे हैं. शुक्रवार की रात भी उन्होंने धरना स्थल पर ही बिताई. वहीं खाना बनाया और खाया. प्रदर्शन में महिला किसान और बच्चे भी शामिल हैं.

कलेक्ट्रेट में ही बना किसानों का ठिकाना

फोरलेन के मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने झाबुआ कलेक्ट्रेट परिसर में डेरा डाल रखा है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बदनावर-टिमरवानी फोरलेन निर्माण के दौरान उनकी जमीन के लिए उन्हें नियमों के मुताबिक मुआवजा नहीं दिया जा रहा है.

अपनी मांग पर अड़े किसानों ने धरना खत्म करने के बजाय रात भी कलेक्ट्रेट परिसर में ही बिताने का फैसला किया.

धरना स्थल पर बनाया खाना, वहीं खाया

प्रदर्शन अब सिर्फ कुछ घंटों का नहीं रहा.

किसानों ने धरना स्थल पर ही रात गुजारी. वहीं भोजन बनाया और खाया. प्रदर्शन में महिला किसान और बच्चे भी मौजूद हैं.

यानी मुआवजे की लड़ाई अब किसानों के लिए सड़क से लेकर कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच चुकी है.

अधिकारियों ने की बातचीत, नहीं बनी बात

गुरुवार शाम किसानों से बातचीत के लिए एसडीएम और NHAI के अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे.

अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर किसानों से बातचीत की और मुआवजे समेत दूसरी प्रक्रियाओं की जानकारी दी.

लेकिन बातचीत के बावजूद किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी.

प्रशासन को जल्द समाधान की उम्मीद

एसडीएम मेघनगर अवंधती प्रधान के मुताबिक, प्रशासन ने किसानों को मुआवजे और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी है.

वहीं NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र चापेकर भी किसानों से बातचीत में शामिल रहे.

अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन किसानों के साथ तालमेल बनाकर जल्द से जल्द धरना प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश करेगा.

सवाल मुआवजे का है, लेकिन इंतजार कब तक?

किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी जमीन का नियम के मुताबिक मुआवजा मिलना चाहिए. दूसरी तरफ प्रशासन और NHAI का कहना है कि प्रक्रिया को समझाने और समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है.

लेकिन किसान दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट में डटे हैं.

सवाल सिर्फ इतना नहीं कि फोरलेन कब बनेगा. बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन पर विकास की सड़क दौड़नी है, उस जमीन के मालिक किसान अपने हक के मुआवजे के लिए आखिर कितनी रातें धरना स्थल पर बिताएंगे?

क्या प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत अब किसी ठोस समाधान तक पहुंचेगी, या मुआवजे की यह लड़ाई आगे भी इसी तरह चलती रहेगी?

Last Updated on August 21, 2026 9:08 pm

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