Ken Betwa Link Project: 12वें दिन भी जारी आमरण अनशन, विधानसभा में उठेगा विस्थापितों का मुद्दा

केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन 12वें दिन भी जारी है. आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर की सेहत को लेकर चिंता बढ़ रही है. इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने विधानसभा में विस्थापितों का मुद्दा उठाने का ऐलान किया है.

12 दिन से अनशन पर अमित भटनागर
12 दिन से अनशन पर अमित भटनागर

– धीरेंद्र गुप्ता

Ken Betwa Link Project: केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित विस्थापितों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. न्याय, उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का संघर्ष लगातार तेज हो रहा है. आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर का अनशन मंगलवार को 12वें दिन भी जारी रहा और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. इस बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने विस्थापितों का मुद्दा विधानसभा में उठाने का ऐलान किया है. इसके बाद आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है.

विधानसभा में उठेगा विस्थापितों का मुद्दा.

केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को अब मध्य प्रदेश विधानसभा में उठाया जाएगा. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने इस मुद्दे का संज्ञान लेते हुए कहा है कि विस्थापितों की आवाज विधानसभा के भीतर मजबूती से उठाई जाएगी. विपक्ष सरकार पर पुनर्वास और प्रभावित परिवारों की मांगों पर चर्चा करने के लिए दबाव बनाएगा.

12वें दिन भी जारी अमित भटनागर का आमरण अनशन.

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले 12 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्याओं का अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है.

गांधीवादी तरीके से जारी विरोध प्रदर्शन.

विस्थापित ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर लगातार विभिन्न प्रकार के शांतिपूर्ण और गांधीवादी आंदोलनों का सहारा ले रहे हैं. इनमें आमरण अनशन, चिता आंदोलन, मिट्टी सत्याग्रह, जल सत्याग्रह, फांसी सत्याग्रह और सूली आंदोलन शामिल हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि इन प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शनों के जरिए वे सरकार का ध्यान अपनी पीड़ा की ओर आकर्षित करना चाहते हैं.

क्या हैं विस्थापितों की मांगें.

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं. उनकी मांग केवल इतनी है कि विस्थापन के बदले उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और स्थायी आजीविका की गारंटी दी जाए. उनका कहना है कि वर्षों से जिस जमीन और आजीविका से उनका जीवन जुड़ा है, उसके बदले ठोस नीति लागू किए बिना उनका संघर्ष समाप्त नहीं होगा. अब यह देखना होगा कि विधानसभा में मामला उठने के बाद सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है.

Last Updated on July 15, 2026 12:29 pm

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