बाढ़ में रास्ता बंद तो ड्रम के सहारे शव को घर पहुंचाया, रीवा में सामने आई व्यवस्था की दर्दनाक तस्वीर

रीवा के सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के जवा जनपद की ग्राम पंचायत रौली में बाढ़ ने एक परिवार की अंतिम यात्रा भी मुश्किल बना दी. मोतीलाल तिवारी का शव घर तक पहुंचाने का रास्ता पानी में डूबा था. ग्रामीणों ने ड्रम बांधकर उस पर शव रखा और बाढ़ का पानी पार कराया. घटना ने स्थानीय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.

ड्रम पर शव... बाढ़ में अंतिम यात्रा!
ड्रम पर शव... बाढ़ में अंतिम यात्रा!

– धीरेंद्र गुप्ता

Madhya Pradesh के रीवा जिले (Rewa District) के सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ के कारण एक परिवार को अपने परिजन की अंतिम यात्रा में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. जवा जनपद की ग्राम पंचायत रौली में ग्रामीणों ने ड्रम को आपस में बांधकर उसके ऊपर शव रखा और बाढ़ के पानी को पार कराते हुए शव को घर तक पहुंचाया.

घटना का वीडियो और तस्वीर सामने आने के बाद बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

संजय गांधी अस्पताल में हुई थी मौत

रौली निवासी मोतीलाल तिवारी का संजय गांधी अस्पताल, रीवा में निधन हो गया था. अस्पताल से उनका शव गांव स्थित घर लाया गया, लेकिन बाढ़ के पानी के कारण घर तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह बाधित था.

परिजनों और ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि शव को घर तक कैसे पहुंचाया जाए.

जब कोई दूसरा रास्ता नहीं मिला तो ग्रामीणों ने ड्रम को आपस में बांधा और उसके ऊपर शव को रखा. इसके बाद बाढ़ के पानी के बीच से ड्रम को खींचकर शव को घर तक पहुंचाया गया.

घर पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार किया गया.

मदद मांगने पर कथित तौर पर इनकार का आरोप

परिजनों और ग्रामीणों ने स्थानीय पंचायत व्यवस्था पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं.

उनका आरोप है कि शव को घर तक पहुंचाने में मदद के लिए जब महिला सरपंच से संपर्क किया गया, तो कथित तौर पर सरपंच और उनके देवर एवं GRS विवेक तिवारी ने मदद करने से इनकार कर दिया.

ग्रामीणों के मुताबिक उनसे कहा गया कि “यह हमारा काम नहीं है.”

हालांकि, इस आरोप पर संबंधित सरपंच और GRS का पक्ष सामने आना बाकी है.

ग्रामीणों ने इस कथित रवैये को बेहद असंवेदनशील बताते हुए प्रशासन से पूरे मामले की जांच की मांग की है.

बाढ़ में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ीं

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण कई रास्ते बंद हैं और लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

लेकिन किसी व्यक्ति की मौत के बाद भी अगर शव को घर तक पहुंचाने के लिए ड्रम का सहारा लेना पड़े, तो यह सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि बाढ़ के दौरान जमीनी स्तर पर मौजूद व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल है.

सवाल यह है कि आपदा या बाढ़ जैसी स्थिति में प्रशासन की ओर से ऐसी परिस्थितियों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?

क्या प्रभावित गांवों में शवों को सुरक्षित तरीके से घर या अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था मौजूद है?

और अगर पंचायत स्तर पर मदद उपलब्ध नहीं थी, तो ऐसी स्थिति में परिवार किससे मदद मांग सकता है?

रौली की यह तस्वीर अब इन सवालों को सामने ला रही है कि बाढ़ सिर्फ रास्ते ही बंद कर रही है या सरकारी व्यवस्था की कमियां भी उजागर कर रही है?

Last Updated on August 25, 2026 11:19 am

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