Bundelkhand Chita Andolan: विस्थापित परिवारों को मिलेगी 12 लाख 50 हजार रुपये की पुनर्वास सहायता

Bundelkhand Chita Andolan: पन्ना जिले के हजारों विस्थापित किसानों और आदिवासी परिवारों के लिए आखिरकार राहत की खबर आ गई है.

क्यों सुलगा बुंदेलखंड में चिता आंदोलन? आमरण-अनशन शुरू
क्यों सुलगा बुंदेलखंड में चिता आंदोलन? आमरण-अनशन शुरू

-धीरेंद्र गुप्ता

Bundelkhand Chita Andolan: पन्ना जिले के हजारों विस्थापित किसानों और आदिवासी परिवारों के लिए आखिरकार राहत की खबर आ गई है. लंबे आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और मुआवजे की मांग के बाद प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए केन-बेतवा लिंक परियोजना और अजयगढ़ की रुंझ-मझगांय परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए नई पुनर्वास नीति को मंजूरी दे दी है. अब प्रति विस्थापित परिवारों को 12 लाख 50 हजार रुपये की पुनर्वास सहायता मिलेगी.

सातवें दिन भी जारी रहा आंदोलन

केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय, रूंझ, नेगुवा तथा अन्य परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का ‘चिता आंदोलन’ सातवें दिन भी जारी रहा. आंदोलनकारियों ने इसे अपनी आंशिक जीत बताते हुए कहा कि सरकार द्वारा कुछ मुआवजा राशि बढ़ाए जाने के बावजूद आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक सभी प्रभावित परिवारों को न्याय और कथित भ्रष्टाचार के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती.

आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आमरण अनशन चौथे दिन, मिट्टी सत्याग्रह तीसरे दिन तथा जल सत्याग्रह दूसरे दिन भी जारी रहा. भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं, किसान एवं ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे.

अनेक परिवार न्याय से वंचित

आंदोलनकारियों का कहना है कि उनके लगातार संघर्ष का परिणाम है कि रूंझ और मझगांय क्षेत्र में मुआवजा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये किए जाने की घोषणा हुई है. साथ ही पन्ना जिले के केन-बेतवा परियोजना क्षेत्र के लिए 39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. प्रदर्शनकारियों ने इसे संघर्ष की आंशिक सफलता बताया, लेकिन कहा कि अभी भी अनेक प्रभावित परिवार न्याय से वंचित हैं.

आंदोलनकारियों की मांग है कि सभी वास्तविक विस्थापितों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास दिया जाए, परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित परिवारों का उत्पीड़न बंद किया जाए.

क्या है ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग?

  • सभी विस्थापित परिवारों को भूमि और आवास का उचित व सम्मानजनक मुआवजा मिले.
  • परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच हो.
  • भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों को चिन्हित कर उन्हें जेल भेजा जाए.
  • विस्थापितों को डराने-धमकाने वाली प्रशासनिक कार्रवाई तत्काल बंद की जाए.

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा- “यह केवल मुआवजे की लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की लड़ाई है. आंशिक सफलता मिली है, लेकिन जब तक हर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता और कथित दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा.”

फिलहाल आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों का धरना, आमरण अनशन, मिट्टी सत्याग्रह और जल सत्याग्रह लगातार जारी है. आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी सभी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.

क्या थी आंदोलन की वजह?

बीते दिनों छतरपुर और पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों और आदिवासियों का ‘चिता आंदोलन’ उग्र हो गया था.  अपनी पुश्तैनी जमीन, जंगल और आजीविका छिनने से व्यथित प्रदर्शनकारी सांकेतिक चिता पर लेटकर “न्याय दो या मौत” की मांग के साथ लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे. परियोजना से विस्थापित ग्रामीण लगातार भारी बारिश के बीच ‘चिता आंदोलन’ पर डटे हुए थे. अपनी पुश्तैनी जमीन, जंगल और आजीविका छिनने से व्यथित प्रदर्शनकारी जहां केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत बनाए जा रहे बांध बनाने का विरोध कर रहे थे, तो वहीं दूसरी तरफ मोहन सरकार से भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ मुआवजे प्रक्रिया हुई धांधली की निष्पक्ष जांच की मांग पर अडिग अडिग रहे. समाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रभावितों के समर्थन में आमरण-अनशन किया था.

एक नजर डालते हैं जोड़ो प्रोजेक्ट पर

केन-बेतवा परियोजना को आज से पांच साल पहले (2021) में वर्तमान केंद्र सरकार ने 44 हजार 605 करोड़ रुपये की लागत से बांध बनाने का मंजूरी दी थी. इसका मुख्य लक्ष्य यमुना की सहायक नदियां को समाहित कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी पहुंचाना था. और इसका फायदा मध्य प्रदेश 9 और उत्तर प्रदेश के 4 जिलों को मिलने की सकता है. साथ ही इस परियोजना से सूबे में 10.62 लाख हेक्टेयर और यूपी में 2.51 लाख हेक्टेयर खेती होने के साथ पूरे क्षेत्र में लोगों को पीने का पानी मिलने का भरपूर संभावना है. और सबसे बड़ी बात इस परियोजना से प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार की मदद से 103 मेगावाट जल- विद्यत व 27 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा होने की उम्मीद है.

अब जानते हैं विरोध के मुख्य कारण

इस परियोजना का विरोध कर रहें लोगों का कहना है कि लगभग 21 से 24 गांव जलमग्न हो जाएंगे, हजारों आदिवासी और किसान बेघर हो जाएंगे. बस उनका एक नारा है. ‘उन्हें जमीन के बदले जमीन और गांव के बदले गांव दिया जाए’. चिता आंदोलन में शामिल परिवारों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. मुआवजा राशि पाने के लिए भी ग्रामीणों को दर-दर भटकना पड़ता है.

इतना ही नहीं उनका आरोप है कि सरकारी ऑफिस में रिश्वतखोरी का सामना करना पड़ता है. उग्र आंदोलन में मुख्य़ भूमिका निभा रहें आदिवासियों का कहना है कि यह परियोजना से उनकी आजीविका, जंगल, प्रकृति से जुड़ी पूरी संस्कृति नष्ट हो रहा है. परियोजना के निर्माण से पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा डूब जाएगा.. इसके अलावा, लाखों पेड़ों के कटने से पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचने की खतरा है. जो सबसे बड़ा आरोप स्थानीय लोग मोहन सरकार पर लगा रहें है कि बिना ग्राम सभा की उचित सहमति के ही जबरन बांध का निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.

प्रशासन पर बड़ा आरोप

आंदोलनकारी के समर्थन में आमरण-अनशन में उतरे जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने स्थानीय प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बीते अप्रैल में आंदोलन को स्थगित किया गया था. लेकिन हमारी मांगों पर ध्यान देने के बजाय आंदोलन के नेताओं पर झूठा मुकदमा कर उन्हें जेल भेजा गया. उन्होंने कहा कि जमानत मिलने के बावजूद 250 से अधिक लोगों पर दुबारा से मुकदमा किया गया जो सरासर अन्याय है. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘‘बुंदेलखंड के लोग किसी तरह की खैरात नहीं मांग रहे हैं. हम सिर्फ यह चाहते हैं कि सरकार अपने ही बनाए कानूनों का पालन करे.’

आंदोलन में सरकार की नजर

प्रशासन आंदोलनकारियों के आरोपों (जैसे विस्थापितों को अपर्याप्त मुआवजा, बिना नोटिस के घर टूटने और भ्रष्टाचार) को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत के प्रयास कर रहा है. अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कर गड़बड़ियों को दूर करने का समयबद्ध आश्वासन दिया है. फिलहाल देखना होगा कि परियोजना बंद होती या एक बार फिर 2017 में पिपलियामंडी में फसल के उचित दाम और कर्ज माफी की मांग को लेकर किसानों के बड़ा आदोंलन जैसे रूप लेगा. क्योंकि 6 जून 2017 के उस आंदोलन में पुलिस गोली 6 किसानों की मौत हो गई थी.

Last Updated on July 11, 2026 9:39 am

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