Who is Mohammad Irfan: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई से परेशान एक युवक इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वह लड़का दिल्ली के स्लम एरिया में पला-बढ़ा. जब वह 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच पहुंचा, तो उसकी मुलाकात एक निजी चैनल के पत्रकार से होती है. पत्रकार उस वक्त कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे थे. इरफान ने जब मीडिया के सामने बोलना शुरू किया, तो उसकी बातों को सुनने के लिए लोग इकट्टा हो गए. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे उस युवक के बारे में लोग जानना चाह रहे हैं कि वह कौन है? सोशल मीडिया पर कैसे छा गया? चर्चा में क्यों है? कितना पढ़ा-लिखा है? कहां रहता है? और सरकार से उसकी मांग क्या है?
कौन हैं मोहम्मद इरफान?
दिल्ली की सावदा जेजे कॉलोनी में रहने वाले 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान एक फेरीवाले हैं. उन्होंने कभी स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन Google Voice Search, YouTube और इंटरनेट की मदद से संविधान, लोकतंत्र और मजदूरों के अधिकारों के बारे में जानकारी हासिल की. जंतर-मंतर लल्लन टॉप को दिए गए उनके इंटरव्यू के बाद वह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए.
वायरल इंटरव्यू ने दिलाई पहचान
जंतर-मंतर पर दिए गए इंटरव्यू में इरफान ने लोकतंत्र, सम्मान, मजदूरों के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था पर बेबाकी से अपनी बात रखी. उन्होंने भगत सिंह की कविताओं की पंक्तियां भी सुनाईं. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने देखा और उनकी बातें इन दिनों खूब चर्चा में है.
राहुल गांधी से क्या अपील की?
इरफान के वायरल होने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी उनके घर पहुंचे. राहुल गांधी ने उन्हें संसद आने का न्योता दिया और फोन पर प्रियंका गांधी से भी बात कराई. इरफान ने बताया कि उन्होंने दोनों नेताओं से सिर्फ मजदूरों और गरीबों की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की.
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इरफान का बचपन कैसे बीता?
इरफान का घर दिल्ली की झुग्गी बस्ती में है. घर अभी भी अधूरा बना हुआ है. वह रोज बर्फ बेचकर करीब 500 रुपये कमाते हैं. उनका कहना है कि इतनी कम कमाई में परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्च उठाना बेहद मुश्किल है.
इरफान क्यों पहुंचे थे जंतर-मंतर?
इरफान का कहना है कि वह मशहूर होने के लिए जंतर-मंतर नहीं गए थे. उनका मकसद सिर्फ यह था कि देश में मजदूरों की समस्याओं पर भी बात हो. उनके अनुसार, दिहाड़ी मजदूर विरोध नहीं कर पाते, क्योंकि एक दिन काम नहीं करने का मतलब है एक दिन की कमाई खत्म होना.
क्या हैं उनकी मांगें?
- 8 घंटे काम करने वाले मजदूर को कम से कम 18,000 रुपये वेतन मिले
- 12–14 घंटे काम लेकर कम वेतन देने की व्यवस्था खत्म हो
- मजदूरों को उनकी मेहनत के अनुसार सम्मानजनक वेतन और अधिकार मिलें
- सरकार मजदूरों की समस्याओं पर बातचीत करे और उनका समाधान निकाले
इरफान ने इतनी जानकारी कैसे जुटाई?
इरफान पढ़-लिख नहीं सकते और मोबाइल पर टाइप भी नहीं कर पाते. इसलिए वह Google Voice Search और YouTube के जरिए जानकारी जुटाते हैं. उनका कहना है कि यही उनकी “यूनिवर्सिटी” है, जहां से उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और सरकारी नीतियों को समझा.
लोकतंत्र और संविधान पर क्या कहा?
इरफान का मानना है कि लोकतंत्र में संवाद होना चाहिए, अहंकार नहीं. उन्होंने कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के रास्ते हमेशा खुले रहने चाहिए. उनका यह भी कहना है कि संविधान हर व्यक्ति की गरिमा और सम्मान की रक्षा करता है.
GST और महंगाई पर भी उठाए सवाल
इरफान ने कहा कि सिर्फ पेट भर लेना ही जिंदगी नहीं है. लोगों के पास इतना पैसा भी होना चाहिए कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई, इलाज और सम्मानजनक जीवन का खर्च उठा सकें. उन्होंने महंगाई और टैक्स के बोझ का भी जिक्र किया.
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क्यों चर्चा में हैं मोहम्मद इरफान?
इरफान न तो छात्र नेता हैं, न किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी. वह एक साधारण मजदूर हैं, लेकिन मजदूरों के हक, सम्मान और बेहतर जिंदगी की बात ने उन्हें सोशल मीडिया पर एक मजबूत आवाज बना दिया. इसी वजह से उनका इंटरव्यू लाखों लोगों तक पहुंचा और देशभर में चर्चा का विषय बन गया.
Last Updated on July 28, 2026 12:22 pm
