दिल्ली कैसे बनेगी स्मार्ट सिटी? DDA की मीटिंग में LG ने बताया मास्टर प्लान

दिल्ली को स्मार्ट सिटी बनाने का क्या है LG मास्टर प्लान? DDA की मीटिंग में दिए निर्देश
दिल्ली को स्मार्ट सिटी बनाने का क्या है LG मास्टर प्लान? DDA की मीटिंग में दिए निर्देश

Delhi Master Plan: देश की राजधानी दिल्ली की समस्याओं को दूर करने के लिए उपराज्यपाल ने डीडीए के अधिकारियों के साथ अहम बैठक की. मीटिंग में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मास्टर प्लान को एडवाइजरी काउंसिल के सामने रखा. एलजी के मास्टर प्लान में दिल्ली को अवैध कब्जों को मुक्त कराना, ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करना, अनधिकृत झु्ग्गी, झोपड़ियों को हटाना, साफ पानी और पर्यावरण की सुरक्षा, ऐतिहासिक घरोहरों की सुरक्षा, हरियाली को बढ़ावा देना, ट्रांसपोर्ट की सुविधा, ट्रैफिक जाम से मुक्ति, रोजगार और बिजनेस को बढ़ावा देना और शहर को लॉजिस्टिक हब बनाना शामिल है.आइए, अब इसे विस्तार से समझते हैं.

ट्रैफिक व्यवस्था के लिए प्लान

दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार कैसे होगा, इसके लिए भी एलजी मास्टर प्लान का जिक्र किया. बैठक में उन्होंने कहा कि लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का विकास किया जाना है.

कैसे होगा झुग्गी बस्तियों का विकास और सुधार

इसके तहत पुराने इलाकों, झुग्गी-झोपड़ियों को नए सिरे से बसाया जाएगा. दिल्ली फायर सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां पर तकरीबन 1,100 अनिधिकृत झुग्गी-झोपड़ियां हैं.

स्वच्छ पानी और पर्यावरण की सुरक्षा

एलजी के इस प्लान के तहत बारिश से बाढ़ की समस्या को दूर करने और भीषण गर्मी की वजह से जो पानी का जलस्तर नीचे चला गया है उस परेशानी को दूर किया जाएगा.

पानी की समस्या दिल्ली के कमोबेश सभी क्षेत्रों में है. इंडियन एक्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण दिल्ली, उत्तर दिल्ली, उत्तर-पश्चिम दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली और मध्य दिल्ली के कुछ हिस्से में है.

धरोहरों की सुरक्षा

मीटिंग में उपराज्यपाल ने दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों को सुरक्षित करने पर भी जोर दिया. इस प्लान के तहत उन ऐतिहासिक इमारतों को बचाना है जो ढह रहे हैं. दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, तकरीबन 1,300 ऐतिहासिक धरोहर और इमारत है.

हरियाली को किया जाएगा बढ़ावा

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मीटिंग में शहर में हरे पेड़-पौधे लगाने और उसे बचाने पर भी जोर दिया. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का तकरीबन 75 फसदी क्षेत्रों में हरियाली के लिए पेड़-पौधों की कमी है. यानी ये क्षेत्र पूरी तरह से ग्रीन कवर नहीं हैं.

ट्रांसपोर्ट की अच्छी सुविधा और ट्रैफिक जाम से मुक्ति

इस मास्टर प्लान के तहत मट्रो, बसों और ट्रांस्पोर्ट के अन्य साधनों को एक-दूसके के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि लोगों को जाम की समस्या से छुटकारा मिल सके. साथ ही नगरिकों को घर के नजदीक ही यातायात के साधन उपलब्ध हो सके. ‘द-न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तकरीबन 31 फीसदी शहरी मोहल्ले ऐसे हैं, जहां 500 मीटर के भीतर बस स्टॉप नहीं है. जबकि, जबकि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार जिस शहर में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता है वहां पर यह आंकड़ा 85 से 90 फीसदी होना चाहिए.

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रोजगार और बिजनेस को लेकर प्लान क्या है?

मास्टर प्लान के तहत राज्यपाल ने यह भी बताया कि दिल्ली के पुराने और बड़े व्यापारिक बजारों को आधुनिक और अच्छा बनाया जाएगा. ताकि, रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिल सके. दिल्ली के चांदनी चौक, करोल बाग, लाजपत नगर, सदर बाजार, नेहरू प्लेस, कमला नगर और कनॉट प्लेस जैसे व्यापारिक बाजारों में पार्किंग की समस्या, ट्रैफिक जाम से जुड़ी परेशानियां और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं आम है. ऐसा, ‘द-न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ में कहा गया है.

दिल्ली में कैसे स्थापित होगा लॉजिस्टिक्स हब 

एक स्थान से दूसरे स्थान पर माल ढोने व्यापार से जुड़ी सामग्रियों को रखने के लिए दिल्ली में बड़े-बड़े सेंटर बनाए जाएंगे. ताकि यहां की अर्थव्यवस्था और सुदृढ़ हो सके.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना तरकीबन 1.93 लाख मालवाहक गाड़ियां चलती हैं. इसकी वजह से यातायात पर भारी दबाव देखने को मिलता है. जबकि लॉजिस्टिक्स हब शहरों के बीच में होने की वजह से सामान ढोने वाली गाड़ियों को घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरना पड़ता है. आजादपुर, गांधी नगर और नारायणा की मंडियां अधिक प्रभावित हैं.

Last Updated on July 4, 2026 9:15 pm

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