Smartphone Addiction: मोबाइल फोन की लत आजकल हर उम्र के लोगों में है. खासतौर पर बच्चे और नौजवान मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बिना पल भर भी नहीं रह सकते. आजकल की लाइफस्टाइल में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भोजन से कहीं ज्यादा जरूरी हो गए हैं. बच्चों की जिद पर उनके माता-पिता तुरंत उनके हाथों में मोबाइल फोन थमा देते हैं और फिर वे किसी दूसरे काम में लग जाते हैं. नतीजा ये होता है कि बच्चे मोबाइल फोन पर घंटों अपनी नजरें जमाए रखते हैं, गेम खेलने के लिए, रील्स देखने के लिए, कार्टून जैसी दूसरी मनोरंजन की चीजें देखने के लिए. मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स शरीर से लेकर दिमाग तक किस प्रकार असर डाल सकते हैं, आइए जानते हैं.
आगे की ओर झुकाकर क्यों नहीं देखना चाहिए मोबाइल?
मोबाइल फोन को आगे की ओर झुकाकर देखने से आपकी गर्दन पर 27 किलोग्राम का वजन पड़ सकता है. ऐसा करने से समय के साथ-साथ आपकी रीढ़ की हड्डी, मसल्स, जॉइंट्स भी नुकसान पहुंच सकते हैं और आपके फेफड़ों को भी कमजोर कर सकता है. इसके साथ ही आपकी कमर की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं.
किस तरह करना चाहिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल?
जब आप फोन को देखें तो, थोड़ा उठाकर देखें. फोन की स्क्रीन को अपनी आंखों के बिल्कुल सामने रखें. फोन आपके चेहरे से लगभग 1 हाथ की दूरी पर होना चाहिए. यही बात कंप्यूटर या लैपटॉप पर भी लागू होती है. कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लैपटॉप या डेस्कटॉप पर काम करने के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना भी बेहतर होगा.
आंखों पर क्या होता है असर?
बीबीसी की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों के दावे की पुष्टि के साथ एक खबर लिखी गई है. जिसमें कहा गया है कि किस प्रकार मोबाइल और दूसरी डिवाइसेज शरीर की बनावट पर असर डाल रही हैं. मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के इस्तेमाल से गर्दन का आकार बदल जाता है, आंखों को नुकसान पहुंचता है, हाथों के मूवमेंट्स बदल जाते हैं और ग्रिप भी बदल रही है. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर निर्भर हमारी लाइफस्टाइल से चेहरे पर झुर्रियां भी पड़ रही हैं.
इतना ही नहीं, शारीरिक समस्या के साथ आगे चलकर हमारी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है. ब्रिटेन के स्किन स्पेशलिस्ट जस्टिन हैंगस्टॉल के मुताबिक, गर्दन पर बार-बार दबाव पड़ने से चेहरे पर झुर्रियां आती हैं.
स्मार्टवॉच से क्या हो सकता है नुकसान?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जो लोग स्मार्टवॉच कभी नहीं उतारते, उन्हें स्किन में जलन की समस्या या यहां तक कि एक्जिमा भी हो सकता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स ने इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं, जैसे कि- स्मार्टवॉच लगातार पहनकर न रखें, उसे बार-बार उतारें और स्किन को धोएं.
मायोपिया जैसी बीमारी का खतरा
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स मायोपिया जैसी आंख की बीमारी भी उत्पन्न कर सकते हैं. बताया जाता है कि पिछले कुछ दशकों से मायोपिया जैसी बीमारी बहुत तेजी से बढ़ी है. क्या मायोपिया नजदीक से काम करने की वजह से होता है? इसका जवाब है नहीं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि माना जाता है कि बाहर की तेज रोशनी रेटिना में डोपामीन को बढ़ाती है. ऐसा लगता है कि यह आंखों के विकास की गति को प्रभावित कर सकता है.
क्या है समाधान?
समाधान यह है कि आपको कुछ समय के लिए घर से बाहर भी निकलना चाहिए. ऐसा करने से न सिर्फ आंखें अच्छी रहती हैं, बल्कि इससे नींद भी अच्छी आती है. इसके अलावा ग्रिप यानी किसी चीज को पकड़ना भी हमारी सेहत के लिए जरूरी होता है. एक स्टडी के मुताबिक, ब्लड प्रेशर से ज्यादा यह महत्वपूर्ण है कि आपकी ग्रिप कितनी मजबूत है. इससे रिस्क ऑफ डेथ का पता लगाया जा सकता है. कई देशों में युवाओं में ग्रिप स्ट्रेंथ लगातार कम होती जा रही है.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल सोशियोलॉजी के प्रोफेसर जोहानेस बेलर कहते हैं- “एक पीढ़ी में ताकत की यह कमी केवल कमजोर हाथों की बात नहीं है, बल्कि यह युवा पीढ़ी के भविष्य के स्वास्थ्य के बारे में एक शुरुआती चेतावनी हो सकती है.”
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Last Updated on July 10, 2026 5:48 pm
