US Elections: अमेरिकी संसद से विधानसभा तक भारतीयों की जीत, भारत में घुसपैठ पर बहस क्यों?

अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती मौजूदगी ने भारत की इमिग्रेशन और नागरिकता नीति पर नई बहस छेड़ दी है. अमेरिकी संसद और राज्य विधानसभाओं में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की जीत के बहाने यह लेख सवाल उठाता है कि भारत पड़ोसी देशों के प्रतिभाशाली लोगों के लिए कानूनी रास्ते क्यों नहीं बनाता.

अमेरिका में भारतीयों की राजनीतिक ताकत बढ़ी, क्या भारत को सीखने की जरूरत है?
अमेरिका में भारतीयों की राजनीतिक ताकत बढ़ी, क्या भारत को सीखने की जरूरत है?

US Elections: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में, भारतीयों ने अपना डंका बजा दिया है. केंद्रीय संसद में 5 भारतीय सांसद चुने गए हैं, वही राज्यों की विधानसभा में 30 से अधिक विधायक भारतीय हैं. अमेरिकी लोकसभा ( US कांग्रेस) मे अमी बेरा तथा रो खन्ना कैलिफोर्निया से, प्रमिला जयपाल वाशिंगटन से, सुहास सुब्रमण्यम वर्जिनिया से, अमिश शाह एरिजोना से, औऱ पिया दांडिया फ्लोरिडा से जीती. पिया डांडिया मशहूर सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर, भक्त संहारक, अवि डांडिया की भतीजी हैं. इसके अलावे राज्यों मे अरुणा मिलर मैरीलैंड की डिप्टी गवर्नर बनी.

रंजीव पुरी मिशिगन, प्रिया सुंदरेशन – एरिजोना, ज्योत सिंह जॉर्जिया, पूजा सेठी टेक्सस विधानसभा मे जीती. नबीला सैयद, सबा हैदर औऱ राम विल्लिवालम इलिनॉय मे, लिसा कौल औऱ अनिल बीफन न्यूयॉर्क राज्य मे, जय चौधरी नॉर्थ कैरोलिना, अरविंद वेंकट पेंसिल्वेनिया – आश कालरा कैलिफोर्निया मे विधायकी जीते. मंका ढींगरा वाशिंगटन में, अमर मुकुंदा मैरीलैंड में, कृष सुब्रह्मण्यन में, सुजाता गडकर कनेक्टिकट में, अनिता सोमानी ओहायो में, रेनुका मायादेव विस्कॉन्सिन में विधायक हुई.

केशा राम हिंसडेल औऱ निखिल गोयल वरमोंट मे जीते. सबी कुमार टेनेसी में, मेगन श्रीनिवास (आयोवा), निमा कुलकर्णी (केंटकी), रूबेन डी’सिल्वा (नेवादा), रीना स्ज़ेपांस्की (न्यू मैक्सिको), वंदना स्लैटर (वाशिंगटन मे विधायक हुए. इनके मां-बाप, किसी कंपनी के सस्ते मजदूर बनकर, किसी छोटे-मोटी दुकान, होटल मोटल चलाने अमेरिका पहुंचे थे. अगर इसी तरह से ये लोग, किसी अन्य देश से, हिंदुस्तान मे आए होते, तो यहां घुसपैठिये कहलाते.

ऐसे 3 करोड़ घुसपैठिये, (जिसमे से पूरे साढ़े सात सौ, ज्यादातर नेपाली, अब तक खोज भी लिए हैं ) को निकालने की कसम हमारे गृह मंत्री ने खाई है. ऐसा देश, जो ढाई तीन करोड़ बच्चे, बैठे बैठे हर साल, सिर्फ मनोरंजन के लिए पैदा कर लेता है. या जिस देश मे 13 करोड लोग मताधिकार से वंचित किया जा चुके हैं. और जो देश अपने आप को भीतर से तोड़ने में लगा हुआ है, ताकि इस देश को घुसपैठियो से बचाया जा सके. उस देश के 4 करोड़ से ज्यादा घुसपैठिए दुनिया के अलग-अलग देश में जमे बैठे हैं.

दांत निपोरकर धंधा पानी कर रहे हैं. झूमकर राजनीति कर रहे हैं. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधायक बन रहे हैं. वहां इंडियन मीडिया – “इंडियन पावर राइजिंग”, “इंडियन मेक देयर मार्क” जैसी खुशनुमा हैडलाइन बना रहे हैं. पाखंड की हद है.

आप कह सकते हैं कि फर्क है- यह लोग वहां जाकर लीगली बसे हैं. बंग्लादेशी घुसपैठिए तो इलीगली आते हैं. लेकिन यह असल बात नहीं. फर्क दरअसल यह है कि इन देशों ने कानूनन लीगल रास्ते दिए है. लेकिन आपके पास बांग्लादेश नेपाल श्रीलंका भूटान से आने वालों के लिए कोई H1B,वर्क वीजा, PR की व्यवस्था नहीं है. आप भी दीजिए न!!!

प्रॉपर दस्तावेज हो, उनकी मान्यता हो. राज्य की सुरक्षा हो. उन देशों की मार्कशीट से, यहां नौकरी लेना संभव हो।. जॉब से लेकर भाड़े का मकान लेने की सुविधा, सीधे रास्ते से उपलब्ध हो. तो कोई छुपकर क्यों आएगा?? आप साल में ऐसे 20 लाख वीजा जारी करने की सीमा रख सकते हैं. जैसा कि अमेरिका करता है. अच्छे टैलेंटेड लोग, यदि आपकी सारी नियम शर्त पूरी करें तो 10-15 साल बाद कोई ग्रीन कार्ड या नागरिकता दे दीजिए. बनने दो उन्हें विधायक, सांसद, औऱ राष्ट्रपति.

दुनिया के बेस्ट टैलेंट को अमेरिका इसी तरीके से खींचता है. आप कम से कम पड़ोस के चार देशों का बेस्ट टैलेंट खींच लीजिए. इस काम से आपको ऐतराज नहीं है. दरअसल आप कर भी रहे हैं परंतु धर्म के आधार पर. CAA से अफगानिस्तान पाकिस्तान नेपाल बांग्लादेश कि हिंदू आयात करने का कानून बाकायदा पास कर चुके हैं. लेकिन टैलेंटेड लोगों को लाने का नहीं करेंगे. मुद्दा बरसों तक सुलगाए रखेंगे. मगर उन्हें खोजने ढूंढने के लिए अपने ही देश की हड्डियां तोड़ेंगे.

इसी भयंकर सोच की वजह से यह पूरी सरकार, रोज-रोज NRC, SIR, आधार – पता नहीं कितने किस्म के ड्रामा करती है. और उसका महामूर्ख चेलों का समूह उनके साथ छाती पीटता रहता है. फिर वही लोग, ब्रिटेन अमेरिका यह किसी भी देश में भारतीयों के, वहां के पॉलिटिकल सिस्टम में घुसकर कब्जा करने की घुसपैठ पर सीना चौड़ा करके घूमते हैं. शास्त्रों में इसे बेशर्मी कहा गया है. इसलिए मैंने कहा – आज अमेरिका में भारतीयों की बेशर्मी का डंका बज रहा है.

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नोट: लेख में भारत की सरकार, CAA, NRC, SIR और घुसपैठ को लेकर जो तीखे आरोप और व्यंग्य हैं, उन्हें लेखक की राय के रूप में प्रस्तुत किया गया है. न्यूज़ मुनि किसी दावे का समर्थन नहीं करता है.

Manish Singh के फेसबुक पेज (@RebornManish ) से…

Last Updated on November 8, 2026 7:37 am

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