Manjeet Kaur case: पंजाबी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंजीत कौर के कथित अपहरण और आग में झुलसने की घटना को करीब दो महीने बीत चुके हैं. लेकिन पुलिस के सामने अब भी कई सवाल खड़े हैं.
कौर को कथित तौर पर चंडीगढ़ से अगवा किया गया था. आरोप है कि उन्हें मोहाली के मोरिंडा के पास जंगलनुमा इलाके में ले जाया गया, पेड़ से बांधा गया और आग लगा दी गई. गंभीर रूप से झुलसी कौर का इलाज PGIMER, चंडीगढ़ में चल रहा था. आखिरकार 26 अगस्त को सेप्सिस यानी गंभीर संक्रमण के कारण उनकी मौत हो गई.
इस पूरे मामले की पड़ताल Indian Express ने भी की है.
लेकिन अब इस केस में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खड़े किए नए सवाल
पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मौत के समय मंजीत कौर करीब सात सप्ताह की गर्भवती थीं.
यानी कथित हमला हुआ, उसके बाद वह अस्पताल में भर्ती रहीं और इलाज के दौरान भी गर्भवती थीं.
अब पुलिस के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं है कि कौर को कौन ले गया था.
सवाल यह भी है कि उनके साथ क्या हुआ था? उनके संपर्क में कौन लोग थे? और क्या उनकी निजी जिंदगी या किसी विवाद का इस घटना से कोई संबंध था?
CCTV से उम्मीद थी, लेकिन सुराग ही मिट गया
जांच में पुलिस के सामने सबसे बड़ी मुश्किल CCTV फुटेज को लेकर है.
चंडीगढ़ पुलिस के मुताबिक, घटना करीब दो महीने पुरानी है. तब तक कई जगहों की CCTV रिकॉर्डिंग अपने आप डिलीट या ओवरराइट हो चुकी है.
सेक्टर-34 थाने के SHO इंस्पेक्टर शादीलाल के मुताबिक, टोल प्लाजा आमतौर पर करीब 15 दिन तक ही फुटेज सुरक्षित रखते हैं.
यानी जिस फुटेज से पुलिस आरोपी या वाहन तक पहुंच सकती थी, उसका बड़ा हिस्सा अब उपलब्ध ही नहीं है.
सबसे बड़ा सवाल—वो गाड़ी कहां है?
पुलिस अभी तक उस वाहन की पहचान नहीं कर पाई है, जिसमें कौर को कथित तौर पर ले जाया गया था.
जांच टीम सेक्टर-34 और मोरिंडा के बीच के रास्ते पर दुकानों, पेट्रोल पंप और दूसरी जगहों के CCTV खंगाल रही है. लेकिन अभी तक वाहन या कथित आरोपियों का कोई साफ सुराग नहीं मिला है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल मोबाइल फोन और डिजिटल सबूत ही जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.
मंजीत अपना बयान देना चाहती थीं, लेकिन…
इस केस का शायद सबसे परेशान करने वाला सवाल यही है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, PGIMER में होश में आने के बाद मंजीत कौर अपना बयान देना चाहती थीं.
बताया गया कि संस्थान की ओर से खरड़ पुलिस को इसकी जानकारी भी दी गई थी. लेकिन कथित तौर पर पुलिसकर्मी उनका बयान लेने PGI नहीं पहुंचे.
इसके बाद 26 अगस्त को कौर की मौत हो गई.
यानी जिस महिला के पास पूरी घटना की सबसे अहम जानकारी हो सकती थी, उसका बयान दर्ज ही नहीं हो सका.
अब पुलिस के पास उनकी कहानी जानने के लिए सिर्फ दूसरे लोगों के बयान, डिजिटल रिकॉर्ड और उपलब्ध सबूत बचे हैं.
चंडीगढ़ या पंजाब? सीमा विवाद ने भी बढ़ाई मुश्किल
इस मामले में चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर भी काफी समय तक खींचतान रही.
मोहाली के SSP हरमंदीप सिंह हंस ने कहा कि कथित अपहरण सेक्टर-34 में हुआ था, इसलिए मामला चंडीगढ़ पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है.
अब चंडीगढ़ पुलिस ने केस दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है.
मंजीत की मां कांता देवी का बयान भी दर्ज किया गया है.
सोशल मीडिया विवाद भी जांच के दायरे में
मंजीत कौर की सोशल मीडिया गतिविधियां भी अब जांच का हिस्सा हैं.
पुलिस को सोशल मीडिया पर किसी विवाद या कहासुनी के संकेत मिले हैं. साइबर सेल अब उनकी ऑनलाइन बातचीत, मैसेज और दूसरे डिजिटल फुटप्रिंट की जांच कर रहा है.
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले मंजीत किन लोगों के संपर्क में थीं और क्या किसी विवाद का इस कथित हमले से कोई संबंध था.
परिवार के पास अब सिर्फ सवाल हैं
मंजीत कौर तलाकशुदा थीं और उनका सात साल का बेटा है, जो अपने पिता के साथ रहता है. उनकी मां और 11 साल का भाई ही उनके करीबी परिवार में बताए जा रहे हैं.
अब परिवार पुलिस जांच पर निर्भर है कि आखिर उस दिन मंजीत के साथ क्या हुआ था.
पंजाब के DGP गौरव यादव ने पूरे मामले की वरिष्ठ स्तर पर जांच के निर्देश दिए हैं.
चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर के मुताबिक, जांच में सबसे अहम कड़ी वही वाहन है, जो अभी तक नहीं मिला है.
क्योंकि जब तक वह गाड़ी नहीं मिलती, तब तक कई सवालों के जवाब अधूरे हैं.
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मंजीत कौर को कौन ले गया? वह गाड़ी किसकी थी? कथित हमले की वजह क्या थी? और सबसे अहम—अगर मंजीत अपना बयान देना चाहती थीं, तो उनका बयान समय रहते क्यों नहीं लिया गया?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच से ही मिल सकते हैं.
Last Updated on August 31, 2026 9:47 am
