Ladli Bahin Yojna: महाराष्ट्र में ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ में बड़ा घोटला हुआ है. खुलासे में यह बात निकलकर सामने आई है कि 4.40 लाख लाभार्थी सरकारी कर्मचारी के परिवार से जुड़े हुए थे. जबकि, लाडकी बहिन योजना में ऐसा नियम नहीं है. इसके अलावा तकरीबन 12, 000 से अधिक सरकारी कर्मचारी सीधे तौर पर इस योजना का लाभ ले रहे थे. योजना के नियम के मुताबिक, सरकारी नौकरी करने वाले या जिस परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी करता हो, उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता. इतना ही नहीं, 1.80 महिलाएं भी इस योजना का लाभ ले रही थीं, जिनके पास चार पहिया वाहन थे. जबकि, नियम कहता है कि ऐसे लाभार्थियों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता. हैरान करने वाली बात यह है कि महिलाओं की इस योजना में 29, 000 पुरुष लाभार्थियों के नाम भी शामिल थे. ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि कई मीडिया रिपोर्ट्स और GAG की जांच में खुलासा हुआ है.
चर्चा में क्यों ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’?
‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ कई वजहों के चर्चा में है. सबसे बड़ी वजह इस योजना में 92 लाख से अधिक लाभार्थियों का नाम हटाया जाना है. साथ ही, योजना में वित्तीय अनिमितता भी मुख्य वजह है.
शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानमंडल में CAG की रिपोर्ट पेश की गई. इसमें योजना को लेकर वित्तीय अनिमितता को लेकर चिंता व्यक्त की गई. रिपोर्ट में CAG की तरफ से कहा गया कि महिला और बाल विकास विभाग ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’के लिए खर्च किए गए अतिरिक्त राशि सही कारण नहीं बताया.
इस योजना के लिए 29,693.09 करोड़ रुपये का अधिकृत बजट था. जबकि, योजना में 33,273.24 करोड़ रुपये खर्च हुए. यानी इस योजना में 3,541.16 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च हुए. इसके साथ ही, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि योजना के लिए बड़े पैमाने पर राजकोष से पैसे निकाले गए, जिसकी तत्काल कोई जरूरत नहीं थी.
सीएजी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया. साथ ही कहा कि ऐसा करना नियम के खिलाफ है. ऑडिट में पाया गया कि बजट का अनुमान, खर्च और वित्तीय प्रबंधन में कमियां थीं. रिपोर्ट में इस बात का भी उजागर हुआ है कि बीते साल महिला कल्याण पर 261.87 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि इस 2025-26 में इसे बढ़ाकर 33,500 करोड़ कर दिया गया.
e-KYC से पहले 14,000 करोड़ रुपये का भुगतान
Indian Express ने RTI के हवाले से एक खबर छापी है. जो लोग इस योजना के लाभार्थी नहीं थे, उनके बैंक अकाउंट में पैसे भेजे गए. कुछ लोगों को 5-6 किस्त मिलने के बाद हटाया गया. जबकि, कुछ को 10-12 किस्तें मिलने के बाद और कुछ को 15 किस्ते मिलने के बाद हटाया गया. यानी e-KYC से पहले तकरीबन 14,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था.
लाडली बहिन योजना क्या है?
‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ को 28 जून 2024 में मजूरी दी गई थी. इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को को आर्थिक सहयता प्रदान करना और आत्मनिर्भर बनाना है. योजना के तहत महिलाओं के बैंक अकाउंट में हर महीने 15,00 रुपये ट्रांस्फर किए जाते हैं.
कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?
‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें जरूरी हैं. जैसे- लाभार्थी की उम्र 21 से 65 के बीच होनी चाहिए, लाभार्थी सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए, परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए, लाभार्थी के परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए, लाभार्थी महिला हो, पुरुष इस इस योजना का लाभार्थी नहीं हो सकते, लाभार्थी के पास चार पहिया वाहन ना हो और परिवार में दो से अधिक लाभार्थी दूसरी सरकारी योजना का लाभ ना ले रहा हो.
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 लाख लोग ऐसे थे, जिनके परिवार की सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये से अधिक थी. 4.42 लाख लोग ऐसे थे, जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में था. 1.8 लाख लोग ऐसे थे, जिनकी उम्र 65 साल से अधिक थी. 3.6 लाख लोग ऐसे पाए गए, जो पहले से संजय गांधी निराधार योजना का लाभ ले रहे थे. इसके अलावा 29,000 पुरुष इस योजना का लाभ ले रहे थे. 1.80 लाख महिलाओं के नाम से चार पहिया वाहन थे.
कैसे हुआ पर्दाफाश?
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानमंडल में की वित्त लेखा परीखा 2024-25 का रिपोर्ट पेश किया गया. जिसमें कहा गया कि महिला और बाल विकास विभाग ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’के लिए खर्च किए गए अतिरिक्त राशि सही कारण नहीं बताया. रिपोर्ट में कहा गया कि इस योजना के लिए 29,693.09 करोड़ रुपये का अधिकृत बजट था. जबकि, योजना में 33,273.24 करोड़ रुपये खर्च हुए. यानी इस योजना में 3,541.16 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च हुए.
सीएजी की रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि योजना के लिए बड़े पैमाने पर राजकोष से पैसे निकाले गए, जिसकी तत्काल कोई जरूरत नहीं थी. इतना ही नहीं, सीएजी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया. साथ ही कहा कि ऐसा करना नियम के खिलाफ है. ऑडिट में पाया गया कि बजट का अनुमान, खर्च और वित्तीय प्रबंधन में कमियां थीं. रिपोर्ट में इस बात का भी उजागर हुआ है कि बीते साल महिला कल्याण पर 261.87 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि इस 2025-26 में इसे बढ़ाकर 33,500 करोड़ कर दिया गया.
NCP नेता सुप्रिया सुले ने लगाया आरोप
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रिया सुले (NCP-SP) ने आरोप लगाया कि योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि जब लाखों अपात्र लाभार्थी बाद में सामने आए, तो सरकार बताए कि बिना पर्याप्त जांच के उन्हें लाभ कैसे मिला। उन्होंने पूरे मामले पर श्वेत पत्र (White Paper) लाने और स्वतंत्र जांच की मांग की.
Last Updated on July 13, 2026 2:01 pm
