Noida: Jewar Airport ऑपरेशनल होने के एक महीने बाद ही Akasa Air ने क्यों रद्द की उड़ानें?

Noida Jewar Airport: अकासा एयर ने नोएडा से नवी मुंबई के लिए भरने वाली उड़ानों को दो हफ्ते के भीतर रद्द कर दिया है. आकासा एयर का कहना है कि उड़ानों के लिए हवाई अड्डा काबिल नहीं है.

Noida जेवर Airport को बड़ा नुकसान! Akasa Air ने क्यों रद्द की उड़ानें
Noida जेवर Airport को बड़ा नुकसान! Akasa Air ने क्यों रद्द की उड़ानें

Noida Jewar Airport:  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, देश का सबसे नया हवाई अड्डा, चालू होने के पहले ही हफ्तों में एक एयरलाइन खो बैठा है. आकासा एयर ने नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन का हवाला देते हुए, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच अपनी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू होने के सिर्फ दो हफ्ते बाद ही रोक दी हैं. एयरलाइन के मुताबिक वह 1 अक्टूबर से इस सर्विस को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है, जबकि इंडस्ट्री के अधिकारी खराब ज़मीनी कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट के ज़्यादा चार्ज को मांग पर असर डालने वाली मुख्य बाधाएं बता रहे हैं. यह कदम एक बड़े नेटवर्क ऑप्टिमाइज़ेशन प्लान का हिस्सा है. एयरलाइंस यात्रियों की बदलती मांग और ऑपरेशन से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए भारत के नए एयरपोर्ट्स पर अपने कामकाज में बदलाव कर रही हैं.

 उड़ानें रद्द करने के पीछे क्या थी वजह?

हालांकि, इंडस्ट्री पर नज़र रखने वालों का कहना है कि यह फ़ैसला दो ग्रीनफ़ील्ड एयरपोर्ट्स के बीच ऑपरेशन चलाने की कमर्शियल हकीकत को दिखाता है, जहां अभी भी ट्रैफ़िक वॉल्यूम, ज़मीनी कनेक्टिविटी और सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहे हैं. जब 16 जून को नोएडा एयरपोर्ट पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हुआ, तो इंडिगो और आकासा ने मिलकर रोज़ाना 12 उड़ानें भरीं; इनमें से आठ उड़ानें इंडिगो की थीं और चार आकासा की. फिलहाल अकासा अकेली एयरलाइन थी जो नवी मुंबई और नोएडा के बीच डायरेक्ट फ्लाइट चला रही थी.

आकाशा ने कब शुरू किया था परिचालन?

कम मांग और कनेक्टिविटी की चुनौतियों के कारण नए एयरपोर्ट-टू-एयरपोर्ट रूट की व्यवहार्यता की परीक्षा हो रही है. अकासा एयर ने अपनी विस्तार रणनीति के तहत 16 जून को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से परिचालन शुरू किया और नवी मुंबई तथा बेंगलुरु के लिए दैनिक सीधी उड़ानें शुरू कीं.

एयरलाइन ने दोनों एयरपोर्ट को भविष्य के रणनीतिक हब के रूप में स्थापित किया है और इन दोनों स्थानों पर धीरे-धीरे और अधिक विमान तैनात करने की योजना है. हालांकि, नोएडा-नवी मुंबई रूट पर शुरुआती हफ़्तों में यात्रियों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है.

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि दोनों एयरपोर्ट तक सड़क और रेल से आसान कनेक्टिविटी न होने के कारण यात्रियों की मांग कम रही है. टैक्सी का ज़्यादा किराया, सीधी मेट्रो या रैपिड रेल लिंक का न होना और एयरपोर्ट के ऊंचे चार्ज यात्रियों के लिए बड़ी रुकावटें साबित हुए हैं.

इन वजहों से, दो बड़े मेट्रोपॉलिटन इलाकों को जोड़ने के बावजूद यह रूट यात्रियों के लिए कम आकर्षक साबित हो रहा है. यही कारण है कि एयरलाइन को अपने जहाजों को बेहतर प्रदर्शन करने वाले रूटों पर फिर से लगाना पड़ा.

बताया जा रहा है की एयरलाइंस ने रेगुलेटर्स के सामने भी ये चिंताएं जताई थीं. अप्रैल में एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) के साथ बातचीत के दौरान, इंडिगो और एयर इंडिया ने तर्क दिया कि एयरपोर्ट के ज़्यादा चार्ज और पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी की कमी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कमर्शियल भविष्य पर बुरा असर डाल सकती है.

एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए क्या है चुनौती?

उम्मीद है कि नए एयरपोर्ट्स से बड़े मेट्रो शहरों के हब पर भीड़ कम होगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी, लेकिन एयरलाइंस को यात्रियों की टिकाऊ मांग बनाने में अक्सर समय लगता है. रूट का प्रदर्शन न केवल हवाई ट्रैफिक पर, बल्कि सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी, बिजनेस ट्रैवल की मांग और प्रतिस्पर्धी कीमतों जैसे कारकों पर भी निर्भर करता है.

एविएशन एनालिस्ट का यह भी कहना है कि ऐसे रूट के कमर्शियल तौर पर फायदेमंद बनने से पहले एयरलाइंस को आम तौर पर लगातार डिमांड, बिना रुकावट वाली मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और कॉम्पिटिटिव ऑपरेटिंग कॉस्ट की जरूरत होती है.

शुरुआती चरण में हैं दोनों हवाई अड्डे 

कई बार देरी होने के बाद जून में कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के, नेशनल कैपिटल रीजन के लिए एक बड़े एविएशन हब के तौर पर उभरने की उम्मीद है. इसी तरह, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मुंबई के मौजूदा एयरपोर्ट के साथ मिलकर काम करने और शहर में हवाई यात्रा की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है. लंबे समय में इनकी क्षमता के बावजूद, दोनों एयरपोर्ट अभी भी ऑपरेशन बढ़ाने और एयरलाइंस व यात्रियों को आकर्षित करने के शुरुआती दौर में हैं.

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जैसे-जैसे भारत का एविएशन सेक्टर बढ़ रहा है, एयरलाइंस से उम्मीद की जाती है कि वे मार्केट की स्थितियों के हिसाब से शेड्यूल और कैपेसिटी में बदलाव करने में लचीलापन बनाए रखेंगी.

नोएडा-नवी मुंबई सर्विस को कुछ समय के लिए बंद करने से यह बात सामने आती है कि भले ही एयरपोर्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बनाया जा सकता है, लेकिन यात्रियों की लगातार मांग पैदा करना एक लंबी प्रक्रिया है जो आर्थिक गतिविधियों, पहुंच और यात्रियों की पसंद पर निर्भर करती है.

Last Updated on July 14, 2026 8:46 pm

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