पेपर लीक रोकने के लिए बनी ‘परीक्षा सुधार समिति’ क्या है? इसमें कौन-कौन हैं शामिल

Pariksha Sudhar Samiti: पेपर लीक को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘परीक्षा सुधार समिति’ की घोषणा की है. इसका काम क्या होगा? कौन-कौन हैं शामिल?

पेपर लीक रोकने के लिए बनी 'परीक्षा सुधार समिति' क्या है? इसमें कौन-कौन हैं शामिल
पेपर लीक रोकने के लिए बनी 'परीक्षा सुधार समिति' क्या है? इसमें कौन-कौन हैं शामिल

Pariksha Sudhar Samiti: पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए आंदोलनों का असर यह हुआ का धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. इसके बाद रविवार को प्रधानमंत्री ने पेपर लीक को रोकने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की. इस टास्क फोर्स का चेयरमैन टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि को बनाया गया. आइए, जानते हैं कि परीक्षा सुधार समित क्या है, इसमें कितने लोग शामिल हैं और उनका काम क्या होगा?

हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का काम क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव करने और बार-बार होने वाले पेपर लीक को रोकने के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की. टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि को इसका चेयरमैन नियुक्त किया गया है. छह सदस्यों वाली इस कमेटी में टेक्नोलॉजी, स्पेस, सिक्योरिटी, शिक्षा, एकेडमिक्स और लॉजिस्टिक्स के एक्सपर्ट शामिल हैं, जो सरकारी परीक्षाओं में स्ट्रक्चरल और टेक्नोलॉजी पर आधारित सुधारों के लिए सुझाव देंगे.

छात्रों के लिए एक वीडियो मैसेज में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने परीक्षा में धोखाधड़ी के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और सख्त कानूनी प्रावधान लागू करने जैसे कदम पहले ही उठाए हैं. हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोगों का भरोसा फिर से कायम करने के लिए परीक्षा प्रणाली को मज़बूत करना बहुत ज़रूरी है.

हाई-पावर्ड टास्क फोर्स शामिल लोग और उनके काम

नंदन नीलेकणि- टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर और इन्फोसिस के को-फाउंडर नीलेकणि इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता करेंगे. उन्हें भारत के आधार डिजिटल आइडेंटिटी प्रोग्राम का आर्किटेक्ट माना जाता है. उम्मीद है कि वे परीक्षाओं को ज़्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर पैनल की सिफारिशों का नेतृत्व करेंगे.

एस. सोमनाथ- सरकार ने इस पैनल को ऐसे डिजिटल समाधानों की जांच करने का काम सौंपा है जो परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण को मज़बूत कर सकें – चाहे वह प्रश्न-पत्र की सुरक्षा हो, उम्मीदवार का सत्यापन हो या फिर नतीजों की प्रोसेसिंग. एस. सोमनाथ बड़े पैमाने के टेक्नोलॉजी सिस्टम में विशेषज्ञता रखते हैं. उन्होंने 2022 से 2025 तक ISRO के चेयरमैन और डिपार्टमेंट ऑफ़ स्पेस के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. लगभग 40 साल के अनुभव वाले एक जाने-माने स्पेस साइंटिस्ट के तौर पर, वे लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी और स्पेस सिस्टम इंजीनियरिंग में अपने योगदान के लिए मशहूर हैं.

तपन डेका- तपन डेका सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेंगे. हिमाचल प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी तपन कुमार डेका ने जून 2022 से जून 2026 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर के तौर पर काम किया; केंद्र सरकार ने दो बार उनका कार्यकाल बढ़ाया. एक अनुभवी इंटेलिजेंस अधिकारी के तौर पर, उन्होंने आतंकवाद-विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई, जिनमें 26/11 मुंबई हमले, इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर में सुरक्षा अभियान शामिल हैं.

वी. कामाकोटी- IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी एकेडमिक और टेक्निकल इनपुट देंगे. IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी इस टास्क फ़ोर्स में एकेडमिक और रिसर्च कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व करेंगे. वे जनवरी 2022 से IIT मद्रास के डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं. कामाकोटी एक कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं जो कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और VLSI डिज़ाइन में माहिर हैं. वे माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े अहम राष्ट्रीय प्रोग्राम्स को लीड करते हैं, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़री बोर्ड के सदस्य हैं और कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की ओर से बनाई गई AI टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन भी रह चुके हैं.

अनीता करवाल– अनीता करवाल शिक्षा नीति से जुड़ा अपना अनुभव साझा करेंगी. गुजरात कैडर की 1988 बैच की IAS अधिकारी अनीता करवाल के पास पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में 36 साल से ज़्यादा का अनुभव है, जिसमें स्कूली शिक्षा पर खास ध्यान दिया गया है. उन्होंने CBSE की चेयरपर्सन (2017–2021) और बाद में स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. उन्होंने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई.

अमृत लाल मीणा- अमृत लाल मीणा ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर ध्यान देंगे, IAS अधिकारी मीना के पास 36 वर्षों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है, जिसमें बिहार में 25 वर्ष और भारत सरकार के साथ 11 वर्ष शामिल हैं. उन्होंने बिहार के मुख्य सचिव (2024–2025) और कोयला मंत्रालय के सचिव (2022–2024) के रूप में कार्य किया है, और प्रशासन तथा लॉजिस्टिक्स में अपनी विशेषज्ञता के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं.

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डिसिप्लिनरी टास्क फोर्स का काम क्या होगा?

मल्टी-डिसिप्लिनरी टास्क फोर्स भारत की परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने के तरीकों की जांच करेगी. इसकी सिफारिशें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मजबूत करने और ढांचागत बदलावों व तकनीक के अधिक इस्तेमाल के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने पर केंद्रित होंगी. केंद्र ने संकेत दिया है कि टास्क फोर्स की सिफारिशें भविष्य के सुधारों का मार्गदर्शन करेंगी, जिनका उद्देश्य पेपर लीक को रोकना और महत्वपूर्ण सार्वजनिक परीक्षाओं में भरोसा बहाल करना है.

यह घोषणा सरकार के उस व्यापक प्रयास के बीच आई है, जिसका मकसद परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ कानूनों को सख्त करना है. इसके लिए ऐसे संशोधनों का प्रस्ताव है जिनमें संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में तेज जांच, त्वरित सुनवाई और कड़ी सजा का प्रावधान है.

Last Updated on July 27, 2026 3:31 pm

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