Delhi Surrogacy Case: दिल्ली के एक दंपति ने दक्षिण दिल्ली के SCI इंटरनेशनल हॉस्पिटल पर सरोगेसी प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताओं और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. दंपति का कहना है कि कई साल तक संतान पाने की कोशिश के बाद उन्होंने इस अस्पताल का रुख किया. इससे पहले कई डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि IVF के जरिए गर्भधारण की संभावना बेहद कम है. इसके बाद अस्पताल ने उन्हें सरोगेसी का विकल्प सुझाया और एक सरोगेट मदर की व्यवस्था करने का दावा किया.
सरोगेट मदर से नहीं मिलने दिया
दंपति का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें सरोगेट मदर से मिलने नहीं दिया गया. अस्पताल सिर्फ अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और मेडिकल अपडेट देता रहा. उनका कहना है कि जब उन्होंने दूसरी लैब से जांच कराने की इच्छा जताई, तो इसकी भी अनुमति नहीं दी गई.
बाद में जब उन्हें पहली बार कथित सरोगेट मदर दिखाई गई तो उनकी उम्र और हालत को देखकर उन्हें संदेह हुआ. जुलाई, 2021 में जब वे उससे मिले, तब भी उसका बेबी बंप नहीं था, जबकि अस्पताल उसे पांच महीने की गर्भवती बता चुका था.
जुड़वां बच्चों की जानकारी पर उठे सवाल
दंपति के मुताबिक, अगस्त 2021 में अस्पताल ने बताया कि सरोगेट मदर ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है. अस्पताल का दावा था कि बच्ची मृत पैदा हुई, जबकि लड़का जीवित है. दंपति का आरोप है कि उन्हें मृत बच्ची को देखने नहीं दिया गया और उसके अंतिम संस्कार या अन्य प्रक्रिया की भी कोई जानकारी नहीं दी गई. इसके अलावा, बच्चे के जन्म के बाद भी उन्हें सरोगेट मदर से मिलने नहीं दिया गया.
कोर्ट पहुंचे, FIR दर्ज करने का आदेश
दंपति ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उन्हें जो जीवित बच्चा दिखाया, वह जैविक रूप से उनका बच्चा नहीं था. उनका यह भी कहना है कि उन्हें सरोगेट मदर की पहचान से जुड़ा कोई प्रमाण नहीं दिया गया. इन आरोपों के आधार पर साकेत कोर्ट ने 16 दिसंबर 2024 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और संभावित कमर्शियल सरोगेसी रैकेट की जांच की जरूरत है.
अस्पताल ने आरोपों से किया इनकार
अस्पताल ने सभी आरोपों को खारिज किया है. अस्पताल का कहना है कि सरोगेट मदर ने एक मृत बच्ची और एक जीवित बच्चे को जन्म दिया था. अस्पताल का यह भी दावा है कि दंपति ने जीवित बच्चे की कस्टडी लेने से इनकार कर दिया था. फिलहाल FIR दर्ज होने के बावजूद अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है. मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी.
यह भी पढ़ें: दिल्ली में बड़े पैमाने पर चल रहे ‘नवजात तस्करी गिरोह’ का पर्दाफाश, लाखों में होती थी डील
मानसिक और आर्थिक रूप से टूट गया दंपति
दंपति का कहना है कि इस पूरे मामले ने उनकी जिंदगी बदल दी. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उनकी भावनाओं का फायदा उठाया और सरोगेसी के नाम पर लाखों रुपये वसूले. उनका दावा है कि इस प्रक्रिया में उनका लगभग 41 लाख रुपये का बिल बना और उन्होंने 7 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया.
लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ा है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. जबकि, इस मामले पर अदालत की कार्रवाई के बाद ही पूरा सच सामने आएगा.
Last Updated on July 14, 2026 8:36 pm
