Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद कांस्टीट्यूशन क्लब में सरकार और सीजेपी के साथ तीसरे दौर की मीटिंग हुई. इस मीटिंग में सरकार की तरफ से जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पहुंचे थे. जबकि सीजेपी की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका पहुंचे. इस अहम बैठक में सरकार की ओर से CJP की तीनों मांगें मान ली गई. सीजेपी की पहली मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर थी. वहीं, दूसरी मांग पेपर लीक में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और तीसरी मांग छात्रों पर किए गए FIR को वापस लेने की थी. सीजेपी की मांगें पूरी हो जाने के बाद जंतर-मंतर खाली हो गया है. आइए, अब जानते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में किन बातों का प्रमुखता से उल्लेख किया है.
किन बातों का ध्यान रखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा?
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री मोदी को सौंप दिया है. पोस्ट में उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि जंतर-मंतर और देश में जो हालात बने हैं, उनका फायदा देश विरोधी ताकतों को नहीं उठाना चाहिए. साथ ही भाजपा के वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा कि वह देश के युवाओं को उलझन के बुरे चक्र में नहीं फंसने देंगे.
इस्तीफा पत्र में उन्होंने कहा-“भारत की युवा शक्ति ही इस देश की असली ताकत है. मैं देश के युवाओं को उलझन के बुरे चक्र में नहीं फंसने दूंगा, यही मेरा संकल्प है. जंतर-मंतर और देश में जो हालात बने हैं, उनका फायदा देश-विरोधी ताकतें न उठा पाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं और करियर बनाने पर ध्यान दें- इन बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है.”
युवा हैं देश के भविष्य
पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा- “युवा न सिर्फ भारत का भविष्य हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और शिल्पकार भी हैं. पिछले 10 दिनों की घटनाओं से मुझे दुख हुआ है. यह मेरे लिए निजी सम्मान का मामला नहीं है.” दो पन्नों के इस्तीफा पत्र में उन्होंने आगे कहा कि वह चार दशकों से भी अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा में सुधार के लिए समर्पित रहे हैं.
युवाओं की उम्मीदों का सम्मान
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- “मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव होती है. मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उचित उम्मीदों का बहुत सम्मान करता हूं. भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को पूरा करना हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन का एक नैतिक दायित्व रहा है. प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में देश की सेवा करने का जो अवसर मुझे मिला, उसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं.”
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किनके सहयोग से संपन्न हुई 21 जून की नीट परीक्षा?
प्रधान ने कहा कि जब 3 मई, 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी का पता चला, तो भारत सरकार ने तुरंत इसका संज्ञान लिया, जांच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द कर दी और परीक्षा का कार्यक्रम फिर से तय किया. साथ ही, “यह भी तय किया गया कि अगले साल से परीक्षा CBT (कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट) मोड में कराई जाएगी.
इस दौरान, हमारी मुख्य प्राथमिकता 20 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए परीक्षा का सुचारू रूप से आयोजन सुनिश्चित करना था. इसे हासिल करने के लिए सरकार के सभी विभागों ने मिलकर काम किया. भारत सरकार और राज्य सरकार, खासकर जिला प्रशासन ने इसमें अहम भूमिका निभाई. साथ ही, छात्रों, अभिभावकों और माता-पिता के सहयोग से 21 जून, 2026 को परीक्षा संपन्न हुई.”
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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में दुख का जिक्र क्यों किया?
प्रधान ने कहा- “मैं इस बात को लेकर पक्का था कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी होनहार छात्र का भविष्य खतरे में न पड़े और किसी भी छात्र के साथ कोई अन्याय न हो. 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के नतीजे संतोषजनक थे, जिसमें गरीब परिवारों के कई होनहार छात्रों ने भी सफलता हासिल की. लेकिन इस दौरान भी, जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने कई छात्रों को गुमराह करने और बाधाएं खड़ी करने की कोशिश की, जिससे मुझे बहुत दुख हुआ.”
Last Updated on July 25, 2026 8:35 pm
