Sri Lanka भारत से ज़्यादा अमीर हो चुका है, जानिये World Bank की रैंकिंग क्या कहती है?

क्या कोई देश, जिसने कुछ साल पहले अरबों डॉलर का कर्ज़ चुकाने में चूक (डिफॉल्ट) की थी, महज़ चार साल में भारत से ज़्यादा अमीर हो सकता है? World Bank की नई आय वर्गीकरण रिपोर्ट ने हैरानी और बहस छेड़ दी है। लेकिन क्या सचमुच श्रीलंका भारत से ज़्यादा अमीर हो गया है, या इसके पीछे कोई ऐसा आर्थिक सच छिपा है जिसे ज़्यादातर लोग समझ नहीं पा रहे?

भारत से ज़्यादा अमीर हो चुका है Sri Lanka?
भारत से ज़्यादा अमीर हो चुका है Sri Lanka?

World Bank के अनुसार, श्रीलंका (Sri Lanka) अब आधिकारिक तौर पर भारत से ज़्यादा अमीर हो गया है। जी हाँ, यह वही श्रीलंका है, जिसने चार साल पहले 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज़ नहीं चुका पाने के कारण डिफॉल्ट किया था। वर्षों की आर्थिक उथल-पुथल के बाद इस देश ने World Bank की आय-आधारित नई श्रेणी में फिर से ‘अपर-मिडिल-इनकम इकॉनमी’ (ऊपरी-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था) का दर्जा हासिल कर लिया है। 2022 के गंभीर आर्थिक संकट के बाद यह श्रीलंका के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

वहीं, भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके बावजूद World Bank ने भारत को अब भी ‘लोअर-मिडिल-इनकम इकॉनमी’ (निम्न-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था) की श्रेणी में रखा है।

श्रीलंका का यह प्रमोशन World Bank की आय-आधारित नई वर्गीकरण प्रणाली में किए गए वार्षिक अपडेट का हिस्सा है। ये बदलाव 1 जुलाई 2026 से लागू हुए हैं और 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेंगे। इस वार्षिक अपडेट में 218 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है, जिनमें से छह देशों को इस वर्ष उच्च आय वाली नई श्रेणियों में स्थान मिला है।

श्रीलंका के अलावा वियतनाम, फिलीपींस, जॉर्डन और फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया भी ‘लोअर-मिडिल-इनकम’ (निम्न-मध्यम आय) से ‘अपर-मिडिल-इनकम’ (ऊपरी-मध्यम आय) वाले देशों की श्रेणी में पहुँच गए हैं।

हर वर्ष World Bank देशों को प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (Gross National Income – GNI) के आधार पर चार आय वर्गों में बाँटता है। यह वर्गीकरण किसी देश की GDP, शेयर बाज़ार, सैन्य शक्ति या वैश्विक प्रभाव के आधार पर नहीं होता। इसका आधार केवल एक सवाल है—औसतन किसी देश का प्रत्येक नागरिक कितनी आय अर्जित करता है?

इस वर्ष के अपडेट में श्रीलंका दोबारा ‘अपर-मिडिल-इनकम’ श्रेणी में शामिल हो गया है, क्योंकि उसकी प्रति व्यक्ति औसत आय निर्धारित सीमा से ऊपर पहुँच गई है। दूसरी ओर, भारत अभी भी ‘लोअर-मिडिल-इनकम’ समूह में बना हुआ है, क्योंकि उसकी प्रति व्यक्ति आय अभी अगली श्रेणी की सीमा तक नहीं पहुँची है।

क्या इसका मतलब है कि श्रीलंका भारत से ज़्यादा अमीर हो गया है?

नहीं। World Bank के आय-आधारित वर्गीकरण को लेकर यही सबसे बड़ी गलतफहमी है।

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि जिस देश की अर्थव्यवस्था बड़ी है, वही सबसे अमीर भी होगा। भारत में विश्व स्तर पर पहचान रखने वाली कंपनियाँ हैं, हज़ारों स्टार्टअप हैं, तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था है और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति अधिक आय एक ही बात नहीं है।

इसे एक सरल उदाहरण से समझिए।

मान लीजिए, एक परिवार सालाना ₹1 करोड़ कमाता है, लेकिन उसमें 25 सदस्य हैं। दूसरा परिवार सालाना ₹20 लाख कमाता है, लेकिन उसमें केवल चार सदस्य हैं।

ऐसी स्थिति में पहला परिवार कुल मिलाकर अधिक कमाता है, लेकिन दूसरे परिवार के प्रत्येक सदस्य के हिस्से में औसतन अधिक आय आती है।

World Bank देशों का आकलन भी ठीक इसी तरीके से करता है। वह यह नहीं देखता कि कौन-सा देश कुल मिलाकर अधिक कमाता है, बल्कि यह देखता है कि प्रति व्यक्ति औसतन कितनी आय उपलब्ध है।

श्रीलंका ‘अपर-मिडिल-इनकम’ में और भारत अब भी ‘लोअर-मिडिल-इनकम’ में क्यों?

इसका कारण समझना आसान है।

श्रीलंका की आबादी लगभग 2.33 करोड़ है, जबकि भारत की आबादी 147.6 करोड़ से अधिक है।

यानी भारत की राष्ट्रीय आय कहीं अधिक लोगों में बँटी हुई है। इसलिए, अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी होने के बावजूद भारत की प्रति व्यक्ति औसत आय अभी भी World Bank द्वारा निर्धारित ‘अपर-मिडिल-इनकम’ सीमा से नीचे है।

दूसरी ओर, 2022 के आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ। जैसे-जैसे प्रति व्यक्ति आय बढ़ी और निर्धारित सीमा से ऊपर पहुँची, देश ने दोबारा ‘अपर-मिडिल-इनकम’ का दर्जा हासिल कर लिया।

इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि श्रीलंका अचानक भारत से अधिक समृद्ध या अधिक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बन गया है। इसका केवल इतना अर्थ है कि वहाँ प्रति व्यक्ति औसत आय भारत की तुलना में अधिक है।

दूसरे शब्दों में, World Bank औसत आय की तुलना करता है, कुल आर्थिक आकार की नहीं।

यह वर्गीकरण क्यों महत्वपूर्ण है?

हालाँकि इसे अक्सर आर्थिक प्रगति का संकेत माना जाता है, लेकिन World Bank के अनुसार उसका आय-आधारित वर्गीकरण मुख्य रूप से विश्लेषणात्मक (Analytical) और परिचालन (Operational) उद्देश्य के लिए बनाया गया है। इसका मकसद किसी देश के समग्र विकास को मापना नहीं है।

इस वर्गीकरण का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  1. सरकारें आर्थिक प्रदर्शन का आकलन करने के लिए।
  2. अंतरराष्ट्रीय संगठन और शोधकर्ता विभिन्न देशों की तुलना करने के लिए।
  3. विकास एजेंसियाँ रियायती वित्तपोषण और सहायता कार्यक्रमों की पात्रता तय करने के लिए।
  4. निवेशक किसी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक दिशा का आकलन करने के लिए।

World Bank यह भी स्पष्ट करता है कि कोई एक पैमाना किसी देश के विकास का पूरा चित्र प्रस्तुत नहीं कर सकता। असमानता, गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्थागत गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलू केवल प्रति व्यक्ति GNI (GNI per capita) से पूरी तरह नहीं समझे जा सकते।

Last Updated on July 12, 2026 1:50 pm

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