मंगलवार को हुए अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को ऐसी करारी हार मिली, जिसे राजनीतिक झटका, शर्मनाक शिकस्त और अस्तित्व पर संकट – तीनों के रूप में देखा जा सकता है. रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले राज्यों में भी उसके उम्मीदवार ताश के पत्तों की तरह ढह गए.
डेमोक्रेट्स ने कंसास में 1932 के बाद पहली बार, टेक्सास में 1988 के बाद पहली बार और साउथ कैरोलिना में 1998 के बाद पहली बार सीनेट सीटें जीतीं.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद अब तक केवल तीन बार ऐसा हुआ था, जब किसी मिडटर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा और सीनेट – दोनों का नियंत्रण एक पार्टी से दूसरी पार्टी के हाथ में चला गया था. ऐसा 1946, 1994 और 2006 में हुआ था. अब एक बार फिर इतिहास दोहराया गया है.
इसका मतलब है कि अमेरिकी कांग्रेस अब ट्रंप की कार्यकारी शक्तियों के विस्तार के खिलाफ एक मजबूत दीवार बन सकती है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को तुरंत यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनका नाम चुनाव में उम्मीदवारों की सूची में नहीं था. लेकिन उनकी मौजूदा राजनीतिक कमजोरी के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी खुद उन्हीं की है. उन्होंने अपनी पार्टी को इस स्थिति तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है.
दरअसल, पिछले कई महीनों से ट्रंप लगातार मतदाताओं से ऐसे व्यवहार करने की अपील कर रहे थे, मानो वे भी चुनाव लड़ रहे हों. उन्होंने अपनी पार्टी के लिए प्रचार करने के बजाय कई बार ऐसे कदम उठाए, जिनसे रिपब्लिकन उम्मीदवारों की मुश्किलें और बढ़ गईं.
2024 में राष्ट्रपति चुनाव जीतते समय ट्रंप ने महंगाई कम करने और विदेशों में चल रहे युद्ध खत्म कराने का वादा किया था. लेकिन उनकी टैरिफ नीतियों ने कीमतों पर बढ़ते दबाव को और बढ़ा दिया. इसके बाद ईरान पर उनके असफल और विवादास्पद हमले ने हालात को और बिगाड़ दिया.
इसके अलावा ट्रंप का चुनाव प्रचार भी बेहद अजीब और विवादास्पद रहा. उनके भाषण लंबे, बेतरतीब और कई बार विषय से भटके हुए थे. इनमें इमारतों और निर्माण परियोजनाओं पर लंबी बातें, इस्लाम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां और ओहायो के एक रिपब्लिकन सीनेटर के शरीर को लेकर अशोभनीय टिप्पणी तक शामिल थी.
उनके प्रचार अभियान का अंत लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल में हुआ, जहां उन्होंने शैवाल के खिलाफ युद्ध में जीत की घोषणा कर दी.
लेकिन मतदाताओं का संदेश साफ था – अब बहुत हो चुका.
महंगाई और भ्रष्टाचार ने ट्रंप को कितना नुकसान पहुंचाया?
अब रिपब्लिकन पार्टी के भीतर इस हार की समीक्षा शुरू होगी. एसोसिएटेड प्रेस के एग्जिट पोल के मुताबिक, मतदाताओं के लिए जीवनयापन की बढ़ती लागत और सरकारी भ्रष्टाचार सबसे बड़े मुद्दे थे.
ट्रंप खुद को आर्थिक मुद्दों पर आम लोगों का समर्थक बताते रहे हैं. लेकिन एक तरफ आम अमेरिकी परिवार खाने-पीने की चीजों का खर्च उठाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप अपनी संपत्ति बढ़ाने और व्हाइट हाउस में आलीशान बॉलरूम बनवाने जैसी परियोजनाओं को लेकर चर्चा में थे.
उनका यह रवैया उनके उन समर्थकों के एक हिस्से को भी पसंद नहीं आया, जिन्हें अब तक उनका सबसे मजबूत और भरोसेमंद वोट बैंक माना जाता था.
अब सवाल है कि इस बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति से ट्रंप कैसे निपटेंगे? क्या यह उनके राजनीतिक अंत की शुरुआत है?
जनवरी से डेमोक्रेट्स के पास कई अहम अधिकार होंगे. वे विधेयकों को रोक सकते हैं, ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच शुरू कर सकते हैं और न्यायपालिका तथा वरिष्ठ सरकारी पदों पर उनकी नियुक्तियों में बाधा डाल सकते हैं.
इसका मतलब है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जैसे अधिकारियों और एलन मस्क जैसे बड़ी टेक कंपनियों के नेताओं के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ तीसरी बार महाभियोग चलाने पर भी विचार कर सकते हैं.
ऐसी स्थिति में ट्रंप खुद को राजनीतिक रूप से घिरा हुआ पा सकते हैं. वॉशिंगटन में विधायी गतिरोध के बीच उनकी राजनीतिक ताकत कम हो सकती है और वे राष्ट्रपति के तौर पर अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करने तक सीमित हो सकते हैं. मंगलवार शाम को ही उन्होंने वीटो का इस्तेमाल करने की धमकी देना शुरू कर दिया था.
क्या कांग्रेस में हार के बावजूद ट्रंप अपनी नीतियां जारी रखेंगे?
हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि ट्रंप ने अपने पहले दो वर्षों के कार्यकाल में कांग्रेस की भूमिका को बहुत ज्यादा महत्व नहीं दिया था. टैक्स और सरकारी खर्च से जुड़े उनके ‘Big, Beautiful Bill Act’ को पारित कराने के अलावा उन्होंने कई बड़े फैसले एकतरफा तरीके से लिए.
टैरिफ लगाने से लेकर वेनेजुएला और ईरान पर सैन्य हमलों तक, ट्रंप ने कई मामलों में कांग्रेस की भूमिका को दरकिनार किया.
ऐसे में यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस में डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से ट्रंप की हर नीति रुक जाएगी.
अपने पूर्ववर्तियों की तरह ट्रंप भी विदेश नीति को अपनी राजनीतिक विरासत बनाने के एक बड़े माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. दुनिया के लिए यह संभावना चिंता बढ़ाने वाली है.
इसके अलावा ट्रंप का एक और पुराना जुनून जारी रह सकता है – वॉशिंगटन की तस्वीर को पूरी तरह बदलना. इसमें व्हाइट हाउस में नया बॉलरूम बनवाना, एक विशाल विजय द्वार (Triumphal Arch) तैयार करना और इमारतों में सोने की सजावट बढ़ाना शामिल है.
संभव है कि कांग्रेस इस तरह की परियोजनाओं को ट्रंप को व्यस्त रखने का अपेक्षाकृत कम नुकसानदेह तरीका माने. क्योंकि उनके पास दूसरे मोर्चों पर इससे कहीं ज्यादा बड़ा राजनीतिक और वैश्विक नुकसान पहुंचाने की क्षमता है.
ट्रंप के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
डेमोक्रेट्स की जांच और राजनीतिक विरोध से भी बड़ा खतरा ट्रंप के सामने समय का है. 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, इसकी राजनीतिक दौड़ अभी से शुरू हो चुकी है.
ट्रंप के लिए यह स्थिति मनोवैज्ञानिक रूप से आसान नहीं होगी. वह ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं, जिन्हें लगातार मीडिया की सुर्खियों और राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने रहना पसंद है.
लेकिन अब धीरे-धीरे अमेरिका का राजनीतिक ध्यान जेडी वेंस, मार्को रुबियो और दूसरे संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवारों की तरफ जा सकता है.
इस बदलाव का असर ट्रंप के रिपब्लिकन पार्टी पर लगभग पंथ जैसी पकड़ और MAGA आंदोलन के वर्चस्व पर भी पड़ सकता है.
पिछले एक दशक में ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी को अपनी छवि के अनुरूप ढाला है. पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही. ऐसे में उसका तुरंत अपने पुराने स्वरूप में लौटना आसान नहीं होगा.
लेकिन मंगलवार की हार के बाद नुकसान का आकलन कर रहे रिपब्लिकन सांसद यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ट्रंप अब अतीत की राजनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं. उनका अपना राजनीतिक भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे आने वाले समय के लिए सही राजनीतिक दांव लगाते हैं या नहीं.
क्या ट्रंप युग का अंत हो गया है?
चुनावों में सत्ता का झुकाव बदलते ही उसके राजनीतिक अर्थ को अक्सर जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है.
ट्रंप की दोनों राष्ट्रपति चुनावों में जीत को अमेरिका की राजनीति में एक बुनियादी बदलाव के रूप में देखा गया था. जबकि सच्चाई यह है कि वे कभी भी राष्ट्रीय स्तर पर 50 फीसदी से अधिक लोकप्रिय वोट हासिल नहीं कर पाए.
2020 में उनकी हार के बाद भी यह दावा किया गया था कि ट्रंप युग खत्म हो गया है. लेकिन चार साल बाद उन्होंने राजनीतिक वापसी करते हुए फिर राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया.
इसलिए मंगलवार के चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत के बाद जो लोग ट्रंप युग के अंत की घोषणा कर रहे हैं, उन्हें एक बात याद रखनी चाहिए. ट्रंप अभी अपने दूसरे कार्यकाल के आधे रास्ते तक भी नहीं पहुंचे हैं.
और उनकी राजनीतिक प्रवृत्ति को देखते हुए डेमोक्रेट्स से लड़ने का मौका उन्हें फिर से सक्रिय कर सकता है.
लेकिन एक घायल और राजनीतिक रूप से कमजोर ट्रंप, जिन्हें लगे कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है, आने वाले दो वर्षों में पहले से कहीं ज्यादा लापरवाह और खतरनाक साबित हो सकते हैं.
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यही इस चुनाव का सबसे बड़ा विरोधाभास है. डेमोक्रेट्स की जीत ने ट्रंप की राजनीतिक ताकत को कमजोर जरूर किया है, लेकिन सत्ता के आखिरी दो वर्षों में घिरा हुआ राष्ट्रपति अमेरिका और दुनिया के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है.
Last Updated on November 5, 2026 9:02 am
