Academic Dialogue Forum: देश में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बाद इन दिनों Gen Z चर्चा के केंद्र में हैं. इस बीच देश के जाने-माने शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने Gen Z को लेकर पड़ी पहल की है. जेन-जी से चर्चा करने और उनकी बात सुनने के लिए ‘एकेडमिक डायलॉग फोरम’ की ओर से बड़ी पहल की गई. Gen Z को लेकर ‘एकेडमिक डायलॉग फोरम’ का उद्देश्य क्या है? दिल्ली NCR के शिक्षाविदों से बातचीत के दौरान जेन-जी छात्रों ने क्या कहा? शिक्षा व्यवस्था को लेकर किन मुद्दों पर चर्चा हुई? चलिए जानते हैं.
क्यों शुरू की गई Gen Z छात्रों को लेकर पहल?
हालिया CJP छात्र विरोध-प्रदर्शनों के बाद ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) की सोच और उनकी राजनीति को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है. इसी को समझने के लिए दिल्ली-एनसीआर के शिक्षाविदों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने छात्रों के साथ आमने-सामने बातचीत करने का फैसला किया. इस चर्चा का मकसद उन्हें सलाह देना नहीं, बल्कि उनकी बातें सुनना था.
कैसे बदला टीचर-स्टूडेंट का पारंपरिक रिश्ता?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिक्षाविदों के इस पहल में शिक्षक क्लासरूम की तरह पढ़ाने नहीं पहुंचे थे. बल्कि, उन्होंने अपने घरों के दरवाजे छात्रों के लिए खोले और चाय-नाश्ते के साथ खुलकर बातचीत की. इस आयोजन में शिक्षक ‘मेंटर’ नहीं, बल्कि सुनने वाले की भूमिका में थे, ताकि वे युवाओं की सोच और अनुभवों को बेहतर तरीके से समझ सकें.
कैसे हुई यह अनोखी बातचीत?
‘एकेडमिक डायलॉग फोरम’ की पहल के तहत दिल्ली-एनसीआर के 12 घरों में बैठकें हुईं. छात्रों ने पहले गूगल फॉर्म के जरिए रजिस्ट्रेशन किया और अपनी पसंद के मेजबान का चयन किया. इन बैठकों में इतिहासकार, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने छात्रों से खुलकर चर्चा की.।
क्यों सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही चर्चा?
बातचीत सिर्फ कैंपस की राजनीति या CJP विरोध-प्रदर्शनों तक नहीं रही. छात्रों ने पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता, सोशल मीडिया, मानसिक दबाव और अपनी पीढ़ी से जुड़ी चुनौतियों पर भी खुलकर अपनी राय रखी.
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चर्चा में ‘जेन जी’ ने क्या कहा?
चर्चा में जेन-जी छात्रों ने कहा कि यह मानना गलत है कि उनकी पीढ़ी राजनीति में रुचि नहीं रखती. शिक्षाविदों से बातचीत के दौरान उनका कहना था कि आज सोशल मीडिया भी राजनीतिक भागीदारी का एक अहम माध्यम बन चुका है. वे पुराने तरीकों की बजाय नए तरीकों से अपनी बात रखते हैं और हर मुद्दे पर सवाल पूछने से नहीं डरते.
क्यों उठे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल?
लाजपत नगर में शिक्षाविदों और जेन-जी से बीच हुई चर्चा छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था की कई कमियां गिनाईं. उन्होंने CUET परीक्षा केंद्रों की दूरी, सुविधाओं की कमी, कई प्रवेश परीक्षाओं के दबाव और हाल के CJP विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अपने अनुभव साझा किए.
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कैसे बदल रही है युवाओं की राजनीतिक भागीदारी?
चर्चा में जेन-जी छात्रों ने कहा कि कई युवा अब पारंपरिक राजनीतिक दलों से दूरी बना रहे हैं. इसके बजाय वे मुद्दों पर आधारित अभियानों, जमीनी स्तर के आंदोलनों और छात्र-नेतृत्व वाली पहलों के जरिए अपनी आवाज उठाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
आगे क्या है योजना?
‘एकेडमिक डायलॉग फोरम’ के आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है. भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि औपचारिक संस्थानों से बाहर भी छात्रों और शिक्षाविदों के बीच संवाद खुलकर होता रहे.
Last Updated on August 3, 2026 3:32 pm
