GST Council Meeting: करीब एक साल से ज्यादा लंबे अंतराल के बाद GST काउंसिल की अगली बैठक होने जा रही है. 57वीं GST काउंसिल की बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में होगी. राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापन में बैठक की तारीख की जानकारी दी गई है. श्रीवास्तव GST काउंसिल के पदेन सचिव भी हैं.
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि सितंबर 2025 में GST 2.0 के तहत टैक्स दरों में बड़े बदलाव के बाद काउंसिल पहली बार बैठक करने जा रही है.
GST 2.0 के बाद किन मुद्दों पर होगी नजर?
बैठक का अंतिम एजेंडा अभी तय नहीं हुआ है. लेकिन माना जा रहा है कि काउंसिल कई अहम मुद्दों पर चर्चा कर सकती है.
इनमें सबसे महत्वपूर्ण Input Tax Credit यानी ITC के फंसने का मुद्दा है.
कुछ सामान और सेवाओं पर कंपनियों को इनपुट खरीदते समय ज्यादा GST देना पड़ता है, जबकि तैयार सामान या सेवा बेचने पर टैक्स की दर कम हो गई है. ऐसे मामलों में कंपनियों का टैक्स क्रेडिट फंस जाता है.
खासकर उन क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा सामने आ रही है, जहां इनपुट के तौर पर सेवाएं ली जाती हैं और उन पर 18% GST लगता है, लेकिन अंतिम उत्पाद या सेवा पर GST की दर सिर्फ 5% है.
काउंसिल इस समस्या के समाधान पर विचार कर सकती है.
GST रजिस्ट्रेशन भी हो सकता है आसान
बैठक में केंद्र और राज्यों के स्तर पर GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को एक समान और आसान बनाने पर भी चर्चा होने की संभावना है.
इसके अलावा GST रजिस्ट्रेशन को लेकर ऑटोमेटिक प्रोसेस, रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया और दस्तावेजों से जुड़े अनुपालन नियमों को सरल बनाने का मुद्दा भी एजेंडे में आ सकता है.
यानी सरकार का फोकस सिर्फ टैक्स दरों पर नहीं, बल्कि GST सिस्टम को ज्यादा आसान और कम विवाद वाला बनाने पर भी हो सकता है.
GST 2.0 में क्या बदला था?
सितंबर 2025 में GST के तहत बड़े स्तर पर टैक्स रेट में बदलाव किया गया था. GST 2.0 के तहत मुख्य रूप से 5% और 18% की दो व्यापक टैक्स दरें रखी गईं. वहीं लग्जरी सामान के लिए 40% की विशेष दर लागू की गई.
कई सामानों पर टैक्स कम हुआ. इनमें कारें भी शामिल थीं.
छोटी कारों पर GST की दर 28% और सेस से घटाकर 18% की गई. इसमें पेट्रोल की 1,200 cc तक और डीजल की 1,500 cc तक की कारें शामिल थीं, जिनकी लंबाई 4 मीटर से ज्यादा नहीं है.
वहीं बड़ी कारों को 28% से बढ़ाकर 40% के टैक्स स्लैब में रखा गया.
ऑटो डीलर्स का करीब 2,500 करोड़ रुपये का मामला
GST दरों में बदलाव के बाद ऑटो सेक्टर में एक बड़ा ट्रांजिशन विवाद सामने आया.
दरें कम होने से पहले कई डीलर्स ने वाहन पुराने टैक्स रेट पर निर्माताओं से खरीद लिए थे. इन वाहनों पर उन्हें GST के साथ Compensation Cess भी देना पड़ा था.
बाद में टैक्स दरों में बदलाव हुआ और कारों पर Compensation Cess खत्म कर दिया गया.
ऑटो डीलर्स की संस्था Federation of Automobile Dealers Associations यानी FADA ने करीब 2,500 करोड़ रुपये के इस बकाये को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था.
GST काउंसिल की आगामी बैठक में ऐसे पुराने और ट्रांजिशन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना है.
Compensation Cess और पुराने टैक्स मामलों पर भी नजर
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि GST 2.0 के बाद पुराने टैक्स मामलों को व्यवस्थित तरीके से सुलझाना जरूरी है.
Grant Thornton Bharat के पार्टनर और Tax Controversy Management Leader मनोज मिश्रा के मुताबिक, अब GST में बार-बार छोटे बदलाव करने के बजाय पूरे सिस्टम की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देना चाहिए.
उनके मुताबिक पुराने टैक्स मामलों को नियमित करने का रास्ता बनाया जाना चाहिए. ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े पुराने टैक्स विवाद, सप्लायर की गलती के कारण फंसे Input Tax Credit, बड़े PAN-India कारोबार के लिए GST प्रशासन को आसान बनाना और Compensation Cess से जुड़े संक्रमणकालीन मामलों को सुलझाना महत्वपूर्ण है.
उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे में लाने के लिए चरणबद्ध रोडमैप बनाने और टैक्स नियमों की व्याख्या को लेकर मौजूद अस्पष्टता कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया.
पेट्रोलियम उत्पादों को GST में लाने का सवाल
GST व्यवस्था में पेट्रोलियम उत्पादों को शामिल करने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसे लेकर चरणबद्ध योजना बनाई जा सकती है.
हालांकि, यह आसान फैसला नहीं होगा, क्योंकि पेट्रोलियम उत्पादों से केंद्र और राज्यों दोनों को बड़ी मात्रा में राजस्व मिलता है.
कारोबारियों और कंपनियों के लिए क्यों अहम है बैठक?
GST लागू होने के बाद कारोबारियों के लिए टैक्स व्यवस्था पहले की तुलना में एकीकृत हुई है. लेकिन कई मामलों में नियमों की व्याख्या और ITC को लेकर विवाद बने हुए हैं.
अगर GST काउंसिल इन समस्याओं का समाधान करती है, तो कंपनियों के लिए टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल आसान हो सकता है. साथ ही compliance का बोझ और अनावश्यक मुकदमेबाजी भी कम हो सकती है.
यही वजह है कि 12 सितंबर की GST काउंसिल बैठक सिर्फ टैक्स दरों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहने वाली. इसके सामने GST 2.0 के बाद पैदा हुए व्यावहारिक सवालों को सुलझाने की बड़ी चुनौती भी होगी.
एक दिलचस्प बात यह भी है कि GST काउंसिल की बैठक और दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS Summit का पहला दिन एक ही तारीख को है.
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GST काउंसिल की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं. इसमें 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं.
अब देखना होगा कि एक साल से ज्यादा समय बाद होने वाली यह बैठक GST व्यवस्था में कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए क्या नए बदलाव लेकर आती है.
Last Updated on August 30, 2026 10:49 am
