Reported by- धीरेंद्र गुप्ता/Written By-पिंटू कुमार
Datia By Election: मध्यप्रदेश की राजनीति में बादशाह, रणनीतिकार और कई बड़े उपनामों से मशहूर पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने पूरे दतिया में बवाल मचा दिया है. अपने तेजतर्रार बयानों से पूरे प्रदेश में पहचान बनाने वाले मिश्रा जी कभी गृह मंत्री रह चुके हैं. उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद उनके चेहते लोगों ने पूरे दतिया को रोक दिया.साथ ही, जहां हाइवे को जाम किया गया वहीं जमकर पत्थरबाजी भी हुई. लेकिन इसके बीच पूर्व मंत्री ने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है. साथ ही कहा है कि टिकट देना या न देना, पार्टी तय करेगी. वहीं आरएसएस से संबंध रखने वाले आशुतोष तिवारी को टिकट दिया गया है.
नाराज कई नेताओं दिया इस्तीफा
एमपी बीजेपी के दादा को टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है. जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेज चुके हैं हालांकि टिकट मिलने की पूरी उम्मीद से नरोतम मिश्रा आवदेन भी खरीद चुके थे. दो दिन पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मिल भी चुके थे और पूर्ण रूप आश्वस्त थे कि उपचुनाव में मैदान में उतरेंगे.
बीजेपी ने टिकट क्यों नहीं दिया?
कुछ बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर उपचुनाव दादा जीत जाते हैं, तो वे सूबे के राजनीति वे बड़े चेहरे फिर से बन जाते. उन्होंने कहा कि सीएम मोहन यादव कभी नहीं चाहेंगे कि उनका दुबारा राजनीति में वापसी हो. क्योंकि, अभी सीएम अपनी राजनीति पकड़ मजबूत करने में लगे हैं. वैसे भी वे कई मुद्दों पर असफल रहे हैं और ऐसे दादा का प्रभाव उनके राजनीति कैरियर को धूमिल कर सकता है. इसलिए पार्टी नेतृत्व कभी नहीं चाहेगी कि उनको टिकट दिया जाए.
दादा बनाम आशुतोष तिवारी
आशुतोष तिवारी जिनकी पहचान एक संगठनात्मक नेता की रही है. उन्होंने एबीवीपी से बीजेपी संगठन तक के कई पदों पर सेवा दे चुके हैं उनकी पूरी राजनीति सफर संगठन के भीतर रही है. पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन ने व्यक्तिगत कद से हटकर जमीनी स्तर के नेता को टिकट दिया है, जिससे चुनाव के परिणाम अच्छे होंगो. साथ ही उन्होंने कहा कि निष्ठा के मामले में नरोत्तम मिश्रा से बेहतर साबित होंगे तिवारी जी.
क्या बदलेगा चुनावी गणित ?
अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक ब्राह्मण मतदाता 33 से 35 हजार के बीच हैं जिन्हें बीजेपी का पारंपरिक आधार माना जाता है. अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या लगभग 58 से 60 हजार बताई जाती है. इनमें जाटव और अहिरवार समाज के मतदाता बड़ी संख्या में हैं. कुशवाह समाज के करीब 28 से 30 हजार मतदाता हैं. यादव समाज के मतदाताओं की संख्या 14 से 18 हजार के बीच मानी जातीहै. इसके अलावा ठाकुर, वैश्य, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी चुनावी नतीजे को प्रभावित करते हैं.
Last Updated on July 12, 2026 1:16 pm
