ऑस्ट्रेलिया का नया कानून क्या Meta, Instagram और TikTok की मनमानी रोकेगा?

ऑस्ट्रेलिया बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए वैश्विक गठबंधन बनाने की तैयारी कर रहा है. प्रस्तावित Digital Duty of Care बिल के तहत Meta, Instagram, TikTok और YouTube जैसी कंपनियों पर सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी बढ़ सकती है. नियमों में एल्गोरिदम बंद करने का विकल्प, सालाना जोखिम आकलन और भारी जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है.

ऑनलाइन कंटेंट और AI चैटबॉट पर सख्ती, बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या बदलेगा?
ऑनलाइन कंटेंट और AI चैटबॉट पर सख्ती, बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या बदलेगा?
Australia Social Media Law: पिछले साल दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट रखने पर प्रतिबंध लगाने के बाद, ऑस्ट्रेलिया सरकार अब ऑनलाइन नुकसान से निपटने की अपनी मुहिम को वैश्विक स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है. प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की सरकार चाहती है कि दूसरे देश भी साथ आएं और Meta जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने का दबाव डालें.

ऑस्ट्रेलिया की संचार मंत्री अनिका वेल्स इस मुद्दे पर अलग-अलग देशों को एक वैश्विक गठबंधन में जोड़ने की कोशिश कर रही हैं. उनका मानना है कि बच्चों को ऑनलाइन यौन सामग्री, हिंसा, शोषण करने वालों और डीपफेक जैसी समस्याओं से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर काम करना जरूरी है.

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए वैश्विक सहयोग की तैयारी

ब्लूमबर्ग से बातचीत में वेल्स ने कहा कि प्रस्तावित गठबंधन एक साझा मॉडल तैयार कर सकता है, जिसके जरिए दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए जवाबदेह बनाया जा सके.

वेल्स के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया इस प्रस्तावित कानून के जरिए दूसरे देशों के साथ ऑनलाइन सुरक्षा के साझा मानक बनाने पर काम करना चाहता है. खास तौर पर बच्चों की सुरक्षा इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है.

उन्होंने बताया कि मलेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड, कनाडा, स्वीडन और ब्रिटेन समेत कई देशों के अधिकारियों के साथ इस योजना पर चर्चा हो चुकी है. आने वाले हफ्तों में अन्य देशों के साथ भी बातचीत प्रस्तावित है.

तीन छोटे बच्चों की मां और 41 वर्षीय वेल्स ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां संसाधनों और ताकत के मामले में बेहद प्रभावशाली हैं. ऐसे में उनका मुकाबला करने के लिए दुनिया भर के कानून निर्माताओं को मिलकर काम करना होगा.

उनका यह बयान ऑस्ट्रेलिया सरकार की ओर से व्यापक कानून का प्रस्ताव पेश किए जाने के करीब एक सप्ताह बाद आया है. इस प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट तक, डिजिटल सेवाओं को अपने उत्पादों में शुरुआत से ही सुरक्षा उपाय शामिल करने होंगे.

टेक कंपनियों पर बढ़ेगा नियामकीय दबाव

अगर ऑस्ट्रेलिया के प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता है, तो Meta के Facebook और Instagram, ByteDance के TikTok तथा Snapchat की मूल कंपनी Snap जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है.

बच्चों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर इन प्लेटफॉर्म की पहले से ही जांच और कानूनी चुनौतियां बढ़ रही हैं. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ऑस्ट्रेलिया की इस पहल की आलोचना की है. उसकी चिंता है कि अमेरिकी टेक कंपनियों पर लागू सख्त नियम दूसरे देशों में भी अपनाए जा सकते हैं.

Meta के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग की कंपनी को भी अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन और बच्चों पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में कंपनी ने अमेरिका के 29 राज्यों की ओर से सोशल मीडिया से जुड़े दावों के निपटारे के लिए 18 अरब डॉलर तक भुगतान करने पर सहमति जताई थी. समझौते के तहत युवाओं के स्क्रॉलिंग समय पर पाबंदियों समेत कुछ नए सुरक्षा उपाय भी शामिल थे.

ऑस्ट्रेलिया में भी नियमों का पालन कराने को लेकर चुनौतियां सामने आई हैं. वेल्स ने कहा कि सरकार Facebook, Instagram, TikTok, Snapchat और Google के YouTube के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की उम्मीद कर रही है. इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया.

क्या है Digital Duty of Care बिल?

प्रस्तावित कानून को Digital Duty of Care नाम दिया गया है. इसका उद्देश्य डिजिटल सेवाओं को अपने उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बनाना है.

इस विधेयक के तहत सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को कंटेंट की सिफारिश करने वाले एल्गोरिदम बंद करने का विकल्प भी मिल सकता है. ये एल्गोरिदम प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं को उनकी पसंद के आधार पर लगातार सामग्री दिखाते हैं और कंपनियों के बिजनेस मॉडल का अहम हिस्सा हैं.

प्रस्तावित कानून ऑनलाइन गेम, ऐप और दूसरी डिजिटल सेवाओं को 18 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को दुर्व्यवहार, बुलिंग, अश्लील सामग्री, खाने-पीने से जुड़े विकारों को बढ़ावा देने वाली सामग्री और महिलाओं के प्रति शत्रुता फैलाने वाले कंटेंट से बचाने के उपाय करने के लिए बाध्य करेगा.

डिजिटल सेवाओं को हर साल जोखिम का आकलन भी करना होगा, ताकि उपयोगकर्ताओं को होने वाले संभावित नुकसान की पहचान कर उसे कम किया जा सके.

नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 10.92 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 7.62 करोड़ अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. यह कार्रवाई ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सुरक्षा नियामक eSafety Commissioner के जरिए की जाएगी.

वेल्स चाहती हैं कि संसद साल के अंत तक इस विधेयक को मंजूरी दे दे. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया में खाद्य निर्माताओं से उत्पाद बेचने से पहले उसकी सुरक्षा जांच की उम्मीद की जाती है. इसी तरह खिलौना बनाने वाली कंपनियों को भी यह जांचना होता है कि उनके उत्पाद बच्चों के लिए दम घुटने जैसे खतरे पैदा तो नहीं करते.

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उनके मुताबिक, डिजिटल सेवाओं पर भी यही सिद्धांत लागू होना चाहिए. सवाल यह है कि क्या ऑस्ट्रेलिया दूसरे देशों को साथ लेकर टेक कंपनियों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा के सख्त और साझा नियम लागू करा पाएगा?

Last Updated on October 21, 2026 9:26 am

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