- धीरेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली/पन्ना. केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken Betwa Link Projec) के विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच रविवार सुबह बड़ा घटनाक्रम सामने आया. आंदोलनकारियों के अनुसार, चिता आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर और अन्य प्रदर्शनकारियों को सुबह भारी पुलिस बल ने धरना स्थल से गिरफ्तार कर लिया. आंदोलन पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई उस समय की गई, जब अमित भटनागर मीडिया के सामने परियोजना में कथित 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले थे. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 3 जुलाई से जारी आंदोलन और 14 दिनों से चल रहे आमरण अनशन को समाप्त कराने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया. हालांकि, पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
आंदोलन का 17वां दिन, आमरण अनशन का 14वां दिन
आंदोलनकारी दिव्या अहरवार ने एक वीडियो संदेश में कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और कानून के उल्लंघन के खिलाफ उनका आंदोलन लगातार जारी है. उन्होंने बताया कि शनिवार को आंदोलन का 17वां दिन था, जबकि अमित भटनागर के आमरण अनशन का 14वां दिन चल रहा था. उनके अनुसार, आंदोलनकारी संविधान और कानून के तहत अपने अधिकारों, उचित पुनर्वास और कानूनी प्रक्रिया के पालन की मांग कर रहे हैं.
‘400 करोड़ के भ्रष्टाचार का खुलासा होने से पहले हुई गिरफ्तारी’
दिव्या अहरवार का आरोप है कि अमित भटनागर शनिवार को मीडिया के सामने परियोजना में कथित 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज और तथ्यों को सार्वजनिक करने वाले थे. उनका दावा है कि इससे पहले ही सुबह करीब 5 बजे बड़ी संख्या में पुलिस बल आंदोलन स्थल पर पहुंचा और अमित भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया.
प्रशासन पर साजिश का आरोप
आंदोलनकारी पक्ष ने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए मुख्यमंत्री, पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के स्तर पर साजिश रची गई. उनका कहना है कि आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
‘अगर कुछ हुआ तो सरकार और प्रशासन जिम्मेदार’
दिव्या अहरवार ने कहा कि यदि अमित भटनागर या किसी भी आंदोलनकारी को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की होगी. उन्होंने मीडिया, सामाजिक संगठनों और विशेष रूप से आदिवासी समुदाय से आंदोलन के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की. उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल विस्थापितों के अधिकारों की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की भी है. साथ ही उन्होंने लोगों से इस मुद्दे को अधिक से अधिक साझा करने और कथित भ्रष्टाचार तथा अधिकारों के सवाल पर आवाज बुलंद करने की अपील की.
Last Updated on July 19, 2026 11:17 am
