जब सोनम वांगचुक के पिता ने की थी भूख हड़ताल, इंदिरा गांधी को जाना पड़ा था लेह

Sonam Wangyal Hunger Strike: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1984 में सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल ने लद्दाख में भूख हड़ताल की थी. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेह जाना पड़ा था.

जब सोनम वांगचुक के पिता ने की थी भूख हड़ताल, इंदिरा गांधी को जाना पड़ा था लेह
जब सोनम वांगचुक के पिता ने की थी भूख हड़ताल, इंदिरा गांधी को जाना पड़ा था लेह

Sonam Wangyal Hunger Strike: शनिवार सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर से ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसे देखकर हर संवेदनशील इंसान भावुक है. इक्कीस दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत अचानक बिगड़ गई. दिल्ली पुलिस उन्हें उठाकर एंबुलेंस से सफदरजंग अस्पताल ले गई.

वांगचुक की वह तस्वीर संपूर्ण देश में चर्चा का विषय बन गई. याद कीजिए आज से तकरीबन 40 साल पहले का वह वाकया जब वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल ने भूख हड़ताल की थी. उस वक्त देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेह जाना पड़ा था. विशेष स्टोरी में जानेंगे कि किस मांग को लेकर सोनम वांग्याल ने भूख हड़ताल की थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेह क्यों जाना पड़ा था.

सोनम वांग्याल ने लद्दाख में क्यों किया था भूख हड़ताल?

India Today की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल सिर्फ राजनेता ही नहीं थे. वह 1965 में 23 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले सबसे कम उम्र के भारतीयों में शामिल रहे. हालांकि, बाद में वह राजनीति में आए और लद्दाख के लोगों की आवाज बुलंद की.

साल 1984 में उन्होंने लद्दाख के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की. उस समय लद्दाख के लोगों की मांग थी कि कि उन्हें शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए. उस वक्त उनके आंदोलन का असर इतना हुआ कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेह जाना पड़ा. हालांकि, उस वक्त मांग पूरी नहीं हुई फिर भी उन्होंने संघर्ष को जारी रखा.

5 साल बाद मिली बड़ी जीत

आखिरकार 1989 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत आदेश जारी कर लद्दाख के 8 आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दे दिया. यह लद्दाख के लंबे आंदोलन की बड़ी कामयाबी मानी गई.

4 दशक बाद बेटा भूख हड़ताल पर

चार दशक बाद अब सोनम वांगचुक भी भूख अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. पिछले साल उन्होंने लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर 35 दिन का अनशन किया था.

इस बार वांगचुक NEET पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. लेकिन, 21वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

यह भी पढ़ें: Sonam Wangchuk की गिरफ्तारी या स्वास्थ्य कारण? जानें लद्दाख से जंतर-मंतर तक अनशन-आंदोलनों का पूरा इतिहास

समय बदला लेकिन कहानी एक जैसी

समय बदल गया, मुद्दे बदल गए, लेकिन एक बात नहीं बदली. पिता ने लद्दाख के अधिकारों के लिए भूख हड़ताल की थी, जबकि बेटा छात्रों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनशन पर हैं.

हालांकि, वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि सरकार को उनकी भूख हड़ताल और उनकी मांगों पर बातचीत करनी चाहिए. उनका सवाल है कि क्या केंद्र सरकार को 59 वर्षीय सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के कारणों पर ध्यान नहीं देना चाहिए?

साथ ही, NEET और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की मांगों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या केंद्र सरकार सोनम वांगचुक की मांगों पर बातचीत करेगी? क्या लद्दाख और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस पहल होगी?

Last Updated on July 18, 2026 8:43 pm

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