इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित वडोदरा नगर निगम (VMC) के लैंड एस्टेट विभाग ने जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसे नगर निगम की स्थायी समिति के सामने रखा गया है. राज्य सरकार के 13 अगस्त के प्रस्ताव के अनुसार, भूखंड के 500 वर्ग मीटर हिस्से को आवासीय इस्तेमाल के लिए पठान को उपहार के तौर पर दिया जाएगा, जबकि बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन रियायती दर पर आवंटित की जाएगी.
करीब ₹20.5 करोड़ की जमीन, आवंटन पर विवाद
यह भूखंड वडोदरा के तांदलजा इलाके में टाउन प्लानिंग स्कीम नंबर 22 के फाइनल प्लॉट नंबर 90 पर स्थित है. इसके पास पठान परिवार का सफेद रंग का बड़ा बंगला है, जहां यूसुफ पठान अपने छोटे भाई और पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान तथा परिवार के साथ रहते हैं.
जुलाई 2026 में वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने इस भूखंड की सार्वजनिक नीलामी की तैयारी शुरू की थी. उस समय जमीन का मूल्य ₹2.10 लाख प्रति वर्ग मीटर तय किया गया था. इसके आधार पर पूरे भूखंड की अनुमानित कीमत करीब ₹20.5 करोड़ आंकी गई थी.
हालांकि, नगर निगम की जनरल बोर्ड ने कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि विवाद सुलझाए बिना जमीन का निपटारा कैसे किया जा सकता है. इसके बाद नीलामी से जुड़ा प्रस्ताव वापस ले लिया गया.
अब राज्य सरकार की मंजूरी के बाद लैंड एस्टेट विभाग ने आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए स्थायी समिति के माध्यम से जनरल बोर्ड की मंजूरी मांगी है.
सरकार के प्रस्ताव में क्या है?
गुजरात सरकार के 13 अगस्त 2026 के प्रस्ताव के अनुसार:
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500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय उपयोग के लिए उपहार के तौर पर आवंटित की जाएगी.
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शेष 478 वर्ग मीटर जमीन वडोदरा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (VUDA) की वैल्यूएशन कमेटी द्वारा 17 मार्च 2026 को निर्धारित मूल्य के 55 प्रतिशत की रियायती दर पर दी जाएगी.
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प्रस्ताव में कहा गया है कि इस आवंटन को भविष्य के मामलों के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा.
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राज्य का राजस्व विभाग वडोदरा नगर निगम को हस्तांतरित जमीन के मूल्य के बराबर जमीन उपलब्ध कराएगा.
वडोदरा नगर निगम के आयुक्त अरुण महेश बाबू ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि नगर निगम को राज्य सरकार की मंजूरी मिल गई है, लेकिन विस्तृत शर्तों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को स्थायी समिति और जनरल बोर्ड की सामान्य मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा.
यह स्पष्ट नहीं है कि आवंटन को पिछली तारीख से प्रभावी किया जाएगा या नहीं.
2012 में शुरू हुआ था जमीन का विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी. उस समय यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से इस खाली भूखंड को 99 साल की लीज पर बिना सार्वजनिक नीलामी के देने की मांग की थी.
पठान ने अपने आवेदन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया था. उन्होंने कहा था कि उनके परिवार के मौजूदा घर से सटी जमीन आवासीय उपयोग के लिए सुविधाजनक होगी.
उस समय नगर निगम की स्थायी समिति और जनरल बोर्ड ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. जमीन का मूल्य ₹57,270 प्रति वर्ग मीटर तय किया गया था, यानी पूरे भूखंड की कीमत करीब ₹5.6 करोड़ बनती थी. पठान ने यह रकम देने की इच्छा भी जताई थी.
लेकिन सार्वजनिक नीलामी के बिना सीधे जमीन आवंटित करने के लिए गुजरात सरकार की मंजूरी जरूरी थी. जून 2014 में राज्य के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया.
इसके बाद नगर निगम ने आरोप लगाया कि मंजूरी नहीं मिलने के बावजूद पठान ने भूखंड पर बाड़ लगाकर उस पर कब्जा कर लिया.
2024 में मिला था अतिक्रमण हटाने का नोटिस
जून 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के कुछ ही दिनों बाद वडोदरा नगर निगम ने यूसुफ पठान को कथित अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया था. पठान ने इस नोटिस को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी.
अगस्त 2025 में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने राज्य सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को खारिज किया गया था. अदालत ने कहा था कि लंबे समय तक किसी जमीन पर कब्जा बनाए रखने से, बिना भुगतान के, कानूनी अधिकार पैदा नहीं हो जाता. अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि मशहूर हस्तियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को विशेष रियायत देने से गलत संदेश जा सकता है.
पठान ने इस फैसले के खिलाफ अपील की. जून 2026 में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि आवंटन की औपचारिकताएं पूरी किए बिना और भुगतान किए बिना सार्वजनिक जमीन पर कब्जा कैसे बना रह सकता है.
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा था कि यदि अनधिकृत कब्जा साबित होता है, तो नुकसान या देय राशि का आकलन करते समय इस पहलू पर अलग से विचार करना होगा.
31 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने दर्ज किया कि पठान ने अपने वकील को अपील वापस लेने का निर्देश दिया है. इसके बाद मामला वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया गया.
TMC छोड़ने के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
यूसुफ पठान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित हुए और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP सरकार ने 9 मई को कार्यभार संभाला. इसके बाद 14 जून को यूसुफ पठान समेत TMC के 20 सांसदों ने घोषणा की कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ हैं.
इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर TMC से अलग बैठने की मांग भी की थी. इस मांग पर फैसला लंबित बताया गया है. सितंबर में खबर आई कि पठान को NCPI का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
कथित कब्जे के शुल्क का क्या होगा?
वडोदरा के नागरिक समूह विश्वामित्री बचाओ समिति ने पहले मांग की थी कि सार्वजनिक जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाया जाए और नगर निगम भूखंड का भौतिक कब्जा वापस लेकर ही उसे नीलामी के लिए पेश करे.
समूह ने अनुमान लगाया था कि करीब 14 साल के कथित कब्जे के लिए अस्थायी इस्तेमाल की दर ₹15 प्रति वर्ग मीटर प्रतिदिन के हिसाब से लगभग ₹7.5 करोड़ शुल्क बन सकता है. हालांकि, यह नागरिक समूह का अपना अनुमान है, नगर निगम की ओर से तय की गई आधिकारिक मांग नहीं.
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कथित अतिक्रमण और कब्जे की अवधि के शुल्क का मामला अलग से देखा जाना होगा, क्योंकि नगर निगम को इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं. अधिकारी के मुताबिक, रियायती दरों पर पठान को कितना भुगतान करना होगा, इस पर भी चर्चा की जाएगी.
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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन को पहले सार्वजनिक नीलामी के लिए तैयार किया जा रहा था और जिस पर कथित अतिक्रमण को लेकर कानूनी विवाद चला, उसका आवंटन किन शर्तों पर होगा. साथ ही, क्या कथित कब्जे की अवधि के लिए कोई शुल्क तय किया जाएगा और सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल में समान नियमों का पालन सुनिश्चित होगा?
Last Updated on October 20, 2026 9:05 am
