बिहार: प्रदर्शन के दौरान लोगों को कैसे लगी गोली? सामने आया SP का बयान

Bihar Student Protest Firing: शनिवार को सीवान (बिहार) बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प को लेकर पुलिस का बयान सामने आया है. रविवार को पुलिस ने माना कि हवा में गोली चलाई गई थी.

बिहार: प्रदर्शन के दौरान लोगों को कैसे लगी गोली? सामने आया SP का बयान
बिहार: प्रदर्शन के दौरान लोगों को कैसे लगी गोली? सामने आया SP का बयान

Siwan Student Protest Firing: शनिवार को बिहार के सीवान में हुए नीट पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से घायल एक व्यक्ति ने दावा किया है कि उसके पैर में गोली लगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह सर्टिफिकेट लेने के लिए अपने घर से सीवान आया था. वह जिला मजिस्ट्रेट दफ्तर जा रहा था इसी दौरान उसके पैर में गोली लगी. सवाल उठता है कि क्या प्रदर्शन के दौरान गोली पुलिस की ओर से चलाई गई थी?

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 3 लोगों को गोली लगी. क्या तीनों लोगों को पुलिस की गोली का शिकार होना पड़ा या किसी और ने गोली चलाई? पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान 400 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए. चलिए जानते हैं इस बारे में मीडिया रिपोर्ट क्या कहती है और पुलिस का बयान क्या है?

SP पूरन कुमार ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के एक दिन बाद, रविवार को पुलिस ने माना कि हवा में गोली चलाई गई थी. पुलिस का आरोप है कि शनिवार को हुई हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर सीधे हमला किया था. हालांकि, गोली लगने से घायल हुए एक व्यक्ति का दावा है कि वह एक सर्टिफिकेट लेने के लिए अपने गांव से सिवान आया था और इसी काम के लिए जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर जा रहा था, तभी उसके पैर में गोली लग गई.

NEET पेपर लीक और दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हालिया पुलिस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को बिहार के सिवान ज़िले में राज्यव्यापी बंद के दौरान तीन लोगों को गोली लगी और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (SP) पूरन कुमार झा भी शामिल थे. पुलिस ने बताया कि 400 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया.

रविवार को इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए SP झा ने कहा कि अभी यह साफ़ नहीं है कि गोली लगने की तीनों घटनाएँ पुलिस की फायरिंग से ही हुई थीं. उन्होंने कहा- “अभी यह साफ़ नहीं है कि तीनों मामलों में गोलियाँ पुलिस ने चलाई थीं या कहीं और से चली थीं.”

उन्होंने कहा कि इस बात की पुष्टि हो गई है कि घायलों में से एक, जिसकी पहचान बुलेट कुमार गोंद के तौर पर हुई है, उसे पुलिस फायरिंग के दौरान पैर में गोली लगी थी. हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिन दो अन्य जगहों पर गोली लगने की सूचना मिली थी, वहाँ पुलिस तैनात नहीं थी.

प्रमाण पत्र बनवाने गए बुजुर्ग कैसे लगी गोली?

गराउली पुलिस स्टेशन इलाके के डुमराहर बुजुर्ग गांव के रहने वाले गोंद ने बताया कि वह जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सिवान गए थे, तभी वे हिंसा की चपेट में आ गए. उन्होंने कहा, “मैं अपने गांव से इसलिए आया था क्योंकि एक दोस्त ने सुझाव दिया था कि हम सिवान में अपने प्रमाण पत्र बनवा लें. स्टेशन पर उतरने के बाद हमने झड़पें देखीं. हम DM ऑफिस की ओर जा रहे थे, तभी मेरे पैर में गोली लग गई. गोली आर-पार निकल गई.”

SP ने गोली लगने से घायल हुए अन्य दो लोगों की पहचान आकाश और आरिफ के तौर पर की. उन्होंने बताया कि उनमें से एक के कंधे पर और दूसरे के कंधे और गर्दन के बीच गोली लगी थी. उन्होंने आगे कहा कि तीनों सुरक्षित हैं और ठीक हो रहे हैं.

8 से 10 राउंड फाइरिंग

एसपी झा ने कहा, “हवा में फायरिंग की गई थी. पुलिस की तरफ से लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों से चार राउंड और पिस्तौल से तीन राउंड फायरिंग की गई. कुल मिलाकर, लगभग आठ से 10 राउंड फायरिंग हुई. हम यह भी जांच कर रहे हैं कि बाकी फायरिंग कहां से हुई.” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने “सीधे पुलिस पर हमला किया और सरकारी व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया”.

आंसू गैस और बल प्रयोग किए गए

शनिवार को झा ने कहा था कि पुलिस ने आंसू गैस और “हल्के बल” का इस्तेमाल तब किया जब कई समूह गांधी मैदान में जमा हो गए, जबकि केवल एक समूह को ही विरोध प्रदर्शन की अनुमति थी. उन्होंने कहा था, “केवल एक समूह को विरोध प्रदर्शन की अनुमति थी. बाद में अन्य समूह गांधी मैदान पहुंचे, जहां उनके बीच झड़पें शुरू हो गईं. पुलिस को छह से सात राउंड आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. FIR दर्ज की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”

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अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी सिवान में कई जगहों पर जमा हुए थे, जिनमें गांधी मैदान, JP चौक, सदर अस्पताल मोड़, कागजी मोहल्ला, गोपालगंज मोड़ और सिवान कचहरी रेलवे क्रॉसिंग शामिल हैं. स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और हवा में फायरिंग का सहारा लेना पड़ा.

एक स्थानीय सूत्र ने बताया कि लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारी गोपालगंज मोड़ से सिवान कचहरी रेलवे क्रॉसिंग की ओर बढ़े और पुलिस बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया. साथ ही, जेपी चौक और सदर अस्पताल मोड़ पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जहां पत्थरबाजी तेज हो गई. झड़पों में घायल होने वालों में एसपी झा भी शामिल थे. पुलिस की कार्रवाई के बावजूद, दर्शनकारियों ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में छोटे-छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन जारी रखा. पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने 19 सरकारी और एक निजी वाहन को नुकसान पहुंचाया. उन्होंने कहा कि 58 पुलिसकर्मी घायल हुए और हिंसा के सिलसिले में 423 लोगों को हिरासत में लिया गया.

तेजस्वी यादव लगाया AK-47 चलाने का आरोप

शनिवार को बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ‘X’ पर आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर गोली चलाई और दावा किया कि इसमें AK-47 राइफलों का इस्तेमाल किया गया. इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस का कहना है कि बल का प्रयोग तभी किया गया जब प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. सिवान के अलावा, बंद के दौरान पटना, छपरा और कई अन्य जिलों से भी हिंसा की खबरें आईं, जबकि राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे.

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प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवा बंद

हिंसा के बीच, बिहार सरकार ने शुक्रवार को सिवान ज़िले में 25 जुलाई की शाम 5.30 बजे से 26 जुलाई की शाम 5.30 बजे तक, यानी 24 घंटे के लिए इंटरनेट और मास मैसेजिंग सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया. गृह विभाग (विशेष शाखा) द्वारा जारी आदेश में सरकार ने कहा कि यह फ़ैसला सिवान के ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है. उन्होंने आशंका जताई थी कि “असामाजिक तत्व” सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल आपत्तिजनक सामग्री फैलाने, हिंसा भड़काने और जान-माल को नुकसान पहुँचाने के लिए कर सकते हैं.

टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 और टेलीकम्युनिकेशंस (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए, आदेश में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म (जैसे Facebook, X, WhatsApp, Instagram, Telegram, YouTube और Reddit) के साथ-साथ ब्रॉडबैंड संचार सेवाओं तक पहुँच बंद करने का निर्देश दिया गया. हालाँकि, इन प्रतिबंधों से सरकारी इंटरनेट और इंट्रानेट-आधारित नेटवर्क, बैंकिंग सेवाओं, रेलवे और अन्य ज़रूरी सरकारी संचार प्रणालियों को छूट दी गई है.

Last Updated on July 27, 2026 7:34 pm

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