Sikkim Tunnel Collapse: सिक्किम में बन रही एक सुरंग के अंदर मीथेन गैस के धमाके से लैंडस्लाइड के कारण सुरंग का रास्ता बंद हो गया. इसके लोगों के बाहर निकलने का रास्ता भी रुक गया. इस घटना में 10 मजदूरों की मौत हो गई और कम से कम 16 मजदूर अभी भी अंदर फंसे हुए हैं. सुरंग के अंदर कुल 25 मजदूर फंसे थे, जिनमें नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के कर्मचारी भी शामिल थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला प्रशासन ने 10 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि बाकी 15 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य जारी है.
मीथेन गैस ने डाली बचाव अभियान में बाधा
नामची जिले में NHPC तीस्ता स्टेज-VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन सुरंग के अंदर, मुश्किल हालात के बावजूद बचाव दल लगातार दूसरे दिन भी बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चला रहे हैं. खतरनाक मीथेन गैस, ऑक्सीजन का कम स्तर, कम विज़िबिलिटी और सुरंग का संकरा रास्ता – इन वजहों से बचाव अभियान में भारी रुकावट आ रही है, जिससे बचाव कर्मियों के लिए फंसे हुए लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के अंदर करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पर मीथेन गैस जमा हो गई थी.
माना जा रहा है कि यह गैस जमीन के नीचे की चट्टानों या परतों से प्राकृतिक रूप से निकल रही थी. फंसी हुई गैस को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान धमाका हुआ, जिससे जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटना हुई और सुरंग का एक हिस्सा बंद हो गया.
घटना के तुरंत बाद कुछ मजदूर तो बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन दर्जनों लोग सुरंग के अंदर ही फंसे रह गए. जिला प्रशासन को सोमवार दोपहर करीब 3:40 बजे इस घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद NDRF, SDRF, जिला पुलिस और फायर एंड इमरजेंसी सर्विस की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं.
बचाव कर्मियो को हुई सांस लेने में दिक्कत
फायर और इमरजेंसी सर्विस की शुरुआती बचाव कोशिश को रोकना पड़ा, क्योंकि सुरंग के अंदर मीथेन गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण बचाव कर्मियों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी. खबर है कि ऑपरेशन के दौरान कई बचाव कर्मी बीमार पड़ गए. इसके बाद नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमों ने भी कोशिश की, लेकिन खतरनाक हालात की वजह से उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली.
बचाव अभियान को और मज़बूत करने के लिए, पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से गैस से बचाने वाले उपकरणों से लैस एक खास टीम बुलाई गई. साथ ही, पाकयोंग और सिलीगुड़ी में तैनात NDRF की दूसरी बटालियन के अतिरिक्त कर्मियों और अन्य इमरजेंसी रिस्पॉन्स एजेंसियों को भी तैनात किया गया है.
प्रधानमंत्री ने जताया दुख
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से बात की. साथ ही टनल ढहने के बाद चल रहे बचाव कार्यों के बारे में जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों के प्रति चिंता जताई और केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.
हादसे के बाद प्रधानमंत्री का पोस्ट
“सिक्किम के नामची में बन रही एक सुरंग के ढहने से हुई मौत से मुझे बहुत दुख हुआ है. मैं पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हो जाएं. मृतकों के परिजनों को PMNRF से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे”
मरने वालों में कहां-कहां के लोग?
हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. इनमें तीन मृतक पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं, जिनकी पहचान बोलो ओरांव, गोरा ओरांव और बाइकसर ओरांव के रूप में हुई है. वहीं, असम के दो लोगों की पहचान बाबुल बोरोदलाई और लाकपा दोरजी तमांग के रूप में हुई है. इसके अलावा पंजाब के यशोहाल और उत्तराखंड के विकी रावत की भी मौत हुई है. तीन अन्य शवों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है.
नामची जिला प्रशासन, NHPC, NDRF, SDRF, सिक्किम पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने सिक्किम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SSDMA) की निगरानी में पूरी रात राहत और बचाव अभियान चलाया. सभी टीमें मिलकर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और हालात सामान्य करने में जुटी रहीं.
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गृह मंत्री ने लिया स्थिति का जायजा
प्रदानमंत्री के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सिक्किम के मुख्यमंत्री से बात करके हालात की जानकारी ली. अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने चल रहे बचाव कार्यों का जायजा लिया और प्रभावित लोगों को केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.
अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार दोपहर समरडुंग में NHPC तीस्ता स्टेज VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर करीब 27 कर्मचारी फंस गए थे. भूस्खलन के कारण सुरंग का मेन गेट बंद हो गया और गैस लीक होने की आशंका पैदा हो गई.
खबरों के अनुसार, फंसे हुए कर्मचारियों तक पहुंचने की कोशिश के दौरान कई बचावकर्मी चक्कर आने और बेहोश होने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. अधिकारियों को शक है कि गैस जमीन के नीचे की परतों या चट्टानों से प्राकृतिक रूप से निकली हो सकती है, जो भूस्खलन के कारण हिल गई थीं.
Last Updated on July 22, 2026 8:21 am
