Mahatma Gandhi on Peaceful Democratic Protest: नीट पेपर लीक को लेकर देश में युवा छात्रों के आंदोलन का असर यह हुआ कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा. सीजेपी के छात्र आंदोलन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से छात्र-आंदोलनकारी इकट्ठा हुए थे. अंदोलन के पहले दिन से छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े थे. इसके अलावा एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी 28 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे. वांगचुक परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे.
हालांकि, उन्होंने सरकार के लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन तोड़ा. उनका अनशन खत्म कराने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे थे. देश में छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा की खबरें भी आईं. छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे गए. इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने पैलट गन का भी इस्तेमाल किया था. इसकी जानकारी संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दी. इन दिनों जब देश में छात्र आंदोलनों और लोकतांत्रिक विरोध पर बहस हो रही है, तब गांधी के ये विचार फिर से चर्चा में हैं.
भागलपुर के छात्र आंदोलन में महात्मा गांधी ने क्या कहा था?
महात्मा गांधी ने 15 अक्टूबर 1917 को बिहार के भागलपुर में छात्रों के एक सम्मेलन को संबोधित किया था. यह भाषण चंपारण सत्याग्रह की सफलता के कुछ महीनों बाद हुआ था. छात्र सम्मेलन में उन्होंने कहा- “छात्र सम्मेलन के इस सत्र की अध्यक्षता करने के लिए मुझे बुलाकर आपने मुझे मानो अपने से बांध लिया है. मैं 25 सालों से छात्रों के संपर्क में रहा हूं… वे मुझसे बेपनाह प्यार करते हैं. आज इस बैठक की अध्यक्षता करने के लिए मुझे बुलाकर और मुझे हिंदी में बोलने और कार्यवाही भी हिंदी में चलाने की इजाज़त देकर, आप छात्रों ने मुझे अपने प्यार का सबूत दिया है.”
महात्मा गांधी का 1917 का भागलपुर भाषण आज भी क्यों है प्रासंगिक?
महात्मा गांधी ने 15 अक्टूबर 1917 को बिहार के भागलपुर में छात्रों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि छात्रों का उद्देश्य सिर्फ परीक्षा पास करना या नौकरी पाना नहीं होना चाहिए. शिक्षा का असली मकसद अच्छा इंसान बनना, समाज की सेवा करना और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाना है. उन्होंने कहा कि पढ़ाई का ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग लोगों की भलाई के लिए किया जाए.
मातृभाषा पर क्यों दिया जोर?
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सम्मेलन में हिंदी में बोलने पर खुशी जताई थी. उनका मानना था कि शिक्षा और संवाद अपनी भाषा में होने चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उससे जुड़ सकें. उन्होंने विदेशी भाषा के महत्व से इनकार नहीं किया था लेकिन यह भी काहा कि अपनी भाषा की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.
क्या है सविनय अवज्ञा का मतलब?
गांधी ने चंपारण सत्याग्रह के दौरान पहली बार भारत में बड़े स्तर पर सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience) का प्रयोग किया. इसका अर्थ था कि यदि कोई कानून अन्यायपूर्ण हो, तो उसका अहिंसक और खुले तौर पर विरोध किया जाए। कानून तोड़ने वाला व्यक्ति हिंसा न करे और अपने कृत्य की जिम्मेदारी भी स्वीकार करे. यही विचार आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान बना.
चंपारण सत्याग्रह क्यों था खास?
1917 में बिहार के चंपारण में नील की खेती करने वाले किसान अंग्रेज बागान मालिकों के अत्याचार से परेशान थे. महात्मा गांधी वहां पहुंचे और प्रशासन के आदेश के बावजूद क्षेत्र छोड़ने से इनकार कर दिया. उन्होंने किसानों की शिकायतें दर्ज कीं, हजारों किसानों के बयान जुटाए और सरकार को जांच के लिए मजबूर किया. आखिरकार किसानों को राहत मिली. यह आंदोलन महात्मा गांधी के भारत में पहले सफल जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ.
आज के दौर में क्यों याद किया जा रहा है यह भाषण?
हाल के छात्र आंदोलनों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी पर हो रही चर्चाओं के बीच गांधी का भागलपुर भाषण फिर प्रासंगिक माना जा रहा है. इसमें उन्होंने छात्रों से सवाल पूछने, समाज के प्रति जिम्मेदार बनने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की थी. उनके विचार बताते हैं कि बदलाव का रास्ता संवाद, सत्य और अहिंसा से भी निकाला जा सकता है.
Last Updated on August 3, 2026 5:21 pm
