Cervical Cancer Vaccine: भारत में 14 साल की लड़कियों के लिए शुरू किए गए देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीनेशन प्रोग्राम को चार महीने से अधिक समय हो चुका है. इस दौरान दिल्ली में करीब 13,500 वैक्सीन डोज दी जा चुकी हैं. हालांकि, यह संख्या शुरुआती लक्ष्य की तुलना में कम मानी जा रही है. इस वजह से अब दिल्ली सरकार ने स्कूलों के माध्यम से इस अभियान को तेज करने का फैसला किया है. स्वास्थ्य विभाग ने अगले 100 दिनों में 1.49 लाख लड़कियों को HPV वैक्सीन लगाने का लक्ष्य तय किया है.
90 दिनों की समीक्षा के बाद बना नया प्लान
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने अभियान के पहले 90 दिनों की समीक्षा की. समीक्षा में पाया गया कि वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने के लिए स्कूलों की भागीदारी बेहद जरूरी है. इस कारण स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग के साथ दोबारा समन्वय स्थापित करने का फैसला किया है.
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुल चुके हैं, इसलिए अब अभियान को नई गति दी जाएगी. विभाग का मानना है कि यदि स्कूलों का पूरा सहयोग मिला तो अगले 100 दिनों में तय लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
कब शुरू हुआ था HPV वैक्सीनेशन?
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने 28 फरवरी को 14 वर्ष की लड़कियों के लिए राष्ट्रीय HPV वैक्सीनेशन कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इस अभियान का उद्देश्य हर साल देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 1.15 करोड़ किशोरियों को HPV वैक्सीन उपलब्ध कराना है.
यह कार्यक्रम सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए शुरू किया गया है. HPV संक्रमण को सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है और यह वैक्सीन उसी वायरस से सुरक्षा प्रदान करती है.
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए क्यों है बड़ी चुनौती?
भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है. यह महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में भी शामिल है.
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की GLOBOCAN 2022 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल 1.2 लाख से अधिक नए सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आते हैं, जबकि लगभग 80 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी से हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर HPV वैक्सीनेशन और नियमित स्क्रीनिंग से इन मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है.
क्यों धीमी रही वैक्सीनेशन की रफ्तार?
दिल्ली में मई तक लगभग 11 हजार डोज लगाई गई थीं, जो अब बढ़कर करीब 13,500 हो गई हैं. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह प्रगति उम्मीद से कम रही. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्कूलों में परीक्षाएं और उसके बाद गर्मी की छुट्टियां रहीं.
स्वास्थ्य विभाग ने मार्च में ही शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अभियान में सहयोग मांगा था, लेकिन परीक्षा और छुट्टियों के कारण स्कूलों में वैक्सीनेशन गतिविधियां प्रभावी ढंग से शुरू नहीं हो सकीं. इससे लगभग एक महीने से अधिक का अंतराल आ गया और अभियान की गति प्रभावित हुई.
स्कूलों में फिर शुरू हुई तैयारी
स्कूल खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा अभियान तेज कर दिया है. विभाग के अधिकारी सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (DDE) और स्कूल प्रिंसिपलों के साथ वर्चुअल और ऑफलाइन बैठकें कर रहे हैं.
सरकारी डॉक्टर स्कूलों में जाकर छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को HPV संक्रमण और वैक्सीन के बारे में जानकारी दे रहे हैं. इसके साथ ही माता-पिता की सहमति के लिए जरूरी फॉर्म भी दोबारा भेजे जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक छात्राएं टीकाकरण में शामिल हो सकें.
अफवाहों और गलत जानकारी से निपटने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती वैक्सीन को लेकर फैली हिचकिचाहट और सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत जानकारी है. इसी वजह से विभाग ने बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू किया है.
वरिष्ठ डॉक्टरों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं, जिनमें HPV वैक्सीन की सुरक्षा और इसके लाभों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी जा रही है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और सर्फ प्रमाणित चिकित्सा सलाह पर ही विश्वास करें.
माता-पिता का भरोसा जीतने की कोशिश
स्वास्थ्य विभाग माता-पिता का विश्वास बढ़ाने के लिए उन महिलाओं के अनुभव भी साझा कर रहा है जिन्होंने वर्षों पहले HPV वैक्सीन लगवाई थी. अधिकारियों के अनुसार, 2009 में टीका लगवाने वाली कई महिलाएं आज पूरी तरह स्वस्थ हैं, मां बन चुकी हैं और सामान्य जीवन जी रही हैं. इन अनुभवों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि HPV वैक्सीन सुरक्षित, प्रभावी और लंबे समय तक सुरक्षा देने वाली वैक्सीन है.
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सरकारी स्कूलों पर रहेगा विशेष फोकस
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सरकारी स्कूलों के माध्यम से बड़ी संख्या में किशोरियों (10 से 19 वर्ष) तक पहुंचा जा सकता है. इसलिए नए चरण में सरकारी स्कूलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
कक्षा स्तर पर जागरूकता सत्र, माता-पिता की काउंसलिंग, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच बेहतर समन्वय से साथ नियमित वैक्सीनेशन शिविरों के जरिए अगले तीन महीनों में टीकाकरण की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि HPV वैक्सीनेशन केवल एक टीकाकरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लाखों महिलाओं को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यदि जागरूकता और स्कूलों का सहयोग बढ़ता है, तो दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश में इस अभियान के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं.
Last Updated on July 18, 2026 10:16 am
