Nandan Nilekani Committee: क्या देश के छात्रों का भरोसा जीत पाएगी ‘नंदन नीलेकणि कमिटी’?

Nandan Nilekani Committee: बीते दिनों प्रधानमंत्री ने देश में एग्जाम पेपर लीक को रोकने के हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया. सवाल है कि क्या यह कमिटी देश के छात्रों का भरोसा जीत पाएगी?

Nandan Nilekani Committee: क्या देश के छात्रों का भरोसा जीत पाएगी नंदन नीलेकणि कमिटी?
Nandan Nilekani Committee: क्या देश के छात्रों का भरोसा जीत पाएगी नंदन नीलेकणि कमिटी?

Nandan Nilekani Committee: देश में पेपर लीक को रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया किया है. इस कमिटी के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि बनाए गए हैं. जबकि इस कमिटी में एस. सोमनाथ, तपन डेका, वी. कामाकोटी, अनीता करवाल और IAS अधिकारी अमृत लाल मीणा शामिल हैं. लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या इस कमिटी के गठन के बाद पेपर लीक बंद हो जाएगा? क्या टेक्नोलॉजी की मदद से पेपर लीक की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है? क्या यह समिति छात्रों का भरोसा जीत पाएगी?

क्या होगी चुनौती?

Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेपर लीक रोकने को लेकर बनी नंदन नीलेकणि समिति परीक्षा प्रणाली की कई तकनीकी कमियों को दूर कर सकती है. टेक्नोलॉजी की मदद से पेपर की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है. डेटा सुरक्षित रखा जा सकता है और उम्मीदवारों की पहचान की सही जांच हो सकती है. लेकिन सिर्फ टेक्नोलॉजी से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. अगर व्यवस्था में ईमानदारी और जवाबदेही नहीं होगी, तो कोई भी डिजिटल सिस्टम भरोसा वापस नहीं दिला सकता.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री द्वारा नंदन नीलेकणि की अगुवाई में टास्क फोर्स बनाना सही कदम है. उनके पास टेक्नोलॉजी और बड़े सुधार लागू करने का अच्छा अनुभव है. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती लोगों का टूटा हुआ भरोसा फिर से जीतना है.

2024 में भी बनी थी हाई लेवल कमिटी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2024 में हुए NEET पेपर लीक का मामला खासतौर पर बिहार की राजधानी और हजारीबाग से जुड़ा था. उस वक्त जांच में सामने आया था कि एग्जाम से पहले ही परीक्षा केंद्र से प्रश्न पत्र को दलालों के जरिए चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाया गया. जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पेपर लीक सीमित दायरे में थी. इसलिए पूरे देश में दोबारा परीक्षा नहीं कराई गई.

उस वक्त भी सरकार ने NTA में रिफॉर्म के लिए एक हाई लेवल कमिटी बनाई थी. इस हाई लेवल कमिटी के अध्यक्ष ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. के राधाकृष्णण को बनाया गया था. साथ ही इस कमिटी में शिक्षाविद, आईआईटी के प्रोफेसर और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे. लोगों का सवाल है कि इस कमिटी ने नीट पेपर लीक को क्यों नहीं रोक पाई? खामियां कहां थीं?

यह भी पढ़ें: पेपर लीक रोकने के लिए बनी ‘परीक्षा सुधार समिति’ क्या है? इसमें कौन-कौन हैं शामिल

जंतर-मंजर से छात्रों ने सरकार को दिया था संदेश

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन ने सरकार को बड़ा संदेश दिया था. इस विरोध के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और सरकार को मानना पड़ा कि सिर्फ आश्वासन देकर इस संकट को नहीं संभाला जा सकता. यह मामला सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही का है. क्या एग्जाम पेपर लीक में सुधार के लिए बनी नंदन नीलेकणि कमिटी छात्रों का भरोसा जीत पाएगी?

Last Updated on July 28, 2026 7:35 pm

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